अल नीनो के कारण अभी तक मानसून की बारिश 43 प्रतिशत कम, 12 राज्यों के 315 जिले प्रभावित रहने की आशंका

कृषि मंत्री ने बताया कि 12 राज्यों में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। अभी तक के अनुमान के अनुसार देश के 315 जिलों में बारिश कम रहने के आसार हैं।

अल नीनो के कारण अभी तक मानसून की बारिश 43 प्रतिशत कम, 12 राज्यों के 315 जिले प्रभावित रहने की आशंका

मानसून पर अल नीनो का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। अभी तक मानसून की बारिश 43 प्रतिशत कम है। आगे भी 2 जुलाई तक मानसून कमजोर रहने के आसार हैं और खरीफ की फसल पर इसका असर पड़ सकता है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और प्रभावित जिलों के कलेक्टर, आईसीएआर तथा आईएमडी अधिकारियों की बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 12 राज्यों में अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। इनमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। 

कृषि मंत्री ने बताया कि अभी तक के अनुमान के अनुसार देश के 315 जिलों में बारिश कम रहने की आशंका है। इन जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें से 111 जिले उच्च प्राथमिकता वाले होंगे क्योंकि वहां सिंचाई की व्यवस्था 25 प्रतिशत से कम है। मध्यम प्राथमिकता यानी 25-50 प्रतिशत सिंचाई व्यवस्था वाले 76 जिले हैं। इनके अलावा 128 जिले निम्न प्राथमिकता वाले हैं क्योंकि वहां डैम और सिंचाई की दूसरी व्यवस्था है। दिल्ली में अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वॉच ग्रुप बनाए गए हैं ताकि हालात की लगातार समीक्षा की जा सके। राज्यों से भी नोडल अफसर तय करने को कहा गया है।

शिवराज ने बताया कि जिलों के वैकल्पिक प्लान बनाए गए हैं कि बारिश कम होने की स्थिति में वहां कौन सी फसल लगाई जाएगी। सभी राज्यों से आग्रह किया गया है कि जो उपलब्ध पानी है उसका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करें। इसके लिए मनरेगा और उसकी जगह लेने वाली वीबी जी राम जी योजना का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

कृषि मंत्री के अनुसार कम बारिश के आसार को देखते हुए कम अवधि वाली फसलें चिंन्हित की गई हैं। ऐसी फसलें जो जलवायु अनुकूल हों और साथ ही फसलों का विविधीकरण भी हो। दलहन, मोटा अनाज और तिलहन ऐसी फसलें हैं जो कम पानी में भी ठीक से हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बारिश तो होगी ही कि कोई न कोई फसल हो जाए। इसलिए राज्यों को वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दी गई है।

कृषि मंत्री ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में बीज की पर्याप्त व्यवस्था है। अगर कुछ जिलों में दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ी तो उसके लिए भी व्यवस्था की गई है। बीज उपलब्ध कराने में देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। किसानों को समय पर मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। उर्वरक मंत्रालय ने बताया है कि खरीफ की फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) नहीं है, उनको भी शामिल करने का काम तेजी से चल रहा है ताकि उन्हें फसल बीमा योजना का लाभ मिल सके।

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