US-Iran War: युद्ध से खाद्य तेल आयात प्रभावित होने की आशंका, पाम आयात के साथ इसके दाम भी बढ़ेंगे
अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव से भारत के खाद्य तेल आयात पर असर की आशंका बढ़ गई है। सप्लाई बाधित होने पर सोया और सनफ्लावर तेल महंगे होंगे, जिससे पाम ऑयल की मांग व कीमतें बढ़ सकती हैं। बढ़ती लागत से घरेलू बाजार में दाम चढ़ने की संभावना है।
अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध मंगलवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया। यह युद्ध गंभीर रूप लेते हुए पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर इन चीफ के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी ने एक बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा है तो रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जवान और ईरानी नौसेना उसमें आग लगा देगी।
जिस जगह पर यह जलडमरूमध्य सबसे संकरा है, वहां इसकी चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है। यह सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के जवाब में ईरान रिहायशी इमारतों, होटलों और सैनिक ठिकानों के साथ-साथ बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर भी हमले कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते दुनिया का 20% कच्चा तेल व्यापार होता है। भारत का लगभग आधा कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से आता है। दूसरी अनेक वस्तुओं के आयात-निर्यात के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ इस युद्ध के कारण भारत के खाद्य तेल आयात पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे घरेलू बाजार में इनके दाम भी बढ़ सकते हैं। हालांकि सरसों किसानों को आने वाले समय में अच्छे दाम मिलने की भी संभावना है।
50 प्रतिशत आयात सोया और सनफ्लावर ऑयल का
श्री रेणुका शुगर्स के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के पूर्व अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने रूरल वॉयस को बताया कि भारत के खाद्य तेल आयात में अभी लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पाम ऑयल का होता है। बाकी 50 प्रतिशत आयात सोया और सनफ्लावर ऑयल रहता है। उन्होंने बताया कि इस समय पाम ऑयल की कीमत 1140 डॉलर प्रति टन (सीएंडएफ) के आसपास है। सनफ्लावर की कीमत 1400-1425 डॉलर और सोया ऑयल की 1250 डॉलर प्रति टन के करीब चल रही है।
भारत खाद्य तेल की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है। हर साल लगभग 1.6 करोड़ टन खाद्य तेल का आयात होता है, जिसमें सनफ्लावर ऑयल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। पाम तेल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात होता है, जबकि सोयाबीन तेल अर्जेंटीना, ब्राजील और अमेरिका से तथा सूरजमुखी तेल रूस और यूक्रेन से आता है। इनका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर से होकर गुजरता है। यदि जहाजों को रेड सी मार्ग से हटकर वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़े, तो आपूर्ति में देरी हो सकती है। चतुर्वेदी के अनुसार, रूट बदलकर आयात करने पर सोया और सनफ्लावर ऑयल की लागत लगभग 50 डॉलर प्रति टन बढ़ जाएगी।
चतुर्वेदी के मुताबिक सोया और सनफ्लावर ऑयल की सप्लाई का संकट होने पर पाम ऑयल की मांग बढ़ेगी। पाम की आयात मांग बढ़ने पर इसके दाम भी बढ़ने के आसार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी भारत में सरसों की फसल आने वाली है। मांग बढ़ने की वजह से इसके किसानों को अच्छा दाम मिल सकता है।
घरेलू बाजार में कीमतों पर होगा असर
भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (IVPA) ने एक बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाद्य तेल बाजार पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से जहां लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है, वहीं खाद्य तेल और वैश्विक बायोफ्यूल बाजार के आपसी संबंध के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर महंगाई का दबाव बनता है। साथ ही, जहाजों के बीमा जोखिम भी बढ़ सकते हैं। संघ के मुताबिक भारत खाद्य तेलों के आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह का व्यवधान घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर-अक्टूबर) की नवंबर-जनवरी अवधि में भारत ने 38.78 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि के 39.21 लाख टन से थोड़ा कम है। इसमें सूरजमुखी तेल की हिस्सेदारी 7.62 लाख टन रही।
ऑयलमील का निर्यात भी प्रभावित
भारत अपने कुल ऑयलमील निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत ऑयलमील दक्षिण-पूर्व एशिया, 20 प्रतिशत पश्चिम एशिया और 15 प्रतिशत यूरोप को भेजता है। युद्ध के कारण यह निर्यात भी प्रभावित होगा। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान भारत ने कुल 32.35 लाख टन ऑयलमील का निर्यात किया, जबकि 2024-25 की समान अवधि में यह 43.42 लाख टन था। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के दौरान पश्चिम एशियाई बाजारों को भारत का निर्यात 4.43 लाख टन रहा।

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