पेप्सिको ने भारत में पानी, खेती और पैकेजिंग के क्षेत्र में पर्यावरण लक्ष्यों पर फोकस बढ़ाया

PepsiCo की 2025 ESG रिपोर्ट में भारत में री-जेनरेटिव कृषि, जल संरक्षण, सर्कुलर पैकेजिंग, स्वच्छ परिवहन और पोषण से जुड़ी पहलों में प्रगति बताई गई है। कंपनी करीब 36,000 किसानों के साथ काम करती है और डिजिटल खेती व माइक्रो-इरिगेशन बढ़ा रही है। पुणे में पानी का उपयोग 90 प्रतिशत से अधिक घटा है।

पेप्सिको ने भारत में पानी, खेती और पैकेजिंग के क्षेत्र में पर्यावरण लक्ष्यों पर फोकस बढ़ाया

पेप्सिको (PepsiCo) कंपनी ने पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) एजेंडे के तहत अपनी प्रगति की जानकारी दी है। कंपनी की भारतीय इकाई का फोकस री-जेनरेटिव (पुनर्योजी) कृषि, जल संरक्षण, सर्कुलर पैकेजिंग, स्वच्छ परिवहन और पोषण पर है। ये प्रयास कंपनी की व्यापक PepsiCo Positive (pep+) रणनीति का हिस्सा हैं।

कंपनी ने अपनी 2025 ईएसजी परफॉर्मेंस अपडेट में बताया कि दुनिया के 60 से अधिक देशों में री-जेनरेटिव, रेस्टोरेटिव और संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों का विस्तार 47 लाख एकड़ तक किया गया है। वैश्विक स्तर पर PepsiCo ने अधिक जल-संकट वाले क्षेत्रों में स्थित अपनी स्वामित्व वाली इकाइयों में 100 प्रतिशत जल पुनर्भरण हासिल किया है। साथ ही, प्राथमिक पैकेजिंग में नए प्लास्टिक के इस्तेमाल में 6 प्रतिशत की कमी की गई है।

पेप्सिको ने कहा कि भारत में उसके खाद्य मूल्य शृंखला से जुड़े प्रयास किसानों, प्राकृतिक संसाधनों, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और उपभोक्ताओं तक फैले हुए हैं। कंपनी देश के 14 राज्यों में करीब 36,000 किसानों के साथ काम करती है और चिप्स वाले आलू की अपनी 100 प्रतिशत जरूरत घरेलू स्तर पर पूरी करती है।

कृषि उत्पादकता और संसाधन दक्षता बढ़ाने के लिए कंपनी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। ‘मिट्टी दीदी’ पहल के तहत किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच और रियल टाइम खेती संबंधी जानकारी दी जाती है। वहीं, क्रोपिन के साथ विकसित लेज स्मार्ट फार्म्स (Lay’s Smart Farms) कार्यक्रम के तहत 18,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र को मैप किया गया है और 7,000 से अधिक किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कंपनी के अनुसार, प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों में माइक्रो-इरिगेशन को 100 प्रतिशत अपनाया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में यह पहल 2,300 एकड़ से अधिक क्षेत्र तक पहुंच चुकी है।

जल संरक्षण भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसने बताया कि अधिक जल-संकट वाले क्षेत्रों में स्थित उसके मैन्युफैक्चरिंग संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले पानी की मात्रा से 100 प्रतिशत से अधिक पानी स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र में वापस पहुंचाया जाता है। पुणे संयंत्र में पानी के उपयोग में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी की गई है। कंपनी के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 2010 से अब तक स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में 23 अरब लीटर पानी का पुनर्भरण किया गया है और करीब 9.7 करोड़ लोगों तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच बनाई गई है।

पेप्सिको इंडिया ने कहा कि पैकेजिंग के क्षेत्र में वह अपने खाद्य और पेय कारोबार के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) संबंधी नियमों का पालन करती है। कंपनी खाद्य पैकेजिंग में मोनो-मटेरियल और पॉलीओलेफिन आधारित संरचनाओं को अपना रही है। पेय कारोबार में चुनिंदा उत्पादों के लिए 100 प्रतिशत रिसाइकिल्ड पीईटी (rPET) बोतलों की ओर भी बढ़ रही है।

कंपनी के अनुसार, भारत में उसके प्रयोग वाले ईंधन मिश्रण में 97 प्रतिशत हिस्सा बायोमास का है। स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कल्याणी पावरट्रेन लिमिटेड और वायुदूत रोड कैरियर्स के साथ मिलकर कोसी-पटौदी ईवी ग्रीन कॉरिडोर भी संचालित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर पर फिलहाल 32 फुट के 13 इलेक्ट्रिक कंटेनर ट्रक चल रहे हैं, जो सालाना करीब 6 लाख इलेक्ट्रिक किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। पेप्सिको इंडिया ने देशभर में 800 से अधिक वाहनों को, जिनमें वितरकों से जुड़े अंतिम-मील डिलीवरी वाहन भी शामिल हैं, रेट्रोफिट किया है।

पोषण के क्षेत्र में कंपनी ने कहा कि भारत में उसके पेय पोर्टफोलियो की मात्रा के हिसाब से 50 प्रतिशत से अधिक उत्पाद अब लो या जीरो शुगर श्रेणी में हैं। कंपनी बेक्ड स्नैक वैरिएंट और बाजरा आधारित उत्पादों जैसे विकल्पों का भी विस्तार कर रही है।

पेप्सिको के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर जिम एंड्रयू (Jim Andrew) ने कहा कि कंपनी सस्टेनेबिलिटी को अपने परिचालन, नवाचार और विकास की रणनीति में एकीकृत कर रही है। पेप्सिको इंडिया की चीफ कॉरपोरेट अफेयर्स ऑफिसर और सस्टेनेबिलिटी प्रमुख यशिका सिंह ने कहा कि कंपनी किसानों, समुदायों, प्राकृतिक संसाधनों और उपभोक्ताओं की मजबूती को कारोबारी मजबूती से जुड़ा हुआ मानती है।

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