अल नीनो से निपटने की तैयारियों में जुटा कृषि मंत्रालय, खरीफ 2026 के लिए जिलेवार रणनीति पर जोर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक लेकर समग्र कृषि क्षेत्र की समीक्षा की, अल नीनो से निपटने के लिए हर हफ्ते होगी बैठक

अल नीनो से निपटने की तैयारियों में जुटा कृषि मंत्रालय, खरीफ 2026 के लिए जिलेवार रणनीति पर जोर

संभावित अल नीनो प्रभाव और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक में देशभर की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और कम वर्षा वाले जिलों के लिए अग्रिम कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में कम बारिश या वर्षा की असमानता की आशंका है, उनकी पहले से पहचान कर राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी मौसमीय चुनौती की स्थिति में तुरंत वैकल्पिक फसल, तकनीकी सलाह और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

कृषि मंत्री ने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतरफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक जोखिमग्रस्त जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए।

उन्होंने उन 9-10 राज्यों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए जहां अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है। चिन्हित जिलों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और अन्य विस्तार तंत्र के साथ समन्वित बैठकें आयोजित की जाएंगी तथा किसानों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएंगे। 

बैठक में खरीफ 2026 के फसलवार लक्ष्य, बुवाई की प्रगति और राज्यवार तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती, उपयुक्त किस्मों के चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतरफसली खेती जैसे उपायों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया गया।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की समीक्षा करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार अरहर, उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए राज्यों के सहयोग से क्षेत्र विस्तार, बेहतर बीज उपलब्धता, फसल चक्र प्रबंधन और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

समीक्षा बैठक में उर्वरकों की उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों में जल भंडारण और राज्यवार स्टॉक की स्थिति पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और मानसून की प्रगति के साथ राज्यों एवं जिलों तक आपूर्ति व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को संभावित कमी वाले क्षेत्रों में अग्रिम आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

कृषि मंत्री ने दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम संबंधी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

 

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