वैश्विक कीमतों के दबाव से भारत का चीनी निर्यात सुस्त, 20 लाख टन कोटा के मुकाबले फरवरी तक केवल 3.15 लाख टन निर्यात

सरकार द्वारा 2025-26 सत्र के लिए 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने के बावजूद भारत ने फरवरी 2026 तक केवल लगभग 3,15,517 टन चीनी का निर्यात किया है। भारतीय निर्यात कीमतों की तुलना में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कम कीमतें रहने के कारण निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ी है।

वैश्विक कीमतों के दबाव से भारत का चीनी निर्यात सुस्त, 20 लाख टन कोटा के मुकाबले फरवरी तक केवल 3.15 लाख टन निर्यात

वर्ष 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत निर्यात कोटे की तुलना में भारत का चीनी निर्यात काफी पीछे चल रहा है। फरवरी 2026 के अंत तक केवल 3,15,517 टन चीनी का निर्यात हुआ है, जबकि सरकार ने पूरे सीजन में 20 लाख टन निर्यात की अनुमति दी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि चीनी उद्योग ने ही सरकार से इस सीजन में 20 लाख टन निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया था। शिपमेंट की रफ्तार धीमी रहने का मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें भारतीय निर्यात कीमतों से कम हैं, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है।

नवंबर 2025 में सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके तहत मिल-वार कोटा आवंटित किया गया और सुचारू निर्यात सुनिश्चित करने के लिए संचालन संबंधी दिशानिर्देश भी जारी किए गए थे। इसके बाद फरवरी 2026 में सरकार ने अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी, जिससे कुल निर्यात अनुमति की मात्रा बढ़कर 20 लाख टन हो गई। इसके मुकाबले 2024-25 सीजन के लिए निर्यात कोटा 10 लाख टन निर्धारित किया गया था।

अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक भारत से सफेद चीनी का निर्यात 2,57,971 टन रहा। इसके अलावा रिफाइंड चीनी का निर्यात 53,664 टन और कच्ची चीनी का निर्यात 1,620 टन दर्ज किया गया। वहीं लगभग 2,322 टन चीनी वर्तमान में लोडिंग प्रक्रिया में है या लोडिंग के लिए प्रतीक्षा में है।

निर्यात गंतव्यों के आंकड़े बताते हैं कि इस सीजन में भारत से होने वाले चीनी निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और पड़ोसी क्षेत्रों में गया है। कुल निर्यात में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हिस्सेदारी 25.4% रही, इसके बाद अफगानिस्तान 22.9% के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अन्य प्रमुख गंतव्यों में जिबूती (14.6%), तंजानिया (6.8%) और श्रीलंका (6.5%) शामिल हैं।

चीनी उत्पादन का अनुमान कमजोर पड़ा

इस बीच, वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में भारत का चीनी उत्पादन पहले के उद्योग अनुमानों से काफी कम रहने की आशंका है। इसका मुख्य कारण उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में गिरावट और महाराष्ट्र में गन्ने में समय से पहले फूल आना बताया जा रहा है।

उद्योग के ताजा अनुमानों के अनुसार अब कुल चीनी उत्पादन लगभग 290 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से करीब 26 लाख टन कम है। सीजन की शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने कुल उत्पादन 349 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था। इसमें से 34 लाख टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किए जाने की संभावना जताई गई थी, जिसके बाद शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 316 लाख टन रहने का अनुमान था।

हालांकि, देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से मिल रही हालिया रिपोर्ट संकेत दे रही हैं कि उत्पादन इन अनुमानों से कम रह सकता है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक कमी देखने को मिल सकती है। राज्य में इस सीजन चीनी उत्पादन अब करीब 95 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 92.7 लाख टन से थोड़ा अधिक है, लेकिन शुरुआती उद्योग अनुमान 110 लाख टन से काफी कम है।

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