आयातित दालों को स्टॉक लिमिट से मुक्त करने का फैसला

देश में दालों की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने दो जुलाई, 2021 को स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला लिया था। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी किया गया था। लेकिन 17 दिन के भीतर ही सरकार ने इस आदेश में बदलाव करते हुए आयातित दालों को स्टॉक लिमिट के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम से आयात की सुविधा तो बढ़ेगी लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में कमी के रूप में किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है

आयातित दालों को स्टॉक लिमिट से मुक्त करने का फैसला

देश में दालों की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने दो जुलाई, 2021 को स्टॉक लिमिट लागू करने का फैसला लिया था। इसके लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी किया गया था। लेकिन 17 दिन के भीतर ही सरकार ने इस आदेश में बदलाव करते हुए आयातित दालों को स्टॉक लिमिट के प्रावधान से मुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम से आयात की सुविधा तो बढ़ेगी लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में गिरावट के रूप में किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के  मुताबिक आयातित दालों पर स्टॉक लिमिट खत्म कर दी गई है। वहीं थोक कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट 500 टन होगी लेकिन इसमें किसी एक दाल का स्टॉक 200 टन से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं दाल प्रसंस्करण इकाइयों के लिए छह माह के उत्पादन या स्थापित उत्पादन क्षमता के 50 फीसदी के बराबर स्टॉक लिमिट तय की गई है। रिटेलरों के लिए पांच टन की स्टॉक लिमिट जारी रहेगी।

सरकार द्वारा इस संबंध में सोमवार 19 जुलाई, 2021 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह कदम कीमतों में गिरावट के ट्रेंड को देखते हुए उठाया गया है और किसानों को इसका फायदा होगा। लेकिन सरकार के इस दावे के उलट इस समय जब खरीफ फसलों की बुआई चल रही है उस समय आयातकों के लिए ढील देने का मतलब है किसानों को इसका गलत संदेश जाएगा। हो सकता है कि सरकार इस समय दालों के उत्पादन क्षेत्रफल के पिछले साल के मुकाबले करीब 10 लाख हेक्टेयर पीछे चलने के कारण दालों के आयात को सुगम करना चाहती हो ताकि कीमतों पर अंकुश लगाया जा सके। कृषि मंत्रालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी खरीफ फसलों के बुआई आंकड़ों के मुताबिक दालों का क्षेत्रफल 70.64 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंचा है जबकि पिछले साल इसी समय यह 80.36 लाख हेक्टेयर था। यानी यह पिछले साल से 9.71 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है। इन आंकड़ों के मुताबिक  उड़द और मूंग का क्षेत्रफल अधिक गिरावट दर्ज की गई है।

सरकार का दावा है कि उसके प्रभावी कदमों के चलते ही दालों की कीमतों में गिरावट का रुख शुरू हुआ है। यह कदम किसानों के लिए बेहतर होगा। राज्य सरकार और हितधारकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार ही केंद्र सरकार ने स्टॉक लिमिट में छूट देने का कदम उठाया है और आयातित दालों को स्टॉक लिमिट से बाहर कर दिया है। हालांकि आयातकों  उपभोक्ता मामले विभाग की वेब पोर्टल पर स्टॉक की जानकारी देनी होगी। केवल तूर, उड़द और मसूर और चना पर ही  स्टॉक लिमिट लागू होगी। स्टॉक लिमिट  के यह प्रावधान 31 अक्तूबर, 2021 तक ही प्रभावी होंगे।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसके लिए पहले 14 मई, 2021 को विभिन्न श्रेणियों में दालों के स्टॉक की घोषणा का कदम उठाया गया था और 2 जुलाई, 2021 को दालों पर स्टॉक लिमिट लागू की गई थी। इसके चलते 8343 संस्थानों ने पंजीकरण कराया और 30.01 लाख टन दालों के स्टाक की विभाग के वेब पोर्टल पर घोषणा की गई। इन कदमों के चलते दो माह में मसूर दाल की थोक कीमतें तीन से चार फीसदी तक कम हुई हैं और मसूर को छोड़कर बाकी दलों की खुदरा कीमतें दो से चार फीसदी तक कम हुई हैं।

17 जुलाई को उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने विभिन्न हितधारकों और दालों के आयातकों, थोक कारोबारियों और मिलर्स के संगठनों के साथ बैठक की थी। जिसमें कारोबारियों ने भरोसा दिया था कि वह सरकार का सहयोग करेंगे और जमाखोरी के जरिये कृत्रिम कमी नहीं होने दी जाएगी।

असल में स्टॉक लिमिट लगाने के सरकार के फैसले के साथ ही आयातकों और दाल उद्योग के संगठनों ने सरकार पर भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया था। पिछले कई दिनों ने स्टॉक लिमिट में ढील की खबरें उद्योग में चल रही थी। सरकार के इस कदम से लगता है कि उद्योग सरकार को अपनी बातों पर सहमत करने में कामयाब रहा है। हालांकि इन बैठकों में किसानों के किसी प्रतिनिधि की बात सरकार ने नहीं कही है। जबकि सबसे बडे भागीदार उत्पादक किसान ही हैं और आयात को प्रोत्साहित करने वाला कोई भी कदम उनके खिलाफ जाता है।