डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना लांच

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अमूल के 75 वें स्थापना वर्ष के मौके पर आयोजित एक समारोह के दौरान आणंद गुजरात में डेयरी सहकार योजना की शुरुआत की। डेयरी सहकार योजना का कुल परिव्यय 5000 करोड़ रुपये है। यह योजना सहकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा लागू की जाएगी। यह पहली बार है कि भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की साझेदारी में एनसीडीसी द्वारा डेयरी व्यवसाय के सभी पहलुओं से संबंधित सहकारी समितियों के लिए विशेष रूप से एक व्यापक योजना तैयार की गई है

डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर  बनाने  के लिए  5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना लांच

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अमूल के 75 वें स्थापना वर्ष पर आयोजित एक समारोह के दौरान आणंद  गुजरात में "डेयरी सहकार" योजना शुरू की है। डेयरी सहकार योजना का कुल परिव्यय 5000 करोड़ रुपये है। यह योजना सहकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा लागू की जाएगी।यह पहली बार है कि भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की साझेदारी में एनसीडीसी द्वारा डेयरी व्यवसाय के सभी पहलुओं से संबंधित सहकारी समितियों के लिए विशेष रूप से एक व्यापक योजना तैयार की गई है।

अमित शाह ने कहा कि हमें कृषि और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए इस सहकारी मॉडल को लागू करने की जरुरत है। एनसीडीसी द्वारा 5000 करोड़ रुपये की डेयरी सहकार योजना उसी दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि अमूल की स्थापना 1946 में आणंद में एक सहकारी आंदोलन के रूप में सरदार वल्लभ भाई पटेल और सहकारिता नेता त्रिभुवनदास पटेल के मार्गदर्शन में  हुई थी। शाह ने कहा कि अमूल दुनिया के लिए एक मॉडल है।  

इस योजना को प्रारंभ करने से पहले गुजरात के आणंद में दूध डेयरी सहकारी कंपनी अमूल के 75वें स्थापना वर्ष का उत्सव मनाने केलिए आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र और सहकारी समितियों की भारत को न केवल 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर की अर्थव्यवस्था में बदलने में बल्कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में भी प्रमुख भूमिका है।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने भी इसी तरह के विचारों को व्यक्त किया और सराहना की कि कैसे अमूल ने राज्य की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को को बढ़ावा देने में मदद की। उन्होंने कहा कि डेयरी भारत में सबसे बड़े कृषि-व्यवसायों में से एक है और भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैl उन्होंने डेयरी सहकार योजना तैयार करने के लिए केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के तहत सहकारी समितियों के लिए एक विशाल वित्तपोषण संगठन एनसीडीसी की सराहना की।

रूपाला ने कहा कि  डेयरी सहकार देश में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के मौजूदा प्रयासों का पूरक होगा। यह एनसीडीसी की ओर से केंद्र सरकार की विभिन्न उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाने वाला पहला और एकमात्र डेयरी केंद्रित व्यापक ढांचा है। डेयरी सहकार के अंतर्गत एनसीडीसी ने 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। पशुपालन एवं डेयरी जैसे केंद्र सरकार के अन्य मंत्रालयों के अभिसरण से इसे और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा । यह योजना सहकारिताओं द्वारा विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण क्रेडिट लिंकेज प्रदान करेगी।

एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक ने इस कार्यक्रम में बताया कि योजना को लाभार्थियों को लाभान्वित करने हेतु विभिन्न केंद्रीय योजनाओं को राज्य सरकारों, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन विकास एजेंसियों एवं अन्य के साथ समायोजित किया जाएगा। ऋण की अवधि 5-10 वर्षों के लिए होगी, जिसमें परियोजना के प्रकार और राजस्व स्रोत के आधार पर मूलधन के पुनर्भुगतान पर 1-2 वर्ष की स्थगन अवधि शामिल है। नायक ने यह भी कहा कि यह योजना शुरू में वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू की जाएगी । उन्होंने कहा कि पात्र सहकारिताओं द्वारा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता की कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, सहकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ,संचार राज्य मंत्री देवु सिंह चौहान और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव अतुल चतुर्वेदी भी उपस्थित थे। इस मौके पर सहकारिता मंत्रालय के सचिव देवेंद्र कुमार सिंह और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल भी उपल्थित थे। साथ ही अमूल के पदाधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथिगण  उपस्थित थे ।