अमेरिका से ट्रेड डील के खिलाफ कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन, संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देश के कई हिस्सों में भारत बंद का मिला-जुला असर दिखा।अमेरिका–भारत व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों ने सरकार पर किसानों व मजदूरों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। संसद परिसर में भी विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया
केंद्र सरकार की श्रम और आर्थिक नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को भारत बंद का देश के कई हिस्सों में मिला-जुला असर देखने को मिला। हालांकि, अधिकांश राज्यों में जनजीवन खास प्रभावित नहीं हुआ। कई राज्यों में किसान संगठनों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का विरोध करते हुए हड़ताल का समर्थन किया।
हड़ताल का अधिक असर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा में देखने को मिला, जबकि पंजाब, हरियाणा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए। नई दिल्ली में जंतर-मंतर और एनसीआर में नोएडा व फरीदाबाद में ट्रेड यूनियनों ने श्रम कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्र के श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने हड़ताल का समर्थन किया। किसान संगठनों ने मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ योजना शुरू करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। पंजाब के पटियाला और लुधियाना में व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों और ट्रेड यूनियनों ने प्रदर्शन किए।

संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर में श्रम संहिताओं के खिलाफ आम हड़ताल के समर्थन में विरोध-प्रदर्शनों में अभूतपूर्व भागीदारी का दावा करते हुए इसे अब तक की सबसे बड़ी आम हड़तालों में से एक बताया।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई संगठनों ने नए श्रम कानूनों के खिलाफ हड़ताल का विरोध करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि प्रदर्शन में शामिल ट्रेड यूनियनें अपने राजनीतिक आकाओं के इशारों पर मजदूरों के कंधों पर बंदूक रखकर चला रही हैं।
ओडिशा में 12 घंटे के बंद के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। भुवनेश्वर, कटक, बालासोर, बेरहामपुर और संबलपुर सहित कई शहरों में सड़क जाम और सार्वजनिक परिवहन बाधित रहा। झारखंड में बैंकिंग, बीमा और कोयला क्षेत्र प्रभावित हुए। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, हालांकि परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं और भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज जारी रहा।
तमिलनाडु के तूतीकोरिन और चेन्नई बंदरगाहों पर परिचालन प्रभावित हुआ। श्रीपेरंबदूर औद्योगिक क्षेत्र में कई इकाइयों के कर्मचारियों ने गेट मीटिंग और प्रदर्शन किए। केरल में 24 घंटे की हड़ताल के चलते केएसआरटीसी और निजी बस सेवाएं ठप रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

पटना में सीपीआई-एमएल के प्रदर्शन के दौरान पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर श्रम सुधारों और व्यापार नीति के जरिए मजदूरों के अधिकारों और किसानों के हितों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मनरेगा की जगह वीबी-ग्रामजी योजना लाने और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते की भी आलोचना की।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
इस बीच, अमेरिका–भारत व्यापार समझौते को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। मल्लिकार्जुन खड़गे, के. सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, टी. आर. बालू और जया बच्चन सहित कई सांसदों ने ‘ट्रैप डील’ लिखे बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह समझौता भारतीय हितों के साथ समझौता है।
केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार बिना व्यापक चर्चा के ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर खेती, रोजगार और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।

मैं किसानों के लिए लडूंगा: राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े वैश्विक संकट के दौर से गुजर रही है। सरकार ने इन वैश्विक परिस्थितियों को स्वीकार करने के बावजूद ऐसा समझौता किया है, जिससे भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार पर किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है। अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।
FIR हो,
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 12, 2026
मुकदमा दर्ज हो या
Privilege प्रस्ताव लाएं - मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।
जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।
अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे। pic.twitter.com/gNVMEYFp3i
थरूर बोले – “सिर्फ एक और केरल बंद”
कांग्रेस ने जहां देशव्यापी हड़ताल का समर्थन किया, वहीं तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “यह दुखद है कि आज का ‘भारत बंद’ असल में सिर्फ एक और ‘केरल बंद’ बनकर रह गया है। जहां बाकी भारत ऐसे जबरन विरोध से आगे बढ़ चुका है, वहीं केरल आज भी इस संगठित बंद संस्कृति का बंधक बना हुआ है।”
उन्होंने कहा, “जब से मैं राजनीति में आया हूं, मेरा रुख स्पष्ट रहा है। मैं विरोध करने के अधिकार का समर्थन करता हूं, लेकिन अवरोध पैदा करने के अधिकार का नहीं। किसी भी भारतीय को दूसरे के स्वतंत्र रूप से आने-जाने में बाधा डालने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।”

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