फरवरी मध्य में ही बंद हुईं 78 चीनी मिलें, गन्ना आपूर्ति बनी बड़ी समस्या

पेराई सत्र 2025-26 में फरवरी मध्य तक देश की 78 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं। गन्ने की कम आपूर्ति और कोल्हू-खांडसारी इकाइयों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। इस साल चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान 349 लाख टन का था, जो अब घटकर करीब 325 लाख टन रहने की आशंका जताई जा रही है।

फरवरी मध्य में ही बंद हुईं 78 चीनी मिलें, गन्ना आपूर्ति बनी बड़ी समस्या

चालू पेराई सत्र (2025-26) में फरवरी से ही चीनी मिलों का संचालन बंद होना शुरू हो गया है। चीनी उद्योग संगठन इस्मा के अनुसार, 15 फरवरी तक देश की 78 चीनी मिलों ने पेराई कार्य बंद कर दिया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 72 मिलें बंद हुई थीं। पिछला सत्र भी उत्पादन के लिहाज से बहुत बेहतर नहीं रहा था और इस बार हालात और चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं।

चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति में दिक्कतों के साथ-साथ कोल्हू और खांडसारी इकाइयों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी तक 9 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, जबकि दो मिलें इस सत्र में शुरू ही नहीं हो सकीं। कई मिलों में फरवरी के अंत तक पेराई बंद होने के आसार हैं, क्योंकि पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की पैदावार में गिरावट और महाराष्ट्र में समय से पहले फ्लावरिंग का असर चीनी उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। हालांकि 15 फरवरी तक देश में 225 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि तक हुए 197 लाख टन से अधिक है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र में चुनाव के कारण पेराई देर से शुरू हुई थी।

चालू पेराई सीजन के लिए चीनी उत्पादन के आरंभिक अनुमान में इस्मा ने वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया था। लेकिन उद्योग सूत्रों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नेट उत्पादन लगभग 290 लाख टन रहने की संभावना है। इसके अतिरिक्त 34 लाख टन चीनी के एथेनॉल में डायवर्जन के बाद चीनी उत्पादन लगभग 325 लाख टन रह सकता है।

देश के प्रमुख उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में 15 फरवरी तक करीब 66 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 64 लाख टन से थोड़ा अधिक है। हालांकि गन्ने से चीनी की रिकवरी दर पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, 14 फरवरी तक उत्तर प्रदेश की मिलों ने 662 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 680 लाख टन पेराई हुई थी। यानी इस वर्ष करीब 18 लाख टन कम गन्ने की पेराई हुई है, जबकि मिलें अधिक से अधिक गन्ना जुटाने की कोशिश कर रही हैं।

पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश के किसान गन्ने की फसल में रोग और पैदावार में गिरावट की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे मिलों में आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, गुड़ और खांडसारी इकाइयां किसानों को अधिक कीमत दे रही हैं, जिससे गन्ना खरीद को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में बिजनौर जिले के नांगलसौती गांव के कोल्हू संचालक मंजीत सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि चालू सीजन में कोल्हू 430 से 440 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दे रहे हैं। हमें गुड़ का भाव 45 से 50 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है और चीनी की तुलना में गुड़ की रिकवरी भी अधिक है। नकद भुगतान और बेहतर दर के कारण कई किसान चीनी मिलों के बजाय कोल्हू और खांडसारी इकाइयों को गन्ना बेच रहे हैं।

मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका है कि मार्च के अंत तक उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलों में पेराई बंद हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में उत्तर प्रदेश में मई तक पेराई जारी रहती है।

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