आईआईवीआर द्वारा विकसित लाल भिंडी से किसान कमा रहे अधिक मुनाफा, स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी द्वारा विकसित लाल रंग की काशी लालिमा प्रजाति की भिंडी की खेती करने पर किसान को सामान्य भिंडी की तुलना में डेढ़ से दोगुना ज्यादा मुनाफा होगा। इस भिंडी की बुवाई से लेकर इसके प्रबंधन तक का लागत खर्च सामान्य भिंडी के समान ही आता है लेकिन बाजार में इसके गुणों को देखते हुए ज्यादा मूल्य मिलता है जिसके चलते सामान्य भिंडी की तुलना में किसान ज्यादा से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं

आईआईवीआर द्वारा विकसित लाल भिंडी से किसान कमा रहे अधिक मुनाफा, स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद

अगर कोई आपसे पूछे कि भिंडी किस रंग की होती है, तो आप का जवाब होगा हरालेकिन अगर हम आपको बताएं कि हरे रंग की भिंडी के साथ-साथ अब लाल रंग की भिंडी भी मार्केट में आ गई है तो शायद आपको यकीन ना हो। लेकिन ये बिल्कुल सच है, क्योकि अब लाल रंग की भिंडी आ गई है। इस भिंडी के बीज को वाऱाणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) से किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिक मिनरल्स और विटामिन के चलते स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ ही बाजार में किसानों को इसका दाम 100 रुपये से 500 रुपये प्रति किलो तक मिलना संभव है।  रूरल वॉइस ने इस बारे में  आईआईवीआर,  वाराणसी के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ एस. एन. एस. चौरसिया के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया की लाल रंग की भिंडी की खोज आईआईवीआर ने की है। लाल भिंडी की काशी ललिमा प्रजाति को विकसित करने में आईआईवीआर के कृषि वैज्ञानिकों ने 23 साल के शोध किया और इस किस्म को विकसित किया गया है। 

 स्वास्थ्य के नजरिये से बेहद फायदेमंद है लाल भिंडी-

डॉ चौरसिया ने बताया की दरअसल काशी लालिमा का विकास छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के यहां उगाए जाने वाली स्थानीय लाल भिंडी की फसल से हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस काशी लालिमा प्रजाति  भिंडी को विकसित करने में सलेक्सन मेथड का इस्तेमाल किया है। संस्थान के अनुसार लाल भिंडी को विकसित करने  के लिए साल 1995-96 से ही इस पर  काम शुरू हो गया था। साल 2017 -18 में जाकर  इस पर सफलता मिली थी। इस लाल प्रजाति की भिंडी में दूसरे हरे भिंडी में पाए जाने वाले क्लोरोफिल की जगह इसमें एंथोसाइनइन की मात्रा ज्यादा होती है, जिसकी वजह से यह  लाल रंग की होती है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की माने तो दूसरी प्रजाति की भिंडी के तुलना में इसमे कैल्शियम, आयरन और विटामिन A की मात्रा ज्यादा होती है, जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है। इस भिंडी को सामान्य भिंडी की तरह उगाना भी आसान होता है। इसमें लागत भी सामान्य भिंडी की तरह ही आती है।  इस लाल रंग की भिंडी को खाने से मनुष्य के शरीर में एंटी आक्सीडेंट क्रियाविधि बढ़ती हैं । इसकी वजह से कृषि वैज्ञानिक इसको खाने के साथ साथ सलाद के रूप में इस्तेमाल करने की  सलाह भी देते हैं।

उन्होंने बताया की गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड के कमी के चलते उनके बच्चों के मानसिक विकास में कमी आ जाती है । उसके लिए लाल भिंडी रामबाण है, क्योंकि इस लाल भिंडी में फोलिक एसिड की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। इसकी वजह से यह गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद है। इतना ही नहीं इस भिंडी में पाए जाने वाले गुणकारी तत्व लाइफस्टाइल डिजीज जैसे मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियों को भी नियंत्रित करने में सहायता करती है ।

किसानों मिलेगा लाल भिंडी से दोगुना लाभ

डॉ चौरसिया के अनुसार  यह भिंडी खाने में हरी भिंडी  की तरह ही होती है और इतने गुणों वाली भिंडी को बेचकर किसान ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे । उनका कहना है कि लाल भिंडी की पैदावार प्रति हेक्टेयर लगभग 130 कुंटल  से लेकर 140 कुंटल तक प्राप्त की जा सकती है, इसलिए कृषि वैज्ञानिक लाल भिंडी की इस किस्म की पैदावार बढ़ाने के लिए शोध  कार्य भी  कर रहे हैं।  भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित लाल रंग की काशी लालिमा प्रजाति की अगर किसान खेती करते हैं तो उनको सामान्य भिंडी की तुलना में डेढ़ से दोगुना ज्यादा मुनाफा होगा क्योंकि इस भिंडी  की बुवाई से लेकर इसके प्रबंधन तक का लागत खर्च सामान्य भिंडी के समान ही आता है। मगर बाजार में इसके गुणों को देखते हुए ज्यादा  मूल्य मिलता है । इसलिए किसान इस भिंडी की खेती कर सामान्य भिंडी भिंडी की तुलना में ज्यादा से ज्यादा लाभ कमा सकते हैं। इसलिए  इस भिंडी के बीज संस्थान किसानों को उपलब्ध करवा रही हैं जिससे इसकी खेती कर  किसान  अधिक से अधिक लाभ कमा सके।

डॉ चौरसिया ने बताया अपने देश में हरी भिंडी की खेती ज्यादा एरिया में होती है और लाल रंग की भिंडी पश्चिमी देशों में ज्यादातर देखने को मिलती है और भारत भी वहीं से अपने उपयोग के लिए मंगवाता है।  लाल भिंडी को लोग 100 रूपये से लेकर 500 रूपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं। लेकिन अब काशी लालिमा प्रजाति की भिंडी विकसित हो जाने के बाद अब हमें दूसरे देशों से आयात नहीं करना पड़ेगा बल्कि देश के किसान इस लाल भिंडी की खेती कर बंपर उत्पादन करेंगे और अपने देश के मांग की पूर्ति के साथ साथ दूसरों देशों को निर्यात कर बंपर कमाई कर सकेंगे।