मतभेद के बावजूद BRICS ने नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया, भारत का सहमति से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई पर जोर
BRICS देशों ने शनिवार को शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया। भारत ने समूह को अधिक आर्थिक सहयोग, व्यापार एकीकरण और वैश्विक शासन सुधार की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहमति से आगे बढ़कर उसके क्रियान्वयन, ग्लोबल साउथ के बेहतर प्रतिनिधित्व, व्यावहारिक सीमा-पार भुगतान समाधान और अधिक महत्वाकांक्षी एजेंडे की वकालत की।
BRICS के गठन के 20 वर्ष पूरे होने के साथ नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में समूह ने एक नए चरण में प्रवेश किया। सदस्य देशों ने 2026 के नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया और भारत ने अगले 20 वर्षों के लिए अधिक कार्रवाई केंद्रित एजेंडे की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS अब परिपक्वता के चरण में पहुंच चुका है और इस आपसी सहमति को ठोस और मापने योग्य परिणामों में बदलना होगा। साथ ही उन्होंने वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक शासन में ग्लोबल साउथ की अधिक प्रभावी भूमिका का विचार रखा।
घोषणा का सर्वसम्मति से पारित होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका था। भारत ने संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दों सहित विभिन्न मतभेदों को दूर करने के लिए व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया।

व्यापार बाधाओं पर सख्त रुख
नई दिल्ली घोषणापत्र में व्यापार को BRICS के आर्थिक एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। सदस्य देशों ने एकतरफा शुल्क और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई। समूह के अनुसार, ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। BRICS ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विपरीत एकतरफा आर्थिक कदमों का भी विरोध किया।
घोषणा में सदस्य देशों के बीच सीमा-पार भुगतान के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच व्यापार और वित्तीय सहयोग को मजबूत करना तथा बाहरी आर्थिक दबावों से जुड़ी कमजोरियों को कम करना है।
भारत BRICS के भीतर व्यापार एकीकरण बढ़ाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और सदस्य देशों के बीच कारोबारी अवसरों का विस्तार करने पर जोर देता रहा है। साथ ही वह वैश्विक आर्थिक नियम तय करने में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बड़ी भूमिका की मांग कर रहा है।

मोदी ने वैश्विक शासन में सुधार का आह्वान किया
शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों के प्रभाव का बड़ा हिस्सा झेलता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी भूमिका अब भी सीमित है। उन्होंने “नियमों को मानने वाले” से “नियम बनाने में भूमिका निभाने वाले” बनने की दिशा में बदलाव की जरूरत बताई।
मोदी ने अगले BRICS शिखर सम्मेलन तक वैश्विक शासन सुधार के लिए एक रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इसके लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण को तीन प्रमुख आधार बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात भी उन्होंने की।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि BRICS को केवल सहमति बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि फैसलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके लिए उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें समूह की पहलों, संबंधित एजेंसियों, समयसीमा और प्रगति की जानकारी दर्ज की जा सके।

तकनीक और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर जोर
भविष्य के BRICS एजेंडे में तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और जैव-प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों को भविष्य के वैश्विक नियमों को प्रभावित करने वाले क्षेत्र बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि BRICS विकासशील देशों की कंपनियों को उनकी बातचीत, कानूनी और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
उन्होंने समुद्री परिवहन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए BRICS आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र बनाने का भी प्रस्ताव दिया। इसमें संकट के संकेत, चिकित्सा सहायता और आपात स्थिति में परिवारों तक जानकारी पहुंचाने जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आम लोगों के लिए व्यावहारिक लाभ से जोड़ना है।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच बनी सहमति
नई दिल्ली घोषणापत्र ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में संघर्ष और तनाव जारी हैं। BRICS नेताओं ने संघर्ष और परमाणु जोखिमों से पैदा होने वाले खतरों पर चिंता जताई तथा सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और सुरक्षा उपायों को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
BRICS के विस्तार के साथ समूह में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने अपनी चौथी BRICS अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए करीब 30 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

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