क्रूड ऑयल की कीमत घटकर युद्ध से पहले के स्तर पर आई, लेकिन एलएनजी के दाम अब भी ऊंचे
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावनाओं से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में राहत देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर युद्ध-पूर्व स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डब्लूटीआई क्रूड और भारतीय बास्केट अब भी पहले के मुकाबले महंगे हैं। चीन की कमजोर मांग भी तेल कीमतों में गिरावट का कारण बनी है। दूसरी ओर, प्राकृतिक गैस और एलएनजी की कीमतें अभी ऊंची बनी हुई हैं, हालांकि होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य स्थिति बहाल होने और कतर से उत्पादन बढ़ने पर आने वाले महीनों में गैस बाजार में स्थिरता और कीमतों में नरमी की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत अब युद्ध से पहले के स्तर पर आ गई है। हालांकि अमेरिका का डब्लूटीआई क्रूड अब भी युद्ध से पहले की तुलना में महंगा है। भारत कई देशों से कच्चा तेल खरीदता है और भारतीय बास्केट की कीमत भी युद्ध से पहले के मुकाबले अधिक है। प्राकृतिक गैस की कीमत भी अभी ऊंची बनी हुई है।
ऑयल प्राइस डॉट कॉम पर उपलब्ध दरों के अनुसार ब्रेंट क्रूड का दाम 25 जून को 72.54 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया जबकि युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को यह 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर था। युद्ध के दौरान 4 मई को यह 114.44 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। उससे एक दिन पहले, 27 फरवरी को डब्लूटीआई का रेट 67 डॉलर प्रति बैरल था। यह 25 जून को 69.47 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। युद्ध के दौरान यह 6 अप्रैल को 112.41 डॉलर पर पहुंच गया था।
जहां तक भारतीय बास्केट की बात है तो 26 फरवरी को इसकी औसत कीमत 70.86 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अभी 75.28 डॉलर प्रति बैरल है। ऑयल प्राइस डॉट कॉम के अनुसार इसकी कीमत 23 मार्च को 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का एक और कारण चीन से घटती मांग है। स्टैनचार्ट के अनुसार, मई में उसने 78.2 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात किया। यह फरवरी 2018 के बाद सबसे कम है।
कच्चे तेल के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में अब भी तेजी बनी हुई है। इसके दाम 3.28 डॉलर के आसपास चल रहे हैं। युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को इसकी कीमत 2.87 डॉलर थी। हालांकि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद इसके दाम में भी गिरावट की उम्मीद की जा रही है।
गैस निर्यातक देशों के फोरम (जीईसीएफ) के प्रमुख फिलिप मशेलबिला ने ग्लोबल एनर्जी फोरम में कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट खुला रहता है तो अगली तिमाही में एलएनजी बाजार में स्थिरता आ सकती है। वर्ष की अंतिम तिमाही में एलएनजी उत्पादन और निर्यात युद्ध के पहले के स्तर तक पहुंच सकता है। इससे गैस के दाम भी कम होंगे। जीसीसीएफ के सदस्य देश दुनिया का 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का उत्पादन करते हैं।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के दौरान ईरान ने कतर के एलएनजी हब रास लाफान पर हमला किया था, जिससे वहां उत्पादन ठप पड़ गया और निर्यात रुक गया। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने बुधवार को कहा कि अगले कुछ हफ्तों में क्षतिग्रस्त प्लांट को छोड़कर बाकी जगहों पर उत्पादन सामान्य हो जाएगा।
युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आवागमन पर भी रोक लगा दी थी। कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने पिछले हफ्ते बताया कि होर्मुज में आवाजाही सामान्य होने के बाद एक महीने के भीतर वह 50 प्रतिशत उत्पादन क्षमता हासिल कर सकती है। दो महीने के भीतर 80 प्रतिशत उत्पादन का स्तर हासिल किया जा सकता है।

Join the RuralVoice whatsapp group















