होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारत के लिए उर्वरक ला रहे 16 शिप में से चार निकले, बढ़ेगी आपूर्ति
यूरिया, डीएपी और सल्फर लेकर आ रहे चार मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार के अनुसार खरीफ 2026 सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है। उसका कहना है कि घरेलू उत्पादन, आयात और मौजूदा भंडार के कारण देश में उर्वरक आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
खाड़ी देशों से यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर की खेप लेकर आने वाले 16 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे। उनमे से चार ने होर्मुज को पार कर लिया है और यह भारत की ओर बढ़ रहे हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार ये जहाज कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेंगे।
असल में खाड़ी युद्ध के चलते बंद होर्मुज में भारत के लिए उर्वरक लाने वाले 16 जहाजों में अभी तक कोई भारत नहीं आया है। पिछले दिनों गैस और कच्चा तेल लाने वाले कुछ जहाज होर्मुज पार कर भारत आ सके थे। उर्वरक उद्योग सूत्रों के मुताबिक उर्वरक लाने वाले सभी 16 जहाज फंसे हुए थे। सरकार द्वारा सोमवार को जारी सूचना के मुताबिक अब इनमें से चार जहाज होर्मुज पार कर भारत आ रहे हैं।
ये जहाज ऐसे समय आ रहे हैं जब खाड़ी क्षेत्र में व्यापार और समुद्री परिवहन मार्गों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मंत्रालय का कहना है कि ये आयातित खेप देश में उपलब्ध उर्वरक भंडार को और मजबूत करेगी तथा खरीफ सीजन के दौरान किसानों की मांग को पूरा करने में मदद करेगी।
मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार 22 जून 2026 तक देश में कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 168.67 लाख टन था। वर्तमान भंडार में 81.44 लाख टन यूरिया, 20.92 लाख टन डीएपी, 55.91 लाख टन एनपीके उर्वरक, 12.68 लाख टन म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) तथा 25.13 लाख टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) शामिल है। एसएसपी को छोड़कर बाकी प्रमुख उर्वरकों का भंडार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
उर्वरकों की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई है। 1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 140.2 लाख टन थी। इस दौरान 79.1 लाख टन यूरिया, 34.8 लाख टन एनपीके उर्वरक तथा 19.8 लाख टन डीएपी और टीएसपी की बिक्री हुई।
मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि की गई है। मार्च से जून 2026 के दौरान देश में 133.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उत्पादन हुआ, जबकि इसी अवधि में 43.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का आयात किया गया। मंत्रालय के अनुसार घरेलू उत्पादन और आयात दोनों के माध्यम से आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति अपनाई गई है।
इस बीच भारत ने हाल ही में जारी वैश्विक निविदा के तहत 17.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद का अनुबंध भी किया है। इसके साथ ही चालू खरीफ सीजन के लिए देश ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया तथा फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों की व्यवस्था कर ली है।
मंत्रालय के अनुसार इस खरीद प्रक्रिया में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के साथ समन्वय किया गया। यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, नाइजीरिया, रूस, मिस्र और अल्जीरिया जैसे देशों से सुनिश्चित की गई है। वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र, ट्यूनीशिया और अमेरिका सहित कई देशों से की जा रही है।
उर्वरक विभाग ने कहा है कि वह राज्य सरकारों, सहकारी संस्थाओं और वितरण एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

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