एफसीआई के चावल और खराब अनाज से इथेनॉल उत्पादन की मात्रा सीमित, मक्का की मांग बढ़ने के आसार
गन्ना आधारित इथेनॉल की खरीद बंद करने के बाद केंद्र सरकार ने एफसीआई के अतिरिक्त चावल और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन की मात्रा भी सीमित कर दी है। इससे 2026-27 में मक्का की मांग बढ़ने तथा पोल्ट्री, पशु आहार व स्टार्च उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को इस साल बड़ा झटका लग सकता है। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने गन्ना आधारित इथेनॉल की खरीद बंद करने के बाद अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन की मात्रा भी सीमित कर दी है। इससे इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का पर निर्भरता बढ़ने की संभावना है। इसका असर पोल्ट्री, पशु आहार और स्टार्च उद्योगों पर पड़ सकता है, जो पहले से ही मक्का की ऊंची कीमतों से जूझ रहे हैं।
तेल कंपनियों की ओर से इथेनॉल खरीद के लिए 3 नवंबर को जारी संशोधित टेंडर शर्तों के अनुसार, इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 की पहली तीन तिमाहियों में एफसीआई के अतिरिक्त चावल से उत्पादित इथेनॉल का अधिकतम 324 करोड़ लीटर आवंटित किया जाएगा।
संशोधित टेंडर के मुताबिक, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के लिए एफसीआई से खरीदे गए 72 लाख टन अतिरिक्त चावल का आवंटन 30 जून 2027 तक किया गया है, जिससे 324 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। प्रत्येक तिमाही में एफसीआई के चावल से अधिकतम 108 करोड़ लीटर इथेनॉल का आवंटन किया जा सकेगा।
उत्पादकों पर 30 फीसदी की सीमा भी लागू
तेल कंपनियों ने प्रत्येक डिस्टिलरी द्वारा एफसीआई के चावल से उत्पादित इथेनॉल की हिस्सेदारी पर भी 30 फीसदी की सीमा लगा दी है। यानी किसी डिस्टिलरी की ओर से एक तिमाही में पेश किए जाने वाले कुल इथेनॉल में एफसीआई के अतिरिक्त चावल से उत्पादित इथेनॉल की हिस्सेदारी 30 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती।
यदि सभी डिस्टिलरियों की ओर से निर्धारित सीमा से अधिक प्रस्ताव आते हैं तो तेल कंपनियां सभी पात्र बोलीदाताओं के आवंटन में आनुपातिक आधार पर कटौती करेंगी। इससे प्रत्येक तिमाही के लिए निर्धारित कुल सीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से 160 करोड़ लीटर इथेनॉल की सीमा
क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से इथेनॉल उत्पादन के लिए सरकार ने 160 करोड़ लीटर की अधिकतम वार्षिक सीमा निर्धारित की है, जो कुल टेंडर मात्रा का 14.5 फीसदी है। इसके तहत प्रत्येक तिमाही में अधिकतम 40 करोड़ लीटर इथेनॉल का आवंटन किया जाएगा।
इस प्रकार एफसीआई के चावल और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न से कुल मिलाकर अधिकतम 484 करोड़ लीटर इथेनॉल का आवंटन हो सकेगा। यह तेल कंपनियों द्वारा 2026-27 के लिए जारी 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल के कुल टेंडर का करीब 44 फीसदी है। शेष मांग को मक्का और अन्य वैकल्पिक फीडस्टॉक से पूरा करना होगा।
गन्ना आधारित फीडस्टॉक पर पहले ही रोक
देश में चीनी उत्पादन की कमजोर स्थिति के मद्देनजर पिछले महीने सरकार ने गन्ना आधारित फीडस्टॉक से उत्पादित इथेनॉल की खरीद बंद करने का फैसला किया था। हालांकि, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत में इसे गन्ना किसानों और चीनी मिलों की आय बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
तेल कंपनियों ने 16 अक्टूबर को जारी 2026-27 के इथेनॉल खरीद टेंडर में गन्ने के रस, चीनी सिरप, चीनी और बी-हेवी शीरे से उत्पादित इथेनॉल की खरीद के लिए कोई प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किया था। गन्ना आधारित इन फीडस्टॉक से उत्पादित इथेनॉल की खरीद पर यह रोक 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक लागू रहेगी।
हालांकि, सी-हेवी शीरे से इथेनॉल उत्पादन की अनुमति जारी है। सी-हेवी शीरा चीनी निकालने के बाद बचने वाला गन्ने का उप-उत्पाद है।
मक्का की मांग बढ़ने का अनुमान
गन्ना आधारित इथेनॉल पर रोक के बाद अब चावल से इथेनॉल उत्पादन की मात्रा सीमित किए जाने से मक्का की मांग बढ़ने की संभावना है। मक्का की बढ़ती मांग पोल्ट्री और पशु आहार उद्योग के लिए चिंता का विषय बन सकती है। मक्का इन उद्योगों के लिए प्रमुख कच्चा माल है। इसके अलावा स्टार्च उद्योग में भी इसकी बड़ी खपत होती है।
देश की प्रमुख मंडियों में मक्का की कीमतें लगभग 29-30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं, जबकि 2026-27 के लिए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 रुपये प्रति क्विंटल यानी 24 रुपये प्रति किलो है। आने वाले महीनों में इथेनॉल उत्पादकों और पशु आहार उद्योग के बीच मक्का की उपलब्धता को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
मक्का की उपलब्धता को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि इस साल कमजोर मानसून के कारण देश के कई राज्यों में फसल प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार के सामने खाद्य सुरक्षा और इथेनॉल उत्पादन की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
इसी महीने सरकार ने मक्का आधारित इथेनॉल का खरीद मूल्य भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर था। इससे डिस्टिलरी की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा है।
E20 लक्ष्य के सामने नई चुनौती
भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया था। लेकिन गन्ना आधारित इथेनॉल की खरीद नहीं करने और चावल से इथेनॉल उत्पादन की सीमा तय होने के बाद इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की रणनीति में बदलाव के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
सरकार को एक तरफ देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखते हुए इसकी कीमतों को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी तरफ इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों को भी पूरा करना है। इन दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी अब काफी हद तक मक्का और अन्य अनाज आधारित फीडस्टॉक पर आ गई है।

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