दक्षिण अमेरिका में बढ़ी आपूर्ति और कमजोर मांग से 2026 की शुरुआत में वैश्विक तिलहन कीमतों पर दबाव

2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में वैश्विक तिलहन कीमतों में नरमी आई है। एक तो दक्षिण अमेरिका में आपूर्ति की संभावनाएं बेहतर हुई हैं, दूसरे मांग भी कमजोर रहने के संकेत हैं। ब्राजील में फसल की अच्छी हालात, सोयाबीन निर्यात कीमतों में गिरावट और वनस्पति तेलों की कमजोरी से बाजार का रुझान नकारात्मक रहा।

दक्षिण अमेरिका में बढ़ी आपूर्ति और कमजोर मांग से 2026 की शुरुआत में वैश्विक तिलहन कीमतों पर दबाव

वैश्विक तिलहन बाजारों पर 2025 के अंत और 2026 की शुरुआती अवधि में लगातार दबाव बना रहा। दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीदों और वैश्विक मांग को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। खास कर ब्राजील में अनुकूल मौसम के कारण सप्लाई अच्छी रहने के आसार हैं।

15 जनवरी को जारी अपनी ग्रेन मार्केट रिपोर्ट में इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल (IGC) ने कहा कि नवंबर के अंत के बाद से वैश्विक औसत सोयाबीन निर्यात कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिसमें दक्षिणी गोलार्ध के निर्यात केंद्रों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। यह गिरावट बेहतर फसल संभावनाओं और कमजोर मांग का परिणाम है।

IGC के अनुसार, शिकागो सोयाबीन स्पॉट फ्यूचर्स में तेज गिरावट आई। हाल के हफ्तों में चीन को हुई कुछ बिक्री से निर्यातकों को अस्थायी राहत मिली, लेकिन मध्यम अवधि की मांग को लेकर चिंताएं बनी रहीं। 2026 की शुरुआत में कुल निर्यात प्रतिबद्धताएं साल-दर-साल आधार पर लगभग 30% कम थीं, जिसका मुख्य कारण चीनी प्रोसेसरों की घटती खरीद रही।

ब्राजील में फसल की स्थिति ने भी कीमतों पर दबाव डाला। अधिकांश क्षेत्रों में अनुकूल मौसम के कारण दिसंबर से ही शुरुआती कटाई शुरू हो गई, जिससे बड़ी फसल की उम्मीद मजबूत हुई। सोया मील और सोया तेल बाजारों में कमजोरी ने भी नकारात्मक माहौल को और गहरा किया।

इन परिस्थितियों में अमेरिकी क्षेत्र से सोयाबीन के निर्यात मूल्य लगभग 6% गिरकर 425 डॉलर प्रति टन एफओबी पर आ गए। ब्राजील में स्पॉट कीमतें नवंबर के मध्य से करीब 10% गिरकर 405 डॉलर प्रति टन एफओबी के आसपास पहुंच गईं। अर्जेंटीना में भी निर्यात मूल्य लगभग 10% घटकर 400 डॉलर प्रति टन एफओबी रह गए।

अन्य तिलहनों में भी यही रुझान देखने को मिला। कनाडा में आईसीई कैनोला फ्यूचर्स में 3% की गिरावट दर्ज की गई, जिसका कारण प्रचुर आपूर्ति की संभावना और सोयाबीन बाजार की कमजोरी रही। वैंकूवर में कैनोला कीमतें 10 डॉलर घटकर 479 डॉलर प्रति टन एफओबी हो गईं, जबकि ऑस्ट्रेलिया के क्विनाना से निर्यात प्रस्ताव 20 डॉलर गिरकर 520 डॉलर प्रति टन एफओबी पर आ गए।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भी दिसंबर में वैश्विक वनस्पति तेल कीमतों में 0.2% की गिरावट की पुष्टि की, जिससे सूचकांक छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सोया, रेपसीड और सूरजमुखी तेल की कीमतों में गिरावट ने पाम ऑयल की मजबूती को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, पूरे 2025 के लिए वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 17% ऊंचा रहा।

इस बीच, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने 2025–26 मार्केटिंग वर्ष के लिए वैश्विक सोयाबीन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 42.57 करोड़ टन कर दिया है। इसमें ब्राजील और अमेरिका में बेहतर उत्पादन की अहम भूमिका है। अकेले ब्राजील का उत्पादन अनुमान 17.8 करोड़ टन तक बढ़ाया गया है।

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