मध्य प्रदेश में डेयरी विकास के लिए 2,973 करोड़ और ग्रामीण रोजगार के लिए 29,619 करोड़ रुपये की स्वीकृति

मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने डेयरी विकास और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2,973 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इससे पांच वर्षों में सहकारी समितियों और दूध संकलन क्षमता का विस्तार होगा। इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने वीबी जीरामजी योजना के लिए राशि को भी स्वीकृति दी।

मध्य प्रदेश में डेयरी विकास के लिए 2,973 करोड़ और ग्रामीण रोजगार के लिए 29,619 करोड़ रुपये की स्वीकृति

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में दुग्ध उत्पादकों, ग्रामीण रोजगार और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मंत्रिपरिषद ने सहकारी डेयरी प्रणाली और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी। इसके अलावा ‘वीबी जी राम जी योजना’ के क्रियान्वयन के लिए 29,619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। बैठक में पंजीकृत किसानों से मूंग की अधिक मात्रा में खरीद के फैसले को भी मंजूरी दी गई।

पांच साल में 26 हजार गांवों तक पहुंचेगी सहकारी डेयरी

डेयरी विकास योजना के तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य दुग्ध संकलन को मौजूदा 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का है। इसी तरह दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन और पैकेट दूध की बिक्री 7 लाख लीटर से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।

पशुधन उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा। योजना के तहत राज्य सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 500 करोड़ रुपये का अनुदान देगी। केंद्र की योजनाओं के अनुरूप अनुमानित 241 करोड़ रुपये का राज्यांश भी स्वीकृत किया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी है।

ग्रामीण रोजगार की गारंटी अब 125 दिन

मंत्रिपरिषद ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी जी राम जी योजना मध्य प्रदेश’ को 1 जुलाई 2026 से लागू करने के फैसले को मंजूरी दी। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।

वित्त वर्ष 2026-27 में योजना की अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये और 2026-27 से 2030-31 तक कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 रहेगी। पांच वर्षों में राज्य का अंश 10,574 करोड़ रुपये और प्रशासनिक व्यय 946 करोड़ रुपये होगा।

योजना के तहत ग्राम पंचायतें जीआईएस, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल से ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार करेंगी। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य होगा। प्रत्येक जिले में शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए लोकपाल नियुक्त किया जाएगा।

मूंग की 60 प्रतिशत तक खरीद

मंत्रिपरिषद ने पंजीकृत किसानों से उनकी मूंग की उपज के 60 प्रतिशत तक खरीदने के मुख्यमंत्री के फैसले को भी स्वीकृति दी। इससे पहले प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत पंजीकृत किसानों से उनकी उपज का अधिकतम 25 प्रतिशत ही खरीदा जाना था। इस सीमा में बदलाव करते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग की 60 प्रतिशत तक उपज खरीदने का फैसला किया गया है। मूंग और उड़द की खरीद 1 जुलाई 2026 से की जा रही है।

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