खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्र के लिए चीन ने बनाया फाइनेंसिंग का नया ढांचा, बदल सकती है खाद्य आयात रणनीति
चीन ने 2030 तक कृषि वित्तपोषण का नया ढांचा पेश किया है, जिसमें सरकारी सहायता, बैंक ऋण, बीमा, बॉन्ड और निजी निवेश को जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, अनाज उत्पादन, कृषि तकनीक और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। यह रणनीति चीन की भविष्य की कृषि आयात जरूरतों को प्रभावित कर सकती है।
चीन ने कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मजबूत करने के लिए वर्ष 2030 तक एक व्यापक वित्तपोषण ढांचा पेश किया है। इसमें सरकारी खर्च, बैंक ऋण, कृषि बीमा, बॉन्ड और निजी निवेश को एक समन्वित रणनीति के तहत जोड़ा गया है। यह पहल कृषि आधुनिकीकरण और तकनीकी विकास को गति देने के साथ देश की खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को कम करने पर केंद्रित है।
छह सरकारी विभागों द्वारा सोमवार, 7 सितंबर को जारी किए गए इस ढांचे में कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों को सरकारी बजट में प्राथमिकता देने तथा प्रमुख अनाज उत्पादक क्षेत्रों के लिए वित्तीय मदद बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। स्थानीय सरकारों को ग्रामीण बुनियादी ढांचे, कृषि उद्योगों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए विशेष और सामान्य बॉन्ड से प्राप्त राशि का उपयोग करने की भी अनुमति दी जाएगी।
इस पहल का लक्ष्य 2030 तक कृषि क्षेत्र में एक अधिक टिकाऊ, प्रभावी और समन्वित निवेश व्यवस्था तैयार करना है। चीन केवल सरकारी वित्तपोषण पर निर्भर रहने के बजाय वित्तीय संस्थानों और निजी पूंजी के साथ सरकारी संसाधनों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश क्षमता बढ़ाना चाहता है।
बैंक ऋण को मिलेगा बढ़ावा
इस रणनीति में बैंक ऋण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वित्तीय संस्थानों को प्रमुख अनाज और बीज उत्पादक क्षेत्रों में ऋण बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ऋण का इस्तेमाल अनाज उत्पादन, खाद्य आपूर्ति सुरक्षा, ग्रामीण उद्योगों, बुनियादी ढांचे और कृषि प्रौद्योगिकी में इनोवेशन के लिए किया जाएगा।
यह ढांचा किसानों और कृषि व्यवसायों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता भी बढ़ा सकता है। इसके तहत पशुधन, कृषि मशीनरी, कृषि सुविधाओं और वेयरहाउस रसीदों जैसी परिसंपत्तियों को ऋण के लिए गारंटी या जमानत के रूप में इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ऐसी कृषि परिसंपत्तियों को वित्तीय संसाधनों में बदलने की संभावना बढ़ेगी, जिनका पारंपरिक रूप से ऋण हासिल करने में सीमित उपयोग होता रहा है।
कृषि बीमा का विस्तार
कृषि बीमा भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। चीन चावल, गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों के लिए पूर्ण लागत और फसल आय आधारित बीमा का विस्तार करेगा। साथ ही कृषि ऋण लेने वालों के लिए ऋण गारंटी और जोखिम-साझेदारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि वित्तीय जोखिम कम हो सके।
योजना में ग्रामीण पुनरोद्धार कोष और अन्य बाजार आधारित माध्यमों के जरिए निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। पात्र कृषि कंपनियों के लिए बॉन्ड जारी करने और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के अवसर बढ़ाए जाएंगे। ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट जैसे वित्तीय साधनों के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्रामीण सामूहिक संस्थाओं को भूमि, परिसंपत्तियों और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके तहत रिन्यूएबल ऊर्जा परियोजनाओं के लिए कारोबारी संस्थाओं के साथ साझेदारी की जा सकती है। ग्रामीण निवेश परियोजनाओं और संबंधित वित्तीय संसाधनों की निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
वैश्विक कृषि व्यापार पर असर
चीन की इस वित्तपोषण पहल का असर उसके घरेलू कृषि क्षेत्र से कहीं आगे तक जा सकता है। बीजिंग ने हाल के वर्षों में खाद्य सुरक्षा, अनाज उत्पादन, तिलहन आपूर्ति और कृषि प्रौद्योगिकी को रणनीतिक प्राथमिकता बनाया है। भू-राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच चीन घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आयात पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
हालांकि, अधिक आत्मनिर्भरता का अर्थ चीन का कृषि क्षेत्र पूरी तरह आयात मुक्त होना नहीं है। देश का विशाल पशुधन, चारा और खाद्य उद्योग अब भी बड़ी मात्रा में कृषि जिंसों के आयात पर निर्भर है। हाल के अमेरिकी निर्यात आंकड़ों में भी चीन के लिए सोयाबीन की बिक्री जारी रहने की पुष्टि हुई है।
ऐसे में अमेरिका, ब्राजील और अन्य कृषि निर्यातक देशों के लिए चीन की यह नई नीति महत्वपूर्ण है। घरेलू उत्पादकता में वृद्धि, बेहतर बीज, व्यापक कृषि बीमा और मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचा भविष्य में चीन की उत्पादन लागत और आयात संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।

Join the RuralVoice whatsapp group



















