चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक इनपुट लागत, इस वर्ष खुदरा महंगाई 5% से ऊपर रहने का अंदेशा

पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के बाद कच्चे तेल, गैस, उर्वरक, तांबा और एल्युमीनियम की कीमतों में तेज उछाल से भारत का थोक मूल्य सूचकांक आधारित इनपुट-आउटपुट अनुपात चार वर्षों बाद 1.0 के ऊपर पहुंच गया है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती इनपुट लागत आने वाले महीनों में उपभोक्ता महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है।

चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची थोक इनपुट लागत, इस वर्ष खुदरा महंगाई 5% से ऊपर रहने का अंदेशा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक कमोडिटी और ऊर्जा कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने उद्योगों की इनपुट लागत को काफी बढ़ा दिया है। क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक कच्चे माल पर लगातार बढ़ता दबाव आने वाले महीनों में उपभोक्ता महंगाई को भी बढ़ा सकता है।

क्रिसिल की “क्विकोनॉमिक्स” रिपोर्ट में कहा गया है कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित इनपुट-आउटपुट अनुपात अप्रैल 2026 में लगभग चार वर्षों बाद 1.0 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। यह अनुपात लगातार 44 महीनों तक 1.0 से नीचे रहने के बाद 1.02 पर पहुंच गया। यह संकेत है कि अब उत्पादन लागत, तैयार उत्पादों की कीमतों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इनपुट कीमतों में महीने-दर-महीने 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि आउटपुट कीमतों में केवल 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कच्चे पेट्रोलियम पदार्थ, प्राकृतिक गैस, खनिज तेल, इस्पात, उर्वरक, प्लास्टिक, रसायन, सिंथेटिक रबर और गैर-लौह धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी लागत वृद्धि के प्रमुख कारण रहे। इससे पहले मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद इनपुट-आउटपुट अनुपात 1.0 से ऊपर गया था और तब यह स्थिति करीब पांच महीनों तक बनी रही थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2026 में कुल थोक महंगाई औसतन केवल 0.7 प्रतिशत रही, लेकिन प्रमुख औद्योगिक इनपुट की कीमतों में पहले से ही तेजी देखी जा रही थी। पिछले वित्त वर्ष में तांबे की कीमतों में औसतन 8.7 प्रतिशत और एल्युमीनियम में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो इनके दीर्घकालिक औसत से अधिक है।

महंगाई का दबाव अप्रैल 2026 से ही दिखने लगा है। थोक महंगाई मार्च के 3.9 प्रतिशत से बढ़कर पिछले महीने 8.3 प्रतिशत हो गई, जबकि गैर-खाद्य महंगाई (थोक) 4.7 प्रतिशत से बढ़कर 10.9 प्रतिशत पहुंच गई। इसी दौरान तांबे की कीमतों में 17.3 प्रतिशत, एल्युमीनियम में 20.6 प्रतिशत, कच्चे तेल आधारित उत्पादों में 49.3 प्रतिशत और गैस आधारित उत्पादों में 19.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

क्रिसिल ने चेतावनी दी कि भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुल जाए, लेकिन वैश्विक आपूर्ति व्यवधान और कमोडिटी कीमतों पर लगातार दबाव के कारण इनपुट लागत कुछ समय तक ऊंची बनी रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग मजबूत रहने के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), विशेष रूप से कोर महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, “लगातार 44 महीनों तक 1.0 से नीचे रहने के बाद इनपुट-आउटपुट अनुपात का इस स्तर को पार करना लागत के बढ़ते दबाव का संकेत है। ऊर्जा और अन्य इनपुट लागत में तेज वृद्धि का सामना कर रहे उत्पादकों के कारण आने वाले महीनों में कोर खुदरा महंगाई (CPI) बढ़ने की आशंका है। वर्तमान में हम वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई 5.1% रहने का अनुमान लगा रहे हैं, हालांकि इसके ऊपर जाने का जोखिम है, क्योंकि आने वाले समय में उद्योग बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं पर डालेंगे। सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और संभावित अल नीनो परिस्थितियों के बीच यदि मानसून में कोई बड़ी बाधा आती है, तो खाद्य महंगाई पर नया दबाव बन सकता है।”

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