कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र से मांगी 1,852 करोड़ रुपये की अंतरिम मदद, राज्य के 177 तालुका सूखे की चपेट में

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में सूखे से प्रभावित तालुका की संख्या बढ़कर 177 होने के बीच तत्काल राहत के लिए केंद्र से 1,852 करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता मांगी है। उन्होंने एसडीआरएफ की दूसरी किस्त का केंद्रीय हिस्सा पहले जारी करने का भी अनुरोध किया है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र से मांगी 1,852 करोड़ रुपये की अंतरिम मदद, राज्य के 177 तालुका सूखे की चपेट में
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सूखा राहत के लिए 1,852 करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता देने का आग्रह किया है। राज्य में सूखे से प्रभावित तालुका की संख्या बढ़कर 177 हो गई है। शिवकुमार ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान राज्य में बारिश की भारी कमी रही है। यह मानसून खरीफ फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि जलाशयों को भरने, जलविद्युत उत्पादन, चारे की उपलब्धता और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

बुधवार को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। राज्य ने इससे पहले खरीफ 2026 के सूखा ज्ञापन के तहत 101 सूखा प्रभावित तालुका के लिए तत्काल राहत उपायों के लिए 3,705.3 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी थी। इसके बाद सूखा प्रबंधन नियमावली, 2020 में निर्धारित मानकों के आधार पर 76 और तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश और मिट्टी में नमी की स्थिति लगातार खराब होने से 40 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल नुकसान हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से कावेरी बेसिन में जलाशयों में कम भंडारण को चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

शिवकुमार ने केंद्र से 3,705.3 करोड़ रुपये के ज्ञापन में मांगी गई राशि का 50 प्रतिशत यानी 1,852 करोड़ रुपये अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में जारी करने का अनुरोध किया है। यह राशि निर्धारित आकलन और मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने तक अंतरिम राहत के तौर पर मांगी गई है।

उन्होंने केंद्र से राज्य आपदा कोष (SDRF) की दूसरी किस्त में केंद्र के हिस्से को भी अग्रिम रूप से जारी करने का अनुरोध किया, ताकि राज्य सरकार के पास तत्काल राहत उपायों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस सहायता का इस्तेमाल फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति, पशुधन की सुरक्षा और अन्य जरूरी सूखा राहत उपायों के लिए किया जाएगा।

इस बीच, सूखे को लेकर राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया है। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और शिकारीपुरा विधायक बीवाई विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री से किसानों के 5 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ करने और प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेल्लद ने भी सूखे से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर सवाल उठाए। सूखे पर बहस के दौरान उन्होंने किसानों तक पहुंच रही सहायता को अपर्याप्त बताया और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।

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