केंद्र के साथ सहमति के बाद पंजाब में गेहूं खरीद शुरू, आढ़तियों के साथ बैकफुट पर कैप्टन सरकार

 मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के मनाने पर आढ़तियों की हड़ताल ख़त्म होने से पिछले तीन दिन से पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया में आढ़तियों को उनके बकाया 131 करोड़ रुपए भी एफसीआई से जारी कराने का आश्वासन दिया गया है। मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य के खाद्य एवं सिविल आपूर्ति विभाग ने खरीद सम्बन्धी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है, जिससे किसानों को फ़सल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों को भी शामिल करने का प्रावधान होगा

केंद्र  के साथ सहमति के बाद  पंजाब में गेहूं खरीद शुरू, आढ़तियों के साथ बैकफुट पर कैप्टन सरकार
पंजाब की एक मंडी में गेहूं की खरीदारी की प्रक्रिया, फोटो- ट्विवटर

अनुराधा

चंडीगढ़ , 12 अप्रैल

किसानों को गेहूं की फसल का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में आढ़तियों की लॉबी के साथ खड़ी पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार भी बैक फुट पर आ गई है। 10 अप्रैल से शुरु हुई गेहूं की सरकारी खरीद से पहले हड़ताल की धमकी देने वाले आढ़तियों को सरकार ने ही हथियार डालने को कहा क्योंकि केंद्र सरकार सीधे भुगतान की प्रक्रिया लागू होने की स्थिति में ही सरकारी खरीद शुरू करने के फैसले पर अड़ गई थी। केंद्र ऐसा करता तो गेहूं की सरकारी खरीद की प्रक्रिया पटरी से उतर रखती थी, ऐसे में कैप्टन को किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ती। कैप्टन नहीं चाहते कि आढ़तियों की लॉबी के दबाव में किसानों की नाराजगी मोल ली जाए। पंजाब की कैप्टन सरकार केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के समर्थन में है और इसका लाभ कांग्रेस पार्टी को स्थानीय निकाय और नगर पंचायत परिषद चुनावों में भारी जीत के रूप में मिला है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के मनाने पर आढ़तियों की हड़ताल ख़त्म होने से पिछले तीन दिन से पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने खरीद प्रक्रिया में आढ़तियों को बढ़ चढ़ कर भाग लेने और उनके बकाया 131 करोड़ रुपए भी एफसीआई से जारी कराने का आश्वासन दिया गया है। मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य के खाद्य एवं सिविल आपूर्ति विभाग ने खरीद सम्बन्धी सॉफ्टवेयर में संशोधन कर दिया है, जिससे किसानों को फ़सल की अदायगी जारी करने की प्रक्रिया में आढ़तियों का सम्मिलन सुधारे गए रूप में ही सही, बनी ज़रूर रहेगी, जबकि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय के अनुसार किसानों को 72 घंटों में उनके बैंक खातों में अदायगी मिल जाएगी। 

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा है कि आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से बाहर रखने संबंधी भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद वह खरीद प्रक्रिया के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक मैं यहाँ हूँ, आप व्यवस्था का हिस्सा बने रहोगे और आपकी भूमिका हमेशा कायम रहेगी।’’ उन्होंने कहा कि वह यकीन दिलाते हैं कि एपीएमसी एक्ट के अंतर्गत आढ़तिया कमीशन और अन्य लागतें जारी रहेंगी।

भारत सरकार द्वारा सीधी अदायगी की प्रणाली को मुल्तवी करने के लिए राज्य सरकार की अपील को मानने से इनकार कर देने पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमने केंद्र से सख़्त लड़ाई लड़ी, परन्तु वह अड़े रहे और यहाँ तक कि सीधी अदायगी की प्रणाली को लागू न करने की सूरत में पंजाब से खरीद न करने की धमकी देने तक गए।’’

मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को 131 करोड़ रुपए की बकाया राशि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई.) का इंतज़ार किए बिना तुरंत जारी करने के हुक्म दिए, क्योंकि कुछ आढ़तियों द्वारा विवरण अपलोड न करने के कारण एफसीआई. ने यह राशि रोकी थी। उन्होंने कहा कि इन आढ़तियों को उस समय पर शायद ऐसे लोगों ने रोक दिया हो, जो राजनीति खेलना चाहते हों। उन्होंने कहा कि एफसीआई. से यह राशि अभी आनी है लेकिन उनकी सरकार इसका इंतज़ार किए बिना तुरंत जारी करेगी। मुख्यमंत्री ने आढ़तियों को भरोसा दिया कि उनकी सरकार एफसीआई. द्वारा लेबर की अदायगी में 30 फीसदी की कटौती का मुद्दा केंद्र सरकार के पास उठाएगी।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने फेडरेशन ऑफ आढ़तिया एसोसिएशन ऑफ पंजाब के प्रधान अपने बेहद करीबी विजय कालड़ा को हड़ताल खत्म करने का श्रेय देते हुए कहा कि हड़ताल वापस न होती तो किसानों को नुकसान बर्दाश्त करना पड़ता।

आढ़तियों की भूमिका को अहम बताते हुए कैप्टन ने कहा कि आढ़तिया प्रणाली तब भी चलती थी जब वह छोटे थे और अपने दादा जी के साथ मंडियों में जाते थे। उन्होंने आगे कहा कि यह बात समझ से बाहर है कि भारत सरकार इस प्रणाली को बर्बाद करने पर क्यों तुली हुई है, क्योंकि आढ़तिये कोई बिचौलिया नहीं हैं बल्कि सेवाएं प्रदान करते हैं और निजी क्षेत्र का कामकाज मौजूदा प्रणाली के साथ चल सकता है, इसलिए मौजूदा प्रणाली को बदले जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कालड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार, किसान आंदोलन खड़ा करने के लिए पंजाब को सज़ा देने पर तुली हुई है