भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसान संगठनों ने संयुक्त संघर्ष का ऐलान किया
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में देशभर के विभिन्न किसान संगठनों ने अपने मतभेद भुलाकर संयुक्त संघर्ष का ऐलान किया है। चंडीगढ़ में हुई बैठक में किसान नेताओं ने 1 जुलाई को अगली बैठक बुलाने और देशव्यापी जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के विरोध में देशभर के विभिन्न किसान संगठनों ने आपसी मतभेद भुलाकर संयुक्त संघर्ष का ऐलान किया है। गुरुवार को चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित किसान संगठनों की बैठक में गुरनाम सिंह चढूनी, बलबीर सिंह राजेवाल, वीएम सिंह, सरवन सिंह पंढेर, सुरजीत सिंह फूल और अभिमन्यु कोहाड़ समेत देशभर से 100 से अधिक किसान नेताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में एसकेएम (गैर-राजनीतिक), एकेएमएम (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा, किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा, राष्ट्रीय किसान महासंघ, ऑल इंडिया एमएसपी मोर्चा सहित विभिन्न किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ व्यापक स्तर पर संयुक्त संघर्ष चलाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि यह प्रस्तावित समझौता देश के किसानों, पशुपालकों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता के हितों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए सभी संगठन अपने मतभेद भुलाकर एक मंच पर आकर इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेंगे।
बैठक में आगे की रणनीति तय करने के लिए 1 जुलाई 2026 को किसान भवन, चंडीगढ़ में सभी सहभागी मंचों और संगठनों के पांच-पांच प्रमुख प्रतिनिधियों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ संयुक्त संघर्ष की विस्तृत रणनीति, कार्यक्रमों की रूपरेखा और आंदोलन के अगले चरणों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि जो किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठन अथवा उनके प्रतिनिधि किसी कारणवश गुरुवार की बैठक में शामिल नहीं हो सके, उन्हें भी 1 जुलाई की बैठक में आमंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक संगठनों को एक मंच पर लाकर व्यापक, मजबूत और प्रभावी संयुक्त संघर्ष की रणनीति तैयार की जा सके।
बैठक में उपस्थित नेताओं ने स्पष्ट कहा कि देश की कृषि, पशुपालन, रोजगार, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि सरकार किसानों और मजदूरों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो संयुक्त मोर्चा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में किसानों, मजदूरों, युवाओं, व्यापारियों और आम जनता को जागरूक करने के लिए देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। साथ ही अधिक से अधिक किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों को इस संघर्ष से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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