उत्तर प्रदेश में 2021-22 सीजन में 57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान

उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू सीजन 2021-22 में 57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान लगाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में देशी शराब निर्माताओं और डिस्टिलरी के लिए 1.17 टन से अधिक का कोटा रिजर्व किया है

उत्तर प्रदेश में  2021-22 सीजन में  57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान

लखनऊ

उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार ने चालू गन्ना सीजन (नवंबर-अक्टूबर) 2021-22 में राज्य की चीनी मिलों द्वारा 57 लाख टन शीरा उत्पादन का अनुमान लगाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में देशी शराब निर्माताओं और डिस्टिलरी के लिए 1.17 टन से अधिक का कोटा रिजर्व किया है।

शीरा गन्ने के रस से चीनी उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला काला सिरप जैसे दिखने वाला उत्पाद है। गन्ने की पेराई से लगभग 4.75 फीसदी शीरा की रिकवरी होती है। शीरे को एथाइल अल्कोहल और मिथाइल अल्कोहल बनाने के लिए प्रोसेस किया जाता है। इसका इस्तेमाल दवा और रसायन इंडस्ट्रीज में इनपुट के रूप में किया जाता है।

उत्तर प्रदेश को उत्पाद शुल्क से सालाना करीब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है। जिसमें लगभग 50 फीसदी देशी शराब के उत्पादन से मिलती है।

दिलचस्प बात यह है कि यूपी की निजी चीनी मिलें लंबे समय से देशी शराब के लिए शीरा के कोटा को खत्म करने की मांग कर रही हैं। इसकी वजह से उनके कैश फ्लो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। एथनॉल के उत्पादन के लिए शीरे की उपलब्धता कम हो गई है, जिसका उपयोग पेट्रोल में ब्लैंडिंग के लिए किया जाता है।

हालांकि सरकार ने पाया है कि यह निर्णय देशी शराब के लिए पर्याप्त मात्रा में शीरे की आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था जिसका सेवन समाज के निचले तबके में किया जाता है। राज्य अच्छी गुणवत्ता वाली देशी शराब के उत्पादन को सुविधाजनक बनाना चाहता है। 

नवंबर, 2019 में योगी सरकार ने देशी शराब का कोटा 16 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि राज्य ने सितंबर 2019 के महीने में ही उक्त कोटा को 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 फीसदी कर दिया था। इससे यूपी के चीनी मिलों में काफी निराशा हुई थी। 

इस बीच यूपी गन्ना पेराई सीजन (अक्टूबर-सितंबर) 2021-22 पहले से ही चल रहा है और पश्चिमी क्षेत्र की चीनी मिलों का पहले चरण में परिचालन शुरू हो गया है। 

नई यूपी शीरा नीति के अनुसार, चीनी मिलों को आरक्षित और अनारक्षित कोटे के बीच 1:4.55 के वार्षिक निकास अनुपात को बनाए रखना अनिवार्य है।

इसके अलावा, अलग-अलग मिलों को जनवरी 2022 तक रिजर्व शीरे के अपने पूरे वार्षिक कोटा को अनिवार्य रूप से समाप्त करना होगा। अन्य राज्यों से शीरा आयात करने वाली किसी भी डिस्टिलरी या इकाई को आबकारी विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी।