FMD जैसे पशु रोगों का बढ़ता खतरा: FAO ने रोकथाम के उपाय और वैश्विक प्रयास बढ़ाने पर जोर दिया

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने सीमापार पशु रोगों के तेजी से बढ़ते खतरे को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी की है। संगठन ने कहा कि बर्ड फ्लू, अफ्रीकी स्वाइन फीवर, फुट-एंड-माउथ डिजीज और न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म जैसे रोग खाद्य सुरक्षा, व्यापार और करोड़ों लोगों की आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। FAO ने रोकथाम, निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।

FMD जैसे पशु रोगों का बढ़ता खतरा: FAO ने रोकथाम के उपाय और वैश्विक प्रयास बढ़ाने पर जोर दिया

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने दुनिया भर में तेजी से फैल रहे सीमापार पशु रोगों (Transboundary Animal Diseases - TADs) को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और देशों से रोकथाम, निगरानी तथा आपात प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने का आह्वान किया है।

FAO के अनुसार, न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म, अफ्रीकी स्वाइन फीवर, एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू), फुट-एंड-माउथ डिजीज (FMD) और पेस्टे दे पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) जैसे पशु रोगों के साथ-साथ निपाह, इबोला और एंडीज हंटावायरस जैसी उभरती जूनोटिक बीमारियां वैश्विक खाद्य सुरक्षा, व्यापार और करोड़ों लोगों की आजीविका के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं।

संगठन ने कहा कि पशुधन क्षेत्र दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों की आजीविका का आधार है और हर वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में खरबों डॉलर का योगदान देता है। ऐसे में पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल किसानों और पशुपालकों के लिए ही नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और ग्रामीण विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फुट-एंड-माउथ रोग (FMD) का बढ़ता खतरा  

हाल के घटनाक्रमों ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। दशकों तक सफल नियंत्रण के बाद न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म बीमारी अमेरिका में दोबारा सामने आई है। यह संक्रमण मध्य अमेरिका और मेक्सिको से उत्तर दिशा की ओर फैलते हुए अमेरिका तक पहुंचा है।

इसके अलावा, फुट-एंड-माउथ रोग का SAT1 सीरोटाइप, जो पहले मुख्य रूप से अफ्रीका तक सीमित था, अब एशिया, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में भी फैलने लगा है। FAO का कहना है कि ये घटनाएं दर्शाती हैं कि पशु रोग कितनी तेजी से सीमाएं पार कर सकते हैं और खाद्य उत्पादन तथा व्यापार के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।

अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान

FAO के आंकड़ों के अनुसार, एवियन इन्फ्लूएंजा के कारण अब तक 63.3 करोड़ से अधिक पोल्ट्री पक्षियों का नुकसान हो चुका है, जिससे 48 अरब डॉलर के बाजार पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, फुट-एंड-माउथ रोग हर वर्ष लगभग 11.3 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान पहुंचाता है। अफ्रीकी स्वाइन फीवर के चलते एशिया के कुछ हिस्सों में सूअरों की आबादी में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

बढ़ रहे हैं संक्रमण फैलने के कारण

FAO के मुताबिक, पशुओं, लोगों और उत्पादों की बढ़ती आवाजाही, बदलती उत्पादन प्रणालियां, पर्यावरणीय दबाव और कई देशों में पशु चिकित्सा एवं निगरानी तंत्र की कमजोरियां रोगों और कीटों के तेजी से प्रसार को बढ़ावा दे रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर निगरानी, समय रहते पहचान, सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

FAO के पशु उत्पादन एवं स्वास्थ्य प्रभाग के निदेशक तथा मुख्य पशु चिकित्सक टिएंसिन थानावत ने कहा, “इन रोगों का प्रभाव केवल पशु स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। ये कृषि उत्पादन, व्यापार और पर्यटन को प्रभावित करते हैं, आजीविका को नुकसान पहुंचाते हैं, खाद्य सुरक्षा के जोखिम बढ़ाते हैं और कुछ मामलों में मानव स्वास्थ्य के लिए भी सीधा खतरा पैदा करते हैं।”

रोकथाम सबसे प्रभावी उपाय

FAO की उप महानिदेशक बेथ बेकडोल ने कहा कि अनुभव बताता है कि किसी रोग के व्यापक रूप लेने के बाद उससे लड़ने की तुलना में पहले से तैयारी और रोकथाम करना कहीं अधिक प्रभावी और कम खर्चीला होता है। उन्होंने कहा कि पशु स्वास्थ्य प्रणालियों में निवेश से आजीविका की रक्षा, व्यापार को समर्थन, खाद्य सुरक्षा को मजबूती और कृषि-खाद्य प्रणालियों की लचीलापन बढ़ाने में मदद मिलती है।

वैश्विक कार्यक्रम की तैयारी

FAO ने बताया कि वह सदस्य देशों और साझेदार संस्थाओं के साथ मिलकर ‘ग्लोबल पार्टनरशिप प्रोग्राम फॉर ट्रांसबाउंडरी एनिमल डिजीजेज’ (GPP-TAD) विकसित कर रहा है। यह एक दीर्घकालिक कार्यक्रम होगा, जिसका उद्देश्य रोगों की समय रहते पहचान, प्रारंभिक चेतावनी, तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और रोकथाम को मजबूत बनाना है।

यह पहल विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग से की जा रही है। इसका लक्ष्य देशों की राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था विकसित करना और स्थानीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

 

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