महाराष्ट्र में सूखे की मार: 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित, सोयाबीन-कपास समेत खरीफ फसलों पर संकट
महाराष्ट्र सरकार ने बारिश की कमी को देखते हुए 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है। विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। सरकार ने फसल नुकसान का आकलन शुरू करने के साथ किसानों के लिए राजस्व, कृषि ऋण और बिजली बिल में राहत समेत कई उपाय लागू किए हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बारिश की कमी और खरीफ फसलों पर पड़े असर को देखते हुए 358 में से 265 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया है। सरकार ने इन क्षेत्रों में राहत एवं बचाव उपाय लागू करने के साथ ही फसल नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने भी पहले ही अपने 240 में से 177 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया है।
राज्य सरकार ने सूखा प्रबंधन संहिता के तहत Trigger-1 लागू होने के आधार पर यह घोषणा की है। कृषि आयुक्त की रिपोर्ट और विभिन्न सूखा संकेतकों के आकलन के बाद इन 265 तालुकों को सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है।
सरकार ने संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल नुकसान का आकलन करने को कहा है। इसके तहत खेतों की स्थिति का आकलन कर जीपीएस लोकेशन वाली तस्वीरों के साथ विस्तृत रिपोर्ट कृषि आयुक्त के माध्यम से सरकार को भेजी जाएगी।
विदर्भ और मराठवाड़ा ज्यादा प्रभावित
महाराष्ट्र के करीब तीन-चौथाई तालुके सूखे से प्रभावित हैं और प्रभावित क्षेत्र राज्य के सभी छह प्रशासनिक संभागों में फैले हुए हैं। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में सबसे अधिक 74 सूखा प्रभावित तालुके हैं। इसके बाद अमरावती संभाग में 56 और नासिक संभाग में 49 तालुके प्रभावित हैं। पुणे संभाग में 35, जबकि नागपुर और कोंकण संभाग में क्रमशः 39 और 12 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।
क्षेत्रवार देखें तो विदर्भ में 95, मराठवाड़ा में 74 और उत्तर महाराष्ट्र में 49 तालुके सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं। पश्चिमी महाराष्ट्र में 35 और कोंकण में 12 तालुके इस श्रेणी में रखे गए हैं।
फसल नुकसान का आकलन
सूखा प्रभावित तालुकों में किसानों को राजस्व में छूट, फसल ऋण के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली पर राहत जैसे उपाय लागू होंगे। 7.5 हॉर्सपावर से अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के बिजली बिलों में रियायत दी जाएगी, जबकि 7.5 हॉर्सपावर तक की बिजली खपत पहले से ही माफी के दायरे में है।
सूखा प्रभावित इलाकों में विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज की फीस में राहत देने के साथ ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को बढ़ाने का भी फैसला किया गया है। साथ ही अधिकारियों को कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन काटे जाने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। इसके अलावा जरूरत वाले क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी। पशुओं के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराने तथा प्रभावित किसानों और कृषि मजदूरों के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाएगा। जल संरक्षण से जुड़े कामों को बढ़ाने के जरिए ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।
हालांकि, फसल नुकसान के आधार पर किसानों को मिलने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता की राशि अभी अलग से तय की जानी है। इसके लिए पहले फसल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद सहायता को लेकर अलग सरकारी आदेश जारी किया जाएगा।
सोयाबीन, कपास और मक्का पर असर
महाराष्ट्र में इस साल मानसून के दौरान बारिश की कमी और लंबे सूखे दौर ने खरीफ फसलों को प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल के दिनों में विदर्भ और मराठवाड़ा के प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। राज्य में सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी प्रमुख फसलों को नुकसान हुआ है। कोंकण क्षेत्र में धान की खेती भी प्रभावित हुई है। बारिश की कमी का असर फसल उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार केंद्र से वित्तीय सहायता का इंतजार किए बिना प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार से सहायता के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

Join the RuralVoice whatsapp group



















