आखिर सरकार ने मानी आवारा पशुओं की समस्या की बात, पढ़िए रूरल वॉयस की ग्राउंड रिपोर्ट

तमाम मुद्दों के बीच राज्य में आवारा पशुओं से फसलों को होने वाला नुकसान एक बड़ा मुद्दा है। इसका क्या असर होगा यह तो पूरी तरह से कहना अभी मुश्किल है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर रूहेलखंड और तराई तक किसान इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर करने से नहीं चूकते हैं

आखिर सरकार ने मानी आवारा पशुओं की समस्या की बात, पढ़िए रूरल वॉयस की ग्राउंड रिपोर्ट

नगलिया बल्लू, चंदौसी, संभल, निघासन, लखीमपुर खीरी से

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आवारा पशुओं की समस्या से निजात पाने के लिए 10 मार्च के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी। उनका आशय यह था कि 10 मार्च को नतीजे आने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बनेगी, तब इस समस्या पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि किसान कई वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से चुनावी सभा में इसके बारे में कुछ कहा गया है। किसान आवारा पशुओं की समस्या से किस तरह परेशान हैं, पढ़िए इस पर रूरल वॉयस की रिपोर्ट।

चुनाव प्रचार के लिए गांव-गांव घूम रही चंदौसी की विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री, माध्यमिक शिक्षा विभाग, गुलाब देवी के काफिले को ढूंढ़ते हुए चंदौसी से करीब 20 किलोमीटर दूर गांव नगलिया बल्लू में यह नजारा देखने को मिला जो इस स्टोरी के साथ फोटो में दिख रहा है। किसानों ने अपनी फसलों को अवारा पशुओं से बचाने के लिए पुरानी साड़ियों की बाड़ बनाई हुई है। इसकी वजह शायद कम खर्च हो या फिर रंग-बिरंगी साड़ियां देखकर जानवर कम आते हों। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर रुहेलखंड और तराई तक आवारा पशुओं से फसलों को बचाने की जद्दोजहद करते किसानों के किस्से सुनने को मिले। यहां के एक किसान रतिराम कहते हैं, “हम क्या कर सकते हैं। किसी न किसी तरह खेतों की रात भर हिफाजत करते हैं।”

इससे थोड़ा पहले आने वाले बड़ा गांव के किसान रामआसरे बताते हैं, “आवारा पशु यहां बड़ी समस्या बन गये हैं। छोटे-बड़े सभी किसान इससे परेशान हैं। गौशाला बना कर इनको रोकने के प्रशासन के दावे हकीकत से परे हैं।” सरकारी नौकरी में ट्यूबवैल आपरेटर से रिटायर इस दलित किसान का कहना है कि आवारा पशुओं का मुद्दा वोटों पर असर डालेगा।

फोटोः गुलाब देवी, राज्यमंत्री माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश, विधायक चंदौसी

राज्य सरकार में मंत्री गुलाब देवी चंदौसी से भाजपा की विधायक हैं। वे लगातार चार बार यहां से जीत चुकी हैं और पांचवीं बार चुनाव लड़ रही हैं। गांव के बाहर जब उनसे बात होती है तो वह चिंतित दिखती हैं और वह स्वीकारती हैं कि आवारा पशुओं की समस्या बड़ी है। सरकार द्वारा बनाई गौशालाओं के बारे में वह कहती हैं कि सरकार आने पर इनके खिलाफ सख्ती करेंगे क्योंकि यह पशुओं को रात में छोड़ देते हैं।

गुलाब देवी इस बार थोड़ा परेशान हैं क्योंकि इस बार चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जाटव समुदाय की विमलेश को यहां टिकट दिया है। चंदौसी रिजर्व सीट है और गुलाब देवी धोबी समुदाय से हैं। उनकी बिरादरी के करीब 15 हजार वोट हैं। यहां 84 हजार मुसलमान नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। जाटव समुदाय के 65 हजार वोट हैं और 22 हजार यादव हैं। ऐसे में मुकाबला मुश्किल हो गया है। हालांकि वह दावा करती हैं कि उनको हर समुदाय और जाति का वोट मिलता है इसलिए चिंता की बात नहीं है।

असल में इस चुनाव में आवारा पशु किसानों के लिए एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। कुछ माह पहले एक राजनीतिक दल के रणनीतिकार ने इस लेखक से जानना चाहा कि अगर उनकी पार्टी पशुओं से फसल को हुए नुकसान के लिए नकद मुआवजा घोषित करे तो क्या उसका असर वोटों पर होगा।

पश्चिम के शामली जिले में आने वाले ताजपुर सिंभालका गांव के किसान तेजपाल सड़क पर बैठे सांढ़ों के झुंड का फोटो लेने के लिए कहते हैं। उनका कहना है, “रात भर इनको रोकने के लिए खेतों में रहना पड़ता है।” जहां भी जाइए इसी तरह की कहानी किसान कहते मिलते हैं। कैराना विधान सभा सीट के तहत आने वाले गांव सिंगापुर के किसान कीमत सिंह भी इसी बात को लेकर परेशान हैं।

फोटोः फतेह सिंह, खरवैया नंबर दो फार्म, निघासन रोड

चंदौसी से करीब दो सौ किलोमीटर दूर लखीमपुर खीरी की निघासन रोड विधान सभा के खरवैया नंबर दो फार्म के किसान फतेह सिंह कहते हैं कि आवारा पशु खेतों को बरबाद कर रहे हैं। जरा सी ढील हुई नहीं कि खड़ी फसल को ये नुकसान पहुंचा देते हैं। इसका हल क्या है, यह पूछने पर वह कहते हैं कि इस पर कोई कुछ नहीं कर रहा है। सब वोटों का मामला है। इससे किसानों में नाराजगी है।

दरअसल, सरकार द्वारा गौवंश की सुरक्षा को लेकर सख्त कानून लागू करने के चलते अवारा पशुओं की समस्या बढ़ी है। इनकी खरीद-फरोख्त और इनकी ढुलाई करने वालों को कई तरह की समस्याओँ का सामना करना पड़ता है। राज्य भर में गौरक्षकों की फौज खड़ी हो गई है जो इस पर मुद्दे पर बहुत आक्रामक है। हालांकि राज्य सरकार ने गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य भर में गौशालाएं खोलने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। राज्य भर में किसान रात में टार्च लेकर खेतों पर जाने को मजबूर हैं। इसका चुनावों पर कितना असर पड़ेगा यह तो नतीजे आने पर ही पता लगेगा। लेकिन यह भी दिलचस्प बात है कि नगलिया बल्लू के जिस किसान का इस खबर में ऊपर जिक्र है, उनका कहना है कि पहले जानवरों की चोरी हो जाती थी। गांव के बाहर से हमारी दो भैंस चोर ले गये और हम रोक भी नहीं पाये क्योंकि उन्होंने हमारे ऊपर फायर दिया था। अब कानून व्यवस्था ठीक है इसलिए हम भाजपा के पक्ष में ही वोट करेंगे। यह बात अलग है कि सभी किसानों की राय एक जैसी नहीं है और इस मुश्किल के चलते उनकी नाराजगी का असर मतों पर पड़ सकता है।