मूंग खरीद पर 'लैटर वॉर': किसान आंदोलन के दौरान केंद्र और राज्य के बीच 'खींचतान' उजागर

मध्य प्रदेश में मूंग खरीद को लेकर किसानों के आंदोलन के बीच केंद्र और राज्य के कृषि मंत्रियों के परस्पर विरोधाभासी रुख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मूंग खरीद पर 'लैटर वॉर': किसान आंदोलन के दौरान केंद्र और राज्य के बीच 'खींचतान' उजागर

मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर हुआ किसान आंदोलन असरदार रहा। बुधवार को किसान संगठनों से वार्ता के बाद राज्य सरकार ने मूंग खरीद की सीमा 25 फीसदी के बढ़ाकर 60 फीसदी करने का फैसला किया है। इससे किसानों से प्रति एकड़ लगभग 3 क्विंटल तक खरीद हो सकेगी।

इसी बीच, केंद्र और राज्य सरकार के बीच मूंग खरीद को लेकर पत्राचार ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि यह विरोधाभास विपक्ष और सरकार के बीच नहीं, बल्कि एक ही पार्टी और एक ही राज्य से ताल्लुक रखने वाले दो कृषि मंत्रियों—केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, के दावों के बीच दिखाई दे रहा है।

आंदोलन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से किसानों को यह आश्वासन दिया गया कि केंद्र सरकार से आग्रह कर मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़वाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसानों की अधिक से अधिक उपज एमएसपी पर खरीदी जा सके। 

राज्य सरकार की मांग 

28 जुलाई को मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग खरीद के लिए 8.06 लाख टन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था। जिसमें प्रदेश को 4.54 लाख टन खरीद का लक्ष्य दिया गया। अपने पत्र में कंसाना ने केंद्र सरकार से मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर प्रदेश के कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत, लगभग 8 लाख टन करने का अनुरोध किया है।

इसके जवाब में अगले ही दिन, 29 जुलाई को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का खरीद का लक्ष्य नहीं दिया जाता है। केंद्र सरकार राज्यों से पीएम-आशा योजना के तहत ही मूंग खरीद की स्वीकृति प्रदान करती है। इस योजना में स्पष्ट उल्लेख है कि केंद्र सरकार राज्यों से 25% प्रतिशत तक ही खरीद कर सकती है। इसके अतिरिक्त खरीद राज्यों को करनी होती है। 

शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को पहले ही 4.54 लाख टन मूंग खरीद की स्वीकृति दी जा चुकी है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। विभिन्न राज्यों को कुल 5.23 लाख टन मूंग खरीद की स्वीकृति दी गई, जिसमें अकेले मध्य प्रदेश का हिस्सा लगभग 87 प्रतिशत है। 

उन्होंने यह भी लिखा कि 29 जुलाई तक राज्य में लगभग 60 हजार टन मूंग की खरीद हुई है। इसलिए किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए मूंग की खरीद शीघ्रता से सुनिश्चित की जाए। यह बात राज्य में धीमी खरीद की ओर इशारा करती है। 

इन पत्रों से मूंग खरीद को लेकर केंद्र और राज्य के रुख में अंतर नजर आता है। राज्य सरकार का आग्रह है कि किसानों को मूंग का एमएसपी दिलाने के लिए खरीद लक्ष्य बढ़ाना जरूरी है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों के तहत ऐसा संभव नहीं है और अतिरिक्त खरीद का दायित्व राज्य सरकार का है।

किसान आंदोलन का जिक्र नहीं 

केंद्रीय कृषि मंत्री के पत्र का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसमें भोपाल में चल रहे किसानों के आंदोलन का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। जबकि राज्य सरकार लगातार आंदोलनकारी किसानों को यह भरोसा दिला रही थी कि केंद्र से खरीद सीमा बढ़वाने का प्रयास किया जा रहा है। शिवराज के पत्र से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार खरीद सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं है और नियमों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को 25 फीसदी से अधिक खरीद का जिम्मा खुद उठाने की सलाह दी। 

शिवराज सिंह चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय कृषि मंत्री न तो राज्यों को अलग से कोई खरीद लक्ष्य देते हैं और न ही खरीद की स्वीकृति प्रदान करते हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट पीएम-आशा की गाइडलाइन तय करती है। यानी खरीद लक्ष्य बढ़ाने का निर्णय केंद्रीय मंत्री के विवेकाधिकार का विषय नहीं है। 

कहां गया शत-प्रतिशत खरीद का वादा? 

यहां सवाल यह भी उठता है कि अगर केंद्रीय योजना के तहत राज्यों से अधिकतम 25 फीसदी मूंग खरीद का नियम बनाया गया है तो पिछले साल केंद्रीय कृषि मंत्री किसानों से दलहन की शत-प्रतिशत खरीद का दावा क्यों कर रहे थे? जोर-शोर से प्रचारित किया गया था कि किसानों की पूरी दलहन उपज खरीदी जाएगी। इसके लिए नेफेड और एनसीसीएफ के पोर्टल पर इच्छुक किसानों के रजिस्ट्रेशन की बात भी कही गई है।

लेकिन इस साल जब मध्यप्रदेश के किसान मूंग खरीद को लेकर सड़कों पर हैं तो पूरी खरीद की बजाय सिर्फ 25 फीसदी खरीद की गाइडलाइन का तर्क दिया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री को लिखे पत्र में मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री ने साफ कहा है कि किसानों को बेहतर मूल्य मिले और वे भविष्य में भी दलहन उत्पादन के प्रति इच्छुक रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए किसानों को एमएसपी का अधिकतम लाभ दिया जाना आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से संभव नहीं होगा।

पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह है कि दोनों नेता भाजपा के वरिष्ठ चेहरे हैं, दोनों मध्य प्रदेश से आते हैं और दोनों केंद्र व राज्य के कृषि महकमें संभाल रहे हैं। लेकिन मूंग खरीद के मुद्दे पर दोनों के रुख अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल, चिट्ठियों का यह सिलसिला किसानों की समस्या का समाधान कम और सरकार के भीतर खींचतान और तालमेल की कमी को ज्यादा उजागर करता है। 

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