यूपीआई से दुकानदार को 2000 रुपये से अधिक भुगतान पर लगेगा 0.4% शुल्क, व्यक्ति से व्यक्ति को भुगतान मुफ्त रहेगा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सभी पी2पी यानी व्यक्ति से व्यक्ति को भुगतान मुफ्त रहेंगे और करीब 96% मर्चेंट लेनदेन MDR के दायरे से बाहर होंगे। 2,000 रुपये से अधिक के P2M भुगतान पर 0.4% MDR लगेगा। आवश्यक क्षेत्रों और पूंजी बाजार के लिए अलग दरें तय की गई हैं।
सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के लिए शुल्क का नया ढांचा लागू किया है। इसके तहत सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि बड़े मूल्य वाले मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार, लेनदेन की राशि कितनी भी हो, P2P यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। कुल यूपीआई लेनदेन के मूल्य में P2P भुगतान की हिस्सेदारी करीब 70% है और ये MDR के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।
मर्चेंट या दुकानदार को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के भुगतान (P2M) भी मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा, P2PM श्रेणी के तहत यूपीआई क्यूआर कोड से हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी, जिनमें रेहड़ी-पटरी वाले और मोहल्ले की दुकानें शामिल हैं, सभी लेनदेन पर शून्य MDR का लाभ ले सकेंगे। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इससे करीब 96% मर्चेंट लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। केवल लगभग 4% मर्चेंट लेनदेन पर MDR लागू होगा। यह मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के वे भुगतान होंगे जो शून्य MDR प्रावधान के अंतर्गत नहीं आते।
2,000 रुपये से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4% MDR निर्धारित किया गया है। वहीं 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन होगा। यह राशि सरकार के पास शुल्क या कर के रूप में नहीं जाएगी, बल्कि बैंक, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई ऐप प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित होगी।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये प्रति लेनदेन का फ्लैट MDR लगेगा। वहीं म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉक ब्रोकरों और डीलरों से जुड़े भुगतानों पर 0.02% MDR लागू होगा जो अधिकतम 300 रुपये रहेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR का भुगतान ग्राहक नहीं करेंगे। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें। यूपीआई ऐप प्रदाता प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क भी नहीं लगा सकेंगे।
मंत्रालय का कहना है कि व्यक्तियों के लिए यूपीआई का उपयोग बिना किसी मासिक सीमा या वॉल्यूम प्रतिबंध के जारी रहेगा। बैंकों और NPCI की तरफ से अलग-अलग श्रेणी के लिए निर्धारित 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की दैनिक लेनदेन सीमा केवल सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के लिए है और यह शुल्क लगाने की सीमा नहीं है।
छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए एक अलग फंड भी बनाया जाएगा। इसमें कुल MDR संग्रह का 5% योगदान किया जाएगा। इस राशि का इस्तेमाल छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता और इस्तेमाल बढ़ाने तथा डिजिटल भुगतान व्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
यह ढांचा पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के तहत यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी के विचार-विमर्श के बाद लाया गया है। बड़े मर्चेंट लेनदेन से मिलने वाला राजस्व बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता पेमेंट ढांचे के विस्तार और सुधार पर खर्च कर सकेंगे, जिसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का विस्तार भी शामिल है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि यह व्यवस्था वित्त संबंधी स्थायी समिति की 32वीं रिपोर्ट की उस सिफारिश के अनुरूप है जिसमें डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया गया था।

Join the RuralVoice whatsapp group



















