उत्तर प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप, पशुपालकों पर दोहरी मार; विभाग ने जारी की एडवाइजरी

उत्तर प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज (LSD) का प्रकोप बढ़ने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में हजारों गोवंश संक्रमित हैं। पशुपालन विभाग ने टीकाकरण, निगरानी और जागरूकता अभियान तेज करते हुए पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

उत्तर प्रदेश में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप, पशुपालकों पर दोहरी मार; विभाग ने जारी की एडवाइजरी

उत्तर प्रदेश में गोवंश में फैलने वाली लंपी स्किन डिजीज (LSD) का प्रकोप पशुपालकों की चिंता बढ़ा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में लंपी रोग का प्रकोप बढ़ने से हजारों गोवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में संक्रमण का असर अधिक दिखाई दे रहा है।

इसी बीच पशुपालन विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए निगरानी, टीकाकरण और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। विभाग ने पशुपालकों के लिए बीमारी से बचाव और नियंत्रण को लेकर विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की है।

पश्चिमी यूपी के अमरोहा, बागपत, बिजनौर, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में लंपी रोग का प्रकोप पशुपालकों के लिए मुसीबत बन हुआ है। मुजफ्फरनगर जिले के बढ़ेडी गांव के किसान सुरेंद्र चौधरी ने रूरल वॉयस को बताया कि लंपी रोग के चलते उनकी दुधारू गाय बीमार हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई। इलाज पर कई हजार रुपये खर्च हुए, फिर भी गाय को नहीं बचाया जा सका। इस तरह पशुपालकों पर बीमारी और आर्थिक नुकसान की दोहरी मार पड़ रही है।

पश्चिमी यूपी के कई जिलों में प्रकोप 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर और अन्य जिलों में लंपी के मामले सामने आए हैं। जुलाई के अंत में सहारनपुर, बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर में संक्रमण की पुष्टि के बाद पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में वैक्सीनेशन शुरू किया था। मुजफ्फरनगर में संक्रमित पशुओं की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में लंपी बीमारी बड़े पैमाने पर फैली थी। तब देश के कई राज्यों में इस बीमारी ने पशुओं के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया था और बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी। अब एक बार फिर इस बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

पशुपालकों के अनुसार, कई पशुओं के शरीर पर गांठें निकलने, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बीमारी तेजी से फैलने से पशुपालकों में भय बना हुआ है।

विभाग ने जारी की एडवाइजरी

पशुपालन विभाग ने लंपी रोग को लेकर पशुपालकों को सतर्क करते हुए एडवाइजरी जारी की है। पशुपालकों से अपील की गई है कि पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के संभावित लक्षणों पर विशेष निगरानी रखें। संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दें और संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

रोग के लक्षण और बचाव

लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से मक्खियों, मच्छरों और किलनी के काटने से फैलती है। पशुओं में तेज बुखार, त्वचा पर 1 से 5 सेंटीमीटर की कठोर गांठें, दूध उत्पादन में गिरावट तथा आंख और नाक से स्राव इसके प्रमुख लक्षण हैं।

बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने और बाड़े में कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक की सलाह से उपचार कराया जाना चाहिए। संक्रमण के दौरान पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार आवश्यक दवाएं, दर्द निवारक और सहायक उपचार दिए जा सकते हैं। बीमार पशु को अलग रखें तथा उसे सुपाच्य आहार और साफ पानी उपलब्ध कराएं।

जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष

लंपी रोग की निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य संक्रमित पशुओं की सूचना मिलने पर स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ समन्वय कर तत्काल उपचार, आइसोलेशन और टीकाकरण सुनिश्चित करना है। संक्रमित पशुओं को क्वारंटीन करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रिंग वैक्सीनेशन पर भी जोर दिया रहा है, ताकि आसपास के पशुओं में संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि किसी पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें, दूध उत्पादन में अचानक कमी, आंख या नाक से स्राव अथवा कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल दूसरे पशुओं से अलग करें और पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दें। उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-5141 पर भी पशुधन संबंधी शिकायत या सूचना दी जा सकती है।

 

Subscribe Rural Voice Newsletter