मैंगो ड्रिंक्स में 22-25% आम का गूदा अनिवार्य करने की सिफारिश, कम पल्प वाले ड्रिंक्स पर अधिक जीएसटी लगाने का सुझाव

केंद्र सरकार की समिति ने आम आधारित पेयों में 22-25 प्रतिशत प्राकृतिक आम का गूदा अनिवार्य करने और इससे कम पल्प वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाने की सिफारिश की है। इस मसले पर हुई बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार नीतिगत, कर एवं बाजार सुधारों के जरिए तोतापुरी आम उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

मैंगो ड्रिंक्स में 22-25% आम का गूदा अनिवार्य करने की सिफारिश, कम पल्प वाले ड्रिंक्स पर अधिक जीएसटी लगाने का सुझाव

केंद्र सरकार की तरफ से गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने आम आधारित पेय (मैंगो ड्रिंक्स) में 22-25 प्रतिशत प्राकृतिक आम का गूदा अनिवार्य करने तथा इससे कम गूदा वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य तोतापुरी आम की मांग बढ़ाना, किसानों को बेहतर कीमत दिलाना और उपभोक्ताओं को अधिक पौष्टिक फल-आधारित पेय उपलब्ध कराना है।

इन सिफारिशों पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विचार किया। बैठक में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को इस वर्ष कम कीमत मिलने के कारणों और समाधान पर चर्चा की गई।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस वर्ष तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट का एक प्रमुख कारण आम आधारित पेयों में प्राकृतिक आम के गूदे का कम उपयोग, प्रसंस्करण क्षमता और खरीद व्यवस्था में समय पर समन्वय का अभाव तथा वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव रहा है।

समिति ने सुझाव दिया कि 22-25 प्रतिशत या उससे अधिक प्राकृतिक आम का गूदा वाले पेय को ही 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर का लाभ मिले, जबकि इससे कम पल्प वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाया जाए। समिति का मानना है कि इससे उद्योग में तोतापुरी आम के गूदे की खपत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक पेय मिलेंगे।

इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यक मानकों और कर ढांचे पर सहमति बनाई जा सके।

समिति ने तोतापुरी आम की मूल्य श्रृंखला को स्थिर बनाने के लिए केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने की भी सिफारिश की है। यह समिति हर आम सीजन से पहले उत्पादन, प्रसंस्करण, निर्यात, लागत और बाजार की समीक्षा कर किसानों के लिए लाभकारी खरीद मूल्य तथा आम के गूदे का संदर्भ मूल्य तय करने में मदद करेगी।

रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के पुराने हो चुके तोतापुरी बागों के टॉप-वर्किंग तकनीक से कायाकल्प की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत मौजूदा पेड़ों पर अल्फांसो, बांगनपल्ली, नीलम और हिमायत जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों की कलम लगाकर दो से तीन वर्षों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP), प्रदर्शन उद्यान और किसानों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया है।

समिति ने फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए फ्रूट बैग उपलब्ध कराने, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रसंस्करण उद्योग के सहयोग से क्षेत्रवार खरीद एवं प्रसंस्करण योजना तैयार करने तथा आंध्र प्रदेश में पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए हर वर्ष 15 मई से खरीद और पल्प उत्पादन शुरू करना अनिवार्य करने की भी सिफारिश की है।

इसके अलावा, आईसीएआर द्वारा विकसित तकनीकों के आधार पर आम की गुठली से 'मैंगो बटर' और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बल दिया गया।

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह रिपोर्ट केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीति, प्रौद्योगिकी और बाजार तीनों स्तरों पर ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जीएसटी, खाद्य सुरक्षा मानकों, निर्यात रणनीति और राज्यों की नीतियों में समन्वय स्थापित कर तोतापुरी आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को किसान-केंद्रित बनाएगी। मंत्री ने विश्वास जताया कि इन सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी तथा वैश्विक बाजार में भारतीय आम की पहचान और मजबूत होगी।

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