अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्ति की ओर, शांति समझौते की घोषणा; होर्मुज स्ट्रेट सहित कई मुद्दों पर सहमति
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा समझौते पर सहमति बनने की खबर है। इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, 60 दिन के युद्धविराम विस्तार और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों पर आगे की वार्ता का रास्ता साफ हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा समझौते (फ्रेमवर्क डील) पर सहमति बनी है। मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि लंबी बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा की है।
इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर ईरान के साथ समझौते का ऐलान किया। ईरान की ओर से भी शांति समझौते पर सहमति बनने की पुष्टि की गई है। ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने इसे तेहरान की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस कूटनीतिक सफलता के लिए अमेरिका, ईरान और मध्यस्था में शामिल सभी पक्षों को बधाई दी है। समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), को फिर से खोल दिया जाएगा।
अमेरिकी नाकेबंदी हटाने का दावा
राष्ट्रपति नाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के डील हो चुकी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की अनुमति दे दी है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाने में मदद करेगा।

60 दिन के युद्धविराम पर सहमति
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 8 अप्रैल को लागू युद्धविराम को और 60 दिनों के लिए बढ़ाना है। इस अवधि में दोनों पक्ष किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई से परहेज करेंगे और व्यापक समझौते के लिए बातचीत जारी रखेंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार देर रात कहा कि अमेरिका और ईरान ने "लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति" की घोषणा की है।
फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष
यह युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के विभिन्न ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका समर्थित देशों को निशाना बनाया था।
लगातार बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में तेज वृद्धि से ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा था, जबकि ईरान की अर्थव्यवस्था अमेरिकी प्रतिबंधों और बंदरगाहों की नाकेबंदी से गंभीर संकट का सामना कर रही थी।
पूर्ण समाधान अभी दूर
यह समझौता युद्ध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच मौजूद मूल विवादों का पूर्ण समाधान नहीं हुआ है। अगले 60 दिनों के दौरान दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत, जमे हुए तेल राजस्व की रिहाई तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय के लिए परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पर प्रतिबंध स्वीकार करे, जबकि ईरान सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेशों में फंसी अपनी अरबों डॉलर की संपत्ति तक पहुंच बहाल करने की मांग कर रहा है।
कतर ने निभाई अहम भूमिका
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि समझौते तक पहुंचने के लिए कतर के मध्यस्थों ने तेहरान में लगभग 14 से 15 घंटे लंबी बातचीत कराई।
उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा सुझाए गए अंतिम संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का मसौदा अंतिम रूप दिया गया। गरीबाबादी ने कहा कि आगामी 60 दिनों की वार्ता में ईरान की प्राथमिकता सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना होगी।
यह समझौता पश्चिमी एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक व्यापार की राह आसान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर दोनों पक्ष कितनी प्रगति कर पाते हैं।

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