कोरोना संकट के बावजूद खूब चली चीनी मिलें, 23% बढ़ा उत्पादन, महाराष्ट्र अव्वल

कोरोना संकट के बावजूद खूब चली चीनी मिलें, 23% बढ़ा उत्पादन, महाराष्ट्र अव्वल

पिछले वर्ष से जारी कोविड-19 संकट के बावजूद गन्ना किसानों और चीनी मिलों ने बढ़-चढ़कर काम किया है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पेराई सत्र 2020-21 में 15 फरवरी तक देश में 208.89 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ। जबकि गत वर्ष इसी तारीख तक 170.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह कोराना संकट के बावजूद चीनी उत्पादन में करीब 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

पहली अक्टूबर से शुरू मौजूदा पेराई सत्र में 497 चीनी मिलें काम कर रही थीं, जिनमें से 33 चीनी मिलें गन्ना उपलब्ध नहीं होने के कारण पेराई रोक चुकी हैं। चीनी मिलों का यह आंकड़ा भी गत वर्ष से अधिक है जब कुल 447 चीनी मिलों ने पेराई शुरू की थी जिनमें से इस समय तक 20 मिलें बंद हो चुकी थी।

चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र नंबर वन

चीनी उत्पादन के मामले में इस साल महाराष्ट्र ने फिर बाजी मार ली है। 15 फरवरी तक महाराष्ट्र की 183 चीनी मिलों ने कुल 75.46 लाख टन चीनी उत्पादन किया है। उत्तर प्रदेश 116 चीनी मिलों में 65.13 लाख टन चीनी उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर है। गत वर्ष के मुकाबले इस साल महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 43.38 लाख टन से बढ़कर 75.46 लाख टन पहुंचा है जबकि यूपी में चीनी उत्पादन गत वर्ष 66.34 लाख टन से घटकर 65.13 लाख टन रहा है। महाराष्ट्र और यूपी के बाद कर्नाटक चीनी उत्पादन में तीसरे स्थान पर है जहां 15 फरवरी तक 39.07 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ। यहां भी गत वर्ष की अपेक्षा चीनी उत्पादन बढ़ा है।

चीनी निर्यात बढ़ने की उम्मीद

इस्मा से मिली जानकारी के अनुसार, चालू पेराई सत्र में 31 जनवरी, 2021 तक करीब 7 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है। इसके अलावा करीब 25 लाख टन चीनी निर्यात के सौदे होने की जानकारी मिली है। केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर, 2020 को चीनी के निर्यात कोटे का ऐलान किया था। अगर केंद्र सरकार ईरान को चीनी निर्यात में आ रही अड़चनें दूर कर देती है तो निर्यात और बढ़ सकता है।