मानसून की कमी गहराने के साथ दक्षिणी राज्यों में तेज हुई सूखा राहत की मांग

दक्षिण भारत में बारिश की कमी बढ़ने के साथ सूखा घोषित करने और किसानों को राहत देने की मांग तेज हो गई है। महाराष्ट्र में प्रभावित किसानों के मुआवजे की मांग है, जबकि आंध्र प्रदेश में CPI(M) ने देरी न करते हुए तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। कर्नाटक में किसान 28 सितंबर को प्रदर्शन करेंगे।

मानसून की कमी गहराने के साथ दक्षिणी राज्यों में तेज हुई सूखा राहत की मांग

दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बारिश की भारी कमी के बीच महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में सूखा घोषित करने और किसानों को मुआवजा देने की मांग तेज हो गई है। यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो गई है। इससे फसल नुकसान, ग्रामीण आय, पशुधन और रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 20 सितंबर के आकलन के अनुसार, देश में मानसूनी बारिश की कुल कमी 15 प्रतिशत रही। दक्षिणी प्रायद्वीप में यह कमी सबसे अधिक 28 प्रतिशत रही। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश 26 प्रतिशत कम रही, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 9 प्रतिशत और मध्य भारत में 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। सूखा निगरानी पोर्टल के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बड़े हिस्से में बारिश की भारी कमी है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश भी बारिश की कमी से प्रभावित हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापसी शुरू कर दी है। बारिश की बढ़ती कमी के बीच अब औपचारिक सूखा मानदंड पूरा होने का इंतजार किए बिना तत्काल राहत देने की मांग उठ रही है।

आंध्र प्रदेश में सूखा घोषित करने की CPI(M) की मांग

आंध्र प्रदेश में CPI(M) ने तत्काल सूखा प्रभावित मंडलों की घोषणा करने और किसानों, पट्टेदार किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। CPI(M) के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने रविवार को विजयवाड़ा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि गंभीर अल नीनो की चेतावनी के बाद स्थिति लगातार बिगड़ती गई है। उन्होंने कहा कि वाम दलों ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों, कृषि मजदूरों और पट्टेदार किसानों की समस्याओं को सामने लाया है।

पार्टी के अनुसार, किसान, कृषि मजदूर और पट्टेदार किसान संगठनों ने 21 सितंबर से विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जबकि राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित मंडलों की घोषणा 1 अक्टूबर को करने की बात कही है। राव ने कहा कि सरकार को हालात और बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

राव ने कहा कि करीब 50 लाख एकड़ में फसल बोई गई है, लेकिन 20 लाख एकड़ में भी उत्पादन मिलने की संभावना कम है। CPI(M) ने किसानों की कर्ज माफी, मनरेगा के तहत 200 दिनों के रोजगार और सरकार द्वारा तय कम से कम 2,310 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग की है। पार्टी ने सूखे से प्रभावित प्रत्येक पट्टेदार किसान परिवार को 7.5 लाख रुपये मुआवजा देने और पशुओं के लिए चारा केंद्र स्थापित करने की भी मांग की है।

CPI(M) ने केंद्र सरकार से सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 1 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने की मांग की है। राव ने यह भी सवाल उठाया कि निवेश आकर्षित करने के लिए देशभर में दौरा कर रहे मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्री एन. लोकेश क्या सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर संकट से जूझ रहे किसानों से मिल सकते हैं।

कर्नाटक में 28 सितंबर को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी

कर्नाटक में कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य विधानसभा का विशेष सत्र सूखे के संकट का समाधान करने में विफल रहता है, तो 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे। KRRS नेता बी. नागेंद्र ने रविवार को मैसूरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसान विभिन्न जिलों में उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सार्वजनिक स्थानों पर जनप्रतिनिधियों के मिलने पर उनका घेराव भी करेंगे।

राज्य विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र 21 सितंबर से बेंगलुरु में शुरू हुआ है। नागेंद्र ने विशेष सत्र बुलाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यदि इससे गंभीर सूखे से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। कर्नाटक सरकार ने मौजूदा सूखे को राज्य में 140 वर्षों में सबसे गंभीर बताया है।

नागेंद्र ने सूखे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की कथित उपेक्षा की आलोचना की और कहा कि अधिकारी सूखे के आकलन के लिए पुराने मानदंडों पर निर्भर कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर सूखा प्रभावित लोगों को राहत दे।

KRRS ने किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए कहा कि इसका खर्च केंद्र और राज्य सरकार को 50:50 के अनुपात में साझा करना चाहिए। उसने बैंकों से कर्ज वसूली रोकने की भी मांग की। संगठन ने कृषि को प्राथमिकता देने और कृषि पंप सेटों के लिए कम से कम सात घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने तालाबों और झीलों को भरने, फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने और बीमा कंपनियों से फसल नुकसान का पूरा मुआवजा किसानों के बैंक खातों में जमा कराने की मांग की है।

महाराष्ट्र में पवार ने मांगा 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राज्य में तत्काल सूखा घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने लंबे समय से बारिश की कमी और किसानों की बढ़ती परेशानी का हवाला दिया। पवार ने कहा कि गंभीर स्थिति वाले तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर बिना देरी राहत उपाय लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने प्रभावित किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और प्रत्येक कृषि मजदूर परिवार को 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने की मांग की।

राज्य के अकोला में रविवार को तीन किसानों को उस समय हिरासत में ले लिया गया, जब उन्होंने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने को सोयाबीन के पौधे सौंपने की कोशिश की। बारिश की कमी के कारण क्षेत्र में सोयाबीन की फसल को हुए नुकसान की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए तीनों किसान अपने साथ सोयाबीन के पौधे लेकर बैठक में पहुंचे थे। किसानों का यह प्रदर्शन अकोला जिले में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को हुए नुकसान और किसानों की स्थिति को लेकर था। उन्होंने जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों के लिए राहत उपाय लागू करने की मांग की।

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