नागौरी पान मेथी को मिला 'सामुदायिक किस्म' का राष्ट्रीय दर्जा, महिला किसानों की बड़ी उपलब्धि

राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को लंबे समय तक कसूरी मेथी के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब भारत सरकार ने इसे 'सामुदायिक किस्म' के रूप में राष्ट्रीय मान्यता दी है। महिला कृषक समुदाय को मिले इस पंजीकरण से नागौरी मेथी की पहचान बनेगी और किसानों के सामुदायिक अधिकार मजबूत होंगे। साथ ही GI टैग, ब्रांडिंग तथा निर्यात की दिशा में नए अवसर खुलेंगे।

नागौरी पान मेथी को मिला 'सामुदायिक किस्म' का राष्ट्रीय दर्जा, महिला किसानों की बड़ी उपलब्धि

राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने 'सामुदायिक किस्म (Community Variety)' के रूप में पंजीकृत कर राष्ट्रीय मान्यता प्रदान की है। यह प्रमाण-पत्र नागौर जिले की मूंडवा तहसील के महिला कृषक समुदाय को 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रदान किया गया। यह उपलब्धि स्थानीय महिला किसानों के पारंपरिक ज्ञान, सामुदायिक अधिकारों और राजस्थान की कृषि जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रमाण-पत्र मूंडवा क्षेत्र के महिला कृषक समुदाय की प्रतिनिधि एवं पूर्व प्रधान गीता देवी तथा उनकी सहयोगी महिला किसानों को PPV&FRA के अध्यक्ष डॉ. त्रिलाेचन महापात्र ने प्रदान किया। इस अवसर पर राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सी.आर. चौधरी, कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह, PPV&FRA बोर्ड सदस्य डॉ. सीमा शर्मा, ICAR-DKMA की निदेशक डॉ. अनुराधा अग्रवाल, रजिस्ट्रार जनरल डॉ. डी.के. अग्रवाल तथा साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी भी उपस्थित रहे।

सात दशक पुरानी खेती को मिली राष्ट्रीय पहचान

नागौरी पान मेथी, जिसे अब तक कसूरी मेथी के नाम से जाना जाता था, मेथी की एक विशिष्ट प्रजाति (Trigonella corniculata L.) है। इसकी खेती मुख्य रूप से राजस्थान के नागौर जिले में होती है। इसकी विशेष पहचान यहां की मिट्टी, जलवायु और किसानों के पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी है। इसकी सूखी पत्तियों से निकलने वाली प्राकृतिक और लंबे समय तक बनी रहने वाली सुगंध इसे अन्य मेथी किस्मों से अलग बनाती है।

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी ने बताया कि नागौर के किसान लगभग 70 वर्षों से पान मेथी की खेती कर रहे हैं। हालांकि इस फसल पर वैज्ञानिक अनुसंधान और किस्म सुधार का कार्य सीमित रहा है, लेकिन इसकी विशिष्ट सुगंध के कारण देश की प्रमुख मसाला कंपनियां वर्षों से अपने मसाला उत्पादों में इसका उपयोग करती रही हैं।

सर्वाधिक आय देने वाली मसाला फसलों में शामिल

नागौरी पान मेथी वर्तमान में करीब 7,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है। इसकी खेती मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में होती है। यह बहु-कटाई वाली पत्तेदार मसाला फसल है।

प्रत्येक कटाई के बाद प्रति एकड़ लगभग 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां प्राप्त होती हैं, जिससे किसानों को करीब 25,000 रुपये की आय होती है। एक सीजन में औसतन 10 कटाइयों के आधार पर किसान प्रति एकड़ 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं, जो अधिकांश पारंपरिक फसलों की तुलना में काफी अधिक है।

वर्ष 2024-25 में नागौर जिले में लगभग 30,000 मीट्रिक टन सूखी नागौरी पान मेथी का उत्पादन हुआ, जिससे किसानों को अनुमानित 450 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई।

वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों का सहयोग

नागौरी पान मेथी का सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण लगभग सात वर्षों के वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत सहयोग का परिणाम है। इस पहल का नेतृत्व साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर ने किया। इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की 'बायोटेक किसान हब' परियोजना के तहत शुरू किया गया था।

ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), अजमेर के सहयोग से इसकी वैज्ञानिक विशेषताओं, स्थानीय अनुकूलन और विशिष्ट गुणों का अध्ययन किया गया। बाद में नाबार्ड समर्थित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र (AEFC) के माध्यम से किसानों के साथ विस्तृत फील्ड अध्ययन, DUS परीक्षण और दस्तावेजीकरण किया गया। विस्तृत आवेदन 25 जून 2024 को PPV&FRA में जमा किया गया।

वैज्ञानिक एवं नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर 2 फरवरी 2026 को प्रकाशित Plant Variety Journal of India में नागौरी पान मेथी को मूंडवा (नागौर) के महिला कृषक समुदाय के नाम सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकृत किया गया।

यह उपलब्धि न केवल राजस्थान की कृषि विरासत एवं स्थानीय जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिला सशक्तिकरण तथा किसानों के सामुदायिक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक ऐतिहासिक मान्यता भी है।

मजबूत होंगे किसानों के सामुदायिक अधिकार 

इस पंजीकरण से नागौरी पान मेथी के नाम और बीज सामग्री के अनुचित उपयोग के खिलाफ किसानों के सामुदायिक अधिकार मजबूत होंगे। साथ ही इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट ब्रांड के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, इस मान्यता से बीज अधिनियम के तहत वैज्ञानिक बीज मानकों के विकास, FSSAI द्वारा अलग खाद्य गुणवत्ता मानकों के निर्धारण तथा DGFT द्वारा पृथक HSN कोड तय करने का रास्ता भी आसान होगा। यह पंजीकरण भविष्य में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य, व्यापक बाजार और निर्यात के नए अवसर मिल सकते हैं।

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