थोक महंगाई मई में रिकॉर्ड 9.68% पर पहुंची, ईंधन कीमतों में उछाल का असर

पश्चिम एशिया युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा संकट के बीच भारत की थोक महंगाई दर मई 2026 में बढ़कर रिकॉर्ड 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई। ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में 30.33 प्रतिशत की महंगाई और कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में तेज उछाल इसके प्रमुख कारण रहे। हालांकि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद तेल कीमतों में नरमी से जून में राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

थोक महंगाई मई में रिकॉर्ड 9.68% पर पहुंची, ईंधन कीमतों में उछाल का असर

खाड़ी युद्ध से पैदा ऊर्जा संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश की थोक महंगाई दर (डब्ल्यूपीआई) मई 2026 में बढ़कर रिकॉर्ड 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। ईंधन एवं बिजली, विनिर्मित उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने नौ वर्षों बाद थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है।

ईंधन और बिजली की महंगाई

मई में ईंधन एवं बिजली की महंगाई बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी। क्रूड पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि और भी तेज रही। इस श्रेणी में महंगाई दर मई में 61.51 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अप्रैल में 56.31 प्रतिशत थी।

फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजराइल युद्ध के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके चलते देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मई के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की।

खुदरा महंगाई से कहीं अधिक थोक महंगाई

मई में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) 3.93 प्रतिशत रही, जबकि थोक महंगाई 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई। थोक मूल्य सूचकांक में ईंधन उत्पादों का भार अधिक होने के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर इसमें अधिक दिखाई देता है।

खाद्य और विनिर्मित उत्पाद भी हुए महंगे

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई मई में बढ़कर 3.60 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी। वहीं विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अप्रैल में 6.68 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा लागत बढ़ने का असर उत्पादन क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।

जून में मिल सकती है राहत

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जून में थोक महंगाई में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा समझौते पर सहमति बनी है। इसके बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी कीमतों में नरमी आई है। इसका सकारात्मक असर जून 2026 की थोक महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है।

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