लैंड स्टैक: हर भूखंड को मिलेगा 14 अंकों का भू-आधार (ULPIN), जमीन के नक्शों की होगी जियोरेफरेंसिंग

केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों का विशिष्ट भू-आधार (ULPIN) देने और कैडस्ट्रल नक्शों की पूरी जियोरेफरेंसिंग करने का फैसला किया है, ताकि संपत्तियों की स्पष्ट और विशिष्ट पहचान सुनिश्चित हो तथा भूमि संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सके।

लैंड स्टैक: हर भूखंड को मिलेगा 14 अंकों का भू-आधार (ULPIN), जमीन के नक्शों की होगी जियोरेफरेंसिंग

केंद्र सरकार ने देश में भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में इन दिशानिर्देशों का औपचारिक शुभारंभ किया।

वर्ष 2026–2031 के लिए केंद्र सरकार ने 565.50 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ जीआईएस-आधारित ‘लैंड स्टैक’ फ्रेमवर्क स्थापित करने के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत देश के प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर ‘भू-आधार’ (ULPIN) दिया जाएगा। साथ ही कैडस्ट्रल यानी भू-अभिलेख नक्शों की पूरी जियोरेफरेंसिंग की जाएगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि DILRMP 3.0 ग्रामीण नागरिकों, किसानों और संपत्ति मालिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि लोगों की भावनात्मक और पारिवारिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। इसलिए भूमि से जुड़े दस्तावेजों का सटीक और आसानी से उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है।

शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, DILRMP के पिछले चरणों में देश के 99.90 प्रतिशत राइट्स ऑफ रिकॉर्ड (RoR) और 97 प्रतिशत कैडस्ट्रल मैप्स का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा करीब 99 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण भी पूरा हो चुका है।

अब DILRMP 3.0 का जोर अलग-अलग स्तर पर रिकॉर्ड को डिजिटल करने के बजाय पूरी प्रणाली के एकीकरण पर है। इससे किसानों को संस्थागत ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी और नागरिकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा।

भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने कहा कि DILRMP 3.0 भूमि प्रशासन के लिए एक एकीकृत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण के साथ चरणबद्ध और प्रदर्शन-आधारित व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा।

जीआईएस आधारित ‘लैंड स्टैक’ 

DILRMP 3.0 में जीआईएस-आधारित डिजिटल फ्रेमवर्क ‘लैंड स्टैक’ विकसित किया जाएगा। इसके तहत जियोरेफरेंस किए गए कैडस्ट्रल नक्शे, राइट्स ऑफ रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और संबंधित न्यायिक मामलों जैसी अलग-अलग सूचनाओं को एकीकृत डिजिटल ढांचे में लाया जाएगा।

राज्यों को अपने-अपने लैंड स्टैक विकसित करने की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए विभिन्न भूमि संबंधी डेटासेट और प्रणालियों को API के माध्यम से जोड़ा जा सकेगा। इन राज्य स्तरीय लैंड स्टैक को जोड़कर एक राष्ट्रीय लैंड स्टैक विकसित किया जाएगा।

भू-आधार (ULPIN): हर भूखंड की विशिष्ट पहचान

देश के प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य संपत्तियों की स्पष्ट और विशिष्ट पहचान स्थापित करना तथा भूमि संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है।

पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर अधिक भीड़-भाड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को डिजिटल कतार प्रबंधन और बेहतर सुविधाओं के साथ नागरिक-अनुकूल सेवा केंद्रों के रूप में आधुनिक बनाया जाएगा।

योजना के तहत जमीन और संपत्ति के पुराने पंजीकरण रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से स्कैन करके डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे विरासत के अधिकारों की सुरक्षा और पुश्तैनी जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।

पंजीकरण रिपॉजिटरी

यह पंजीकृत दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़ी देनदारियों या ऋण की जानकारी देने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म हैजो भूमि के स्वामित्व के सत्यापनपुराने खरीद-बिक्री के इतिहास और संपत्ति से जुड़ी आवश्यक जांच को आसान बनाएगा। इसके अलावा राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) का आधुनिकीकरण कर इसे सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, ताकि लंबित मामलों की संख्या घटाई जा सके और म्यूटेशन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।

अर्बन लैंड मैपिंग (NAKSHA)

योजना में शहरी भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण पर भी जोर दिया गया है। NAKSHA पायलट प्रोजेक्ट में तेजी लाते हुए सटीक और जीआईएस-आधारित शहरी भूमि अभिलेख तैयार किए जाएंगे। इसके तहत अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड (UrPro Card) भी जारी किए जाएंगे।

Subscribe Rural Voice Newsletter