यूपी में एसएचजी के जरिये गन्ने की नर्सरी तैयार कर ग्रामीण महिलाओं को मिला उद्यमी बनने का मौका

यूपी सरकार अब महिला सशक्तिकरण के लिए बनाई गई मिशन शक्ति योजना के तहत, ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में तैयार करने के लिए गन्ने की खेती प्रक्रिया में महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दे रही है।

यूपी में एसएचजी के जरिये गन्ने की नर्सरी तैयार कर ग्रामीण महिलाओं  को मिला उद्यमी बनने का मौका
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के हरियावां में एसएचजी के सदस्यों के साथ बातचीत करते हुए डीसीएम श्रीराम के यूनिट हैड और वाइस प्रसिडेंट प्रदीप त्यागी

कोरोना महामारी से पूरा देश त्रस्त है । महामारी की वजह से अनिश्चितताओं का माहौल है। बावजूद इसके देश के लिए अच्छी खबर है । अच्छी खबर है खेती से खास कर गन्ने से जुड़ी । देश में साल 2020 के मुकाबले इस साल कोरोना महामारी के बावजूद भी गन्ने का घरेलू उत्पादन अधिक होने की संभावना है । इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना की खेती करने वाले एरिया में जमीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए एक सांचे में ढाल रही है ।

गन्ने की फसल की लिहाज से अगर बात की जाए तो यूपी और महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य हैं । अकेले इन दोनों राज्यों का योगदान भारत के घरेलू उत्पादन का 50 प्रतिशत से भी अधिक का है, जो सालाना 300 लाख टन से अधिक है । 

इसी को देखते हुए यूपी सरकार अब महिला सशक्तिकरण के लिए बनाई गई मिशन शक्ति योजना के तहत, ग्रामीण महिलाओं को सफल उद्यमी के रूप में तैयार करने के लिए गन्ने की खेती प्रक्रिया में महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दे रही है। 
यूपी सरकार के गन्ना और चीनी आयुक्त, संजय भूसरेड्डी का कहना है कि प्रत्येक गन्ना विकास परिषद क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की संख्या 10 से बढ़ाकर 25 कर दी गई है। प्रत्येक एसएचजी में महिला सदस्यों की संख्या 10 से लेकर 35 की है।

इससे संबंधित आंकड़ों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि यूपी के 36 गन्ना बहुल जिलों में अब तक 1964 महिला एसएचजी का गठन किया जा चुका है, जिसमें 41,113 ग्राणीण महिला उद्यमी पंजीकृत हैं । उनका कहना है कि इन समूहों से संबंधित महिलाओं को गन्ना विभाग द्वारा प्रशिक्षित कर गन्ने से बड चिप विधि यानि कि गन्ने की एक कली से गन्ने की नर्सरी पौध तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है । संजय भूसरेड्डी जी ने बताया कि एसएचजी द्वारा 10 करोड़ से अधिक पौधे तैयार किए जा चुके हैं, और लगभग 9 करोड़ नर्सरी पौध की किसानों को बिक्री कर सामूहिक रूप से अब तक 27 करोड़ रुपये की आय अर्जित की जा चुकी है। उनका कहना है कि गन्ने की नर्सरी के जरिए एक सीजन में प्रत्येक महिला उद्यमी को औसतन 59,000 रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है, जबकि इस कार्यक्रम के तहत लगभग नौ लाख दिनों का रोजगार सृजित हुआ है। 

पिछले दिनों रुरल वॉयस  ने ऐसे ही एक स्वयं सहायता समूह के सदस्यों से मुलाकात की थी। यह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के हरियावां में काम करता है। डीसीएम श्रीराम समूह की हरियावां चीनी मिल के साथ यह समूह काम कर रहा है। नीचे गये फोटो में डीसीएम श्रीराम के सीईओ रोशन लाल टामक स्वयं सहायता समूह की सदस्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं।


गन्ना विकास परिषद द्वारा “मिशन शक्ति” के तहत ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों और इससे जुड़ी जानकारियों पर कार्यशालाएं भी करा रहा है । इसका उद्देश्य महिलाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करने के साथ ही आत्मनिर्भर बनाना है ।  इससे पहले, ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों के आत्मनिर्भरता और अधिक आमदनी के लिए “मिशन शक्ति के तहत महिला रोजगार सृजन कार्यक्रम” की गन्ना आयुक्त भूसरेड्डी ने शुरुआत की थी ।

यह कार्यक्रम यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू किया था।  इसमें मुख्यमंत्री ने प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे । चीनी आयुक्त भूसरेड्डी की मानें तो इस कार्यक्रम की अपार सफलता और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लखनऊ में अंतररार्ष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के अवसर पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित राज्य की 11 सर्वश्रेष्ठ महिलाओं में से दो महिलाएं इस योजना से जुड़ी हुई हैं। यह अन्नपूर्णा महिला एसएचजी,बरेली की अध्यक्ष कुसुम और  मनमती मां वैष्णो देवी महिला एसएचजी अयोध्या की अध्यक्ष हैं।  

इसी दौरान, यूपी में 120 चीनी मिलों ने चालू पेराई सत्र 2020-21 में 100 लाख टन से अधिक चीनीका उत्पादन किया है, जबकि इनमें से 54 इकाइयां पहले ही अपना गन्ने  का पेराई सत्र संचालन करअगले  सीजन तक के लिए बंद हो चुकी हैं । 

 (वीरेंद्र सिंह रावत लखनऊ के  पत्रकार हैं, जो उद्योग, अर्थव्यवस्था, कृषि, बुनियादी ढांचे, बजट इत्यादि   समकालीन मुद्दों पर लिखते हैं)