सरसों की बुवाई पिछले साल से 46% कम, अब तक सिर्फ 20.5 लाख हेक्टेयर पहुंचा रकबा, बाकी रबी फसलें भी पीछे
चालू रबी सीजन में रेपसीड और सरसों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 46.16 प्रतिशत पीछे चल रही है। 30 अक्टूबर तक इसका रकबा 20.50 लाख हेक्टेयर पहुंचा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 38.07 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। राजस्थान में बुवाई 59.61 प्रतिशत और हरियाणा में 72.09 प्रतिशत पीछे है। सरसों के ऊंचे बाजार भाव और बढ़े हुए एमएसपी के बावजूद बुवाई की धीमी रफ्तार चिंता बढ़ा रही है।
इस बार रबी सीजन में सरसों का रकबा बहुत पीछे चल रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अभी तक लगभग आधे क्षेत्र में ही इसकी बुवाई हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उपज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक सिर्फ 20.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रेपसीड और सरसों की बुवाई हुई थी। पिछले साल (रबी 2025) में 30 अक्टूबर तक 38.07 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। यानी इस साल का रकबा पिछले साल से 46.16 प्रतिशत कम है। वैसे, रबी की बुवाई ज्यादातर फसलों के मामले में पीछे चल रही है। रबी की मुख्य फसल गेहूं का रकबा 94.22 प्रतिशत कम है। सभी रबी फसलों का रकबा अभी बीते वर्ष से 43.5 प्रतिशत पीछे है।
सरसों के दाम ऊंचे होने के बावजूद इसकी बुवाई धीमी चल रही है। राजस्थान की अलग-अलग मंडियों में सरसों का भाव हाल में 7600 रुपये से 9300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा है। सरकार ने इस साल रबी सीजन में सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह पिछले साल 6200 रुपये प्रति क्विंटल था। हाल की बारिश के बाद अब सरसों की बुवाई तेज होने की उम्मीद है।
देश में सरसों की सबसे अधिक खेती राजस्थान में होती है। वहां पिछले साल के 22.06 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अभी तक सिर्फ 8.91 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हुई है। इस तरह वहां बुवाई 59.61 प्रतिशत पीछे चल रही है।
दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां बीते वर्ष अब तक 13.33 लाख हेक्टेयर में रेपसीड-सरसों की बुवाई हुई थी। इस साल का रकबा 10.38 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सका है, जो बीते वर्ष से 22.19 प्रतिशत कम है। हरियाणा में तो सरसों की बुवाई पिछले साल से 72.09 प्रतिशत पीछे चल रही है। राज्य में अभी तक सिर्फ 60 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई है, जो पिछले साल 2.15 लाख हेक्टेयर थी।
उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और असम में भी रेपसीड-सरसों की कुछ खेती की जाती है। इनमें पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में रकबा पिछले साल से कम ही है। पश्चिम बंगाल में पिछले साल के 23 हजार हेक्टेयर की तुलना में इस वर्ष इसका रकबा 37 हजार हेक्टेयर हो चुका है।
उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में 5 हजार की जगह 4 हजार हेक्टेयर में अब तक बुवाई हुई है। असम में भी इसका रकबा पिछले साल के 13 हजार हेक्टेयर की जगह सिर्फ 4 हजार हेक्टेयर पहुंचा है।
रबी तिलहन की मुख्य फसल सरसों ही है। सभी तिलहन का पांच साल का औसत रकबा 90.76 लाख हेक्टेयर है, जिसमें रेपसीड-सरसों का हिस्सा 82.78 लाख हेक्टेयर है। इस वर्ष सभी तिलहन की बुवाई 30 अक्टूबर तक 20.97 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, जो पिछले साल 38.62 लाख हेक्टेयर से 45.7 प्रतिशत कम है।
हालांकि सीजन की दूसरी प्रमुख तिलहन फसल मूंगफली की खेती बढ़ी है। 30 अक्टूबर तक इसका रकबा पिछले साल के 15 हजार हेक्टेयर की तुलना में 25 हजार हेक्टेयर हो गया है। इस तरह इसमें 62 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसका पांच साल का कुल औसत रकबा 3.98 लाख हेक्टेयर है।
रबी की दूसरी फसलों की बात करें तो 30 अक्तूबर तक गेहूं की बुवाई पिछले साल के 3.34 लाख हेक्टेयर के मुकाबले सिर्फ 19 हजार हेक्टेयर में हुई है। मोटे अनाज का रकबा बीते वर्ष के 4.22 लाख हेक्टेयर से 10.4 प्रतिशत कम, 3.78 लाख हेक्टेयर है। दलहन की बुवाई 51.7 प्रतिशत पीछे है और इसका क्षेत्रफल 19.5 लाख हेक्टेयर की तुलना में सिर्फ 9.45 लाख हेक्टेयर पहुंचा है।

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