बढ़ती खाद्य और ईंधन कीमतों का असर, मई में खुदरा महंगाई 3.93% पर पहुंची

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच खाद्य महंगाई और ईंधन कीमतों में कई दौर की बढ़ोतरी के कारण मई 2026 में खुदरा महंगाई 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि खुदरा महंगाई अब भी आरबीआई के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे में है, लेकिन संभावित कमजोर मानसून के जोखिमों को देखते हुए इसके बढ़ने की आशंका है।

बढ़ती खाद्य और ईंधन कीमतों का असर, मई में खुदरा महंगाई 3.93% पर पहुंची

मई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य और ईंधन कीमतों में तेज वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे। हालांकि लगातार बढ़ोतरी के बावजूद उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) लगातार 16वें महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से नीचे है।

शुक्रवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में दर्ज 3.48 प्रतिशत की तुलना में मई में खुदरा महंगाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मई का आंकड़ा भारत की संशोधित सीपीआई श्रृंखला के तहत अब तक का सबसे ऊंचा महंगाई स्तर भी है। नई श्रृंखला के आंकड़े जनवरी 2026 से उपलब्ध हैं जिसमें 2024 को आधार वर्ष बनाया गया है।

2026 में खुदरा महंगाई का रुझान

नए आधार वर्ष (2024) वाली श्रृंखला के अनुसार वर्ष के पहले पांच महीनों में उपभोक्ता महंगाई लगातार बढ़ती रही है:

जनवरी 2026 : 2.74%
फरवरी 2026 : 3.21%
मार्च 2026 : 3.40%
अप्रैल 2026 : 3.48%
मई 2026 : 3.93%

आरबीआई को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की पांच वर्षीय अवधि के लिए 4 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य बनाए रखने का दायित्व दिया गया है। इसके लिए 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत का दायरा निर्धारित है। हालांकि उभरती व्यापक आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए केंद्रीय बैंक ने हाल ही वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने महंगाई अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा में यह अनुमान 4.6 प्रतिशत रखा गया था।

टमाटर की कीमतों में जबरदस्त उछाल, आलू सस्ता बना रहा

मई में समग्र महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि रही। भारत में खाद्य महंगाई अप्रैल के 4.20 प्रतिशत से बढ़कर मई में 4.78 प्रतिशत हो गई, जो रसोई में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का संकेत है।

सब्जियों की श्रेणी में कीमतों का रुझान काफी अलग-अलग रहा। टमाटर की महंगाई में भारी उछाल देखने को मिला और यह अप्रैल के 35.26 प्रतिशत से बढ़कर मई में 48.43 प्रतिशत पर पहुंच गई। दूसरी ओर आलू की महंगाई गहरे नकारात्मक क्षेत्र में बनी रही। मई में आलू महंगाई दर -23.71 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल में यह -23.66 प्रतिशत थी।

खाद्य कीमतों में यह अचानक तेजी ऐसे समय आई है जब पिछले काफी समय से खाद्य महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित थी। इससे भारत के कृषि परिदृश्य को लेकर नई चिंताएं पैदा हुई हैं, विशेषकर आगामी मानसून को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच।

ईंधन मूल्य वृद्धि से बढ़ी परिवहन लागत

घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों में कई दौर की बढ़ोतरी ने भी देश में महंगाई का दबाव बढ़ाया। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मई में कई बार खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि की, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत सीधे प्रभावित हुई। इसके परिणामस्वरूप परिवहन महंगाई अप्रैल में दर्ज -0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट से उबरकर मई में 1.75 प्रतिशत पर पहुंच गई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर तेजी से मालभाड़े और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किरायों में दिखाई देने लगा है।

विशेषज्ञों की नजर में महंगाई के संकेत

सीपीआई आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, "मई में सीपीआई महंगाई बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जिसका कारण खाद्य और गैर-खाद्य दोनों श्रेणियों में व्यापक मूल्य दबाव रहा। हालांकि गैर-खाद्य श्रेणी का योगदान अधिक महत्वपूर्ण रहा। कुल महंगाई में खाद्य महंगाई का योगदान लगभग 170 बेसिस पॉइंट रहा, जबकि गैर-खाद्य महंगाई का योगदान लगभग 230 बीपीएस है।"

उन्होंने कहा कि उत्पादकों की बढ़ती लागत, जो अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक के 8.3 प्रतिशत स्तर से स्पष्ट है, अब उपभोक्ता कीमतों में भी दिखाई देने लगी है। जून में पश्चिम एशिया संघर्ष चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसका असर अब घरेलू बजटों पर पड़ने लगा है। उन्होंने आगे कहा कि मई में खाद्य महंगाई 4.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई क्योंकि लगातार ऊंचे तापमान के कारण सब्जियों, डेयरी उत्पादों और अंडों की कीमतों में वृद्धि हुई।

गैर-खाद्य महंगाई भी अप्रैल के 3.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.5 प्रतिशत हो गई। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सीपीआई पर पड़ने वाले अनुमानित 36 बेसिस पॉइंट के प्रभाव का एक हिस्सा पहले ही दिखाई दे रहा है, शेष प्रभाव जून में देखने को मिल सकता है। ऊर्जा और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से कोर महंगाई पर भी दबाव के संकेत मिल रहे हैं।

देशपांडे ने कहा, "क्रिसिल को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में औसत खुदरा महंगाई बढ़कर 5.1 प्रतिशत रहेगी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 2.0 प्रतिशत थी। ऊंची ईंधन कीमतें, मुद्रा अवमूल्यन, दूसरे चरण के महंगाई प्रभाव और संभावित कमजोर वर्षा इसके प्रमुख जोखिम हैं। भारतीय रिजर्व बैंक संभवतः इन आपूर्ति-पक्षीय झटकों को अस्थायी मानते हुए महंगाई अपेक्षाओं पर करीबी नजर बनाए रखेगा।"

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