सूखे की आहट: देश में सामान्य से 41 फीसदी कम बारिश, प्रमुख जलाशयों में क्षमता के मुकाबले 27.5 प्रतिशत पानी
देश में मानसून की धीमी प्रगति और 1 जून से 19 जून के बीच सामान्य से 41 फीसदी कम बारिश के कारण प्रमुख जलाशयों का जलस्तर चिंता बढ़ाने लगा है। 166 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 27.49 प्रतिशत पानी बचा है।
देश में मानसून की सुस्त शुरुआत और वर्षा की कमी का असर प्रमुख जलाशयों के जल भंडारण पर भी साफ दिखाई देने लगा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस मानसून सीजन में 1 जून से 19 जून के बीच देशभर में सामान्य से 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। देश के 36 मौसमीय क्षेत्रों में से 23 में सामान्य से कम वर्षा हुई है।
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के अनुसार, 18 जून तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध पानी उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 27.49 प्रतिशत रह गया है। यह पिछले वर्ष इसी अवधि के जल भंडारण का 86.62 फीसदी है। हालांकि, जलाशयों में मौजूदा जल भंडारण सामान्य स्तर की तुलना में 13 फीसदी अधिक है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य भारत में वर्षा की कमी सामान्य के मुकाबले 64 फीसदी तक पहुंच गई है। गुजरात में सामान्य से 90 फीसदी, कोंकण एवं गोवा में 84 फीसदी तथा मध्य महाराष्ट्र में 81 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे इन क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।
उत्तर-पश्चिम भारत में प्री-मानसून बारिश से राहत मिली है, जहां 1 जून से 19 जून के बीच वर्षा सामान्य से केवल 4 फीसदी कम रही है। इसके विपरीत, पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में इस अवधि के दौरान सामान्य से 45 फीसदी कम बारिश हुई है। दक्षिण भारत में भी वर्षा सामान्य से 22 फीसदी कम दर्ज की गई है।
1 जून से 19 जून, 2026 तक वर्षा (मिमी में)
| क्षेत्र | वास्तविक वर्षा | सामान्य वर्षा | दीर्घावधि औसत (LPA) से विचलन (%) |
|---|---|---|---|
| पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत | 101.5 | 183.6 | -45% |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 34.9 | 36.4 | -4% |
| मध्य भारत | 28.7 | 80.2 | -64% |
| दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत | 76.1 | 98.0 | -22% |
| समूचा देश | 51.5 | 86.7 | -41% |
4 जून को तीन दिन की देरी से केरल पहुंचने के बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई। 8 जून को मानसून कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को पार करते हुए महाराष्ट्र और तेलंगाना में प्रवेश कर गया था, लेकिन पिछले 8-10 दिनों से इसकी प्रगति लगभग थमी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 23 जून के आसपास मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है। इस बीच, अगले तीन-चार दिनों तक देश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 जून तक, बिहार में 22 जून तक तथा महाराष्ट्र और तेलंगाना में 20 जून तक कुछ स्थानों पर लू चलने की प्रबल संभावना है।
यदि अगले कुछ सप्ताह में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो खरीफ फसलों की बुआई, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण इस साल मानसून सीजन में सामान्य के मुकाबले 90 फीसदी वर्षा की आशंका जताई गई है जो खरीफ के साथ-साथ और आगामी रबी सीजन के लिए भी बड़ी चुनौती है।
हालांकि, पिछले वर्षों में भारत की जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में देश के लगभग 55 प्रतिशत सकल फसल क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 2010-11 में यह आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत था। इसके बावजूद बारिश और जलाशयों के जल स्तर में कमी कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है।


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