एग्रीफूड इकोनॉमी में कैसे बढ़ रही है गैर-बैंक ऋण की भूमिका

भारत की एग्रीफूड अर्थव्यवस्था में NBFC, फिनटेक और अन्य गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ये कृषि मूल्य शृंखला में तेज, लचीला और जरूरत के अनुरूप वित्त उपलब्ध करा रहे हैं। वेयरहाउस रसीद ऋण से किसानों को लाभ मिल रहा है, जबकि FPOs, प्रोसेसर और निर्यातकों की कार्यशील पूंजी जरूरतें भी पूरी हो रही हैं।

एग्रीफूड इकोनॉमी में कैसे बढ़ रही है गैर-बैंक ऋण की भूमिका

पांच मिनट। आर्या.एजी (Arya.ag) के किसी गोदाम में पहुंचने के बाद एक किसान का ऋण मंजूर होने में बस इतना ही समय लगता है। यह समय भारत के कुछ सबसे तेज रफ्तार वाले शहरों में क्विक-कॉमर्स ऑर्डर की डिलीवरी से भी कम है। किसान अपनी उपज लेकर गोदाम पहुंचता है, वहां अनाज का वजन किया जाता है, एआई आधारित स्कैनर गुणवत्ता का आकलन करते हैं और कुछ ही मिनटों के भीतर उसकी उपज के मूल्य का 60-75 प्रतिशत तक ऋण उसके बैंक खाते में जमा हो जाता है। न कोई कागजी कार्रवाई और न ही हफ्तों का इंतजार। अनाज सुरक्षित रूप से गोदाम में रखा रहता है। इससे किसान को फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर अपनी उपज बेचने के बजाय बाजार भाव बेहतर होने तक इंतजार करने की आजादी मिलती है।

आर्या भारत के कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए क्रेडिट इकोसिस्टम में हो रहे व्यापक बदलाव का एक उदाहरण है। भारत में कृषि ऋण निरंतर बढ़ा है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पूंजी की बढ़ती मांग को दर्शाता है। जहां अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अब भी कृषि ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराते हैं, वहीं एनबीएफसी, फिनटेक कंपनियां और एम्बेडेड फाइनेंस प्लेटफॉर्म भी इस सेक्टर की वित्तीय जरूरतों को तेजी से पूरा कर रहे हैं। ये संस्थाएं विभिन्न वैल्यू चेन और कारोबारी मॉडलों के अनुरूप विशेष वित्तीय उत्पाद विकसित कर रही हैं।

जैसे-जैसे कृषि-खाद्य अर्थव्यवस्था अधिक विशिष्ट और संगठित हुई है, उसकी पूंजी की जरूरतें भी बदल गई हैं। अब इस क्षेत्र की वित्तीय आवश्यकताएं केवल मौसमी फसल ऋण तक सीमित नहीं हैं। किसानों को सिर्फ कृषि इनपुट खरीदने के लिए नहीं, बल्कि फसल कटाई के बाद उपज के भंडारण, कृषि मशीनीकरण में निवेश, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों में विविधीकरण तथा पूरे वर्ष कैश फ्लो के लिए भी पूंजी की जरूरत पड़ रही है।

इसी तरह एफपीओ, वेयरहाउस, प्रोसेसर, निर्यातकों, कृषि-इनपुट रिटेलर और लॉजिस्टिक्स सेवा देने वालों को भी उपज की खरीद, इन्वेंटरी के वित्तपोषण, प्राप्तियों में देरी होने पर नकदी की कमी को पूरा करने और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। बैंकिंग संस्थानों का स्थान लेने के बजाय, उभरती गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं औपचारिक वित्त की पहुंच को व्यापक बना रही हैं। वे उन वित्तीय जरूरतों को पूरा कर रही हैं, जहां अधिक तेजी, लचीलापन या विशेष प्रकार की जांच और आकलन की आवश्यकता होती है।

किसान को वास्तविक लाभ तब मिलता है, जब किसी एफपीओ के पास उपज को एकत्र करने के लिए पर्याप्त पूंजी हो, जब कोई प्रोसेसर कटाई के तुरंत बाद उपज खरीद सके या जब कोई वेयरहाउस भंडार में रखे अनाज के आधार पर फाइनेंस दे सके। कृषि बाजारों की दक्षता इस बात पर निर्भर करती है कि पूरी वैल्यू चेन में पूंजी कितनी सहजता और निर्बाध रूप से प्रवाहित होती है।

आर्या का मॉडल इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि गैर-बैंकिंग ऋण एग्रीफूड इकोसिस्टम में किस तरह कई स्तरों पर लाभ पहुंचा सकता है। वेयरहाउस रसीद के जरिए किसान अपनी उपज को तुरंत बेचने के बजाय उसका भंडारण कर सकते हैं, और बिक्री का समय वे अपने हिसाब से तय कर सकते हैं। इससे किसान को कार्यशील पूंजी उस समय मिलती है, जब उसकी सबसे अधिक जरूरत होती है। वहीं, वेयरहाउस की क्षमता का बेहतर उपयोग होता है और प्रोसेसरों को अधिक भरोसेमंद तरीके से कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। ऋण साझेदारी के जरिए बैंक इस व्यवस्था में भाग ले सकते हैं। इस तरह, एक ही वित्तीय उत्पाद कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े कई पक्षों के परिणामों को बेहतर बनाता है।

यही कारण है कि भारत की एग्रीफूड अर्थव्यवस्था में गैर-बैंकिंग ऋण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसकी भूमिका एक ऐसे व्यापक वित्तीय तंत्र के निर्माण की है, जो जटिल और आपस में जुड़े इस क्षेत्र की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सके।

जैसे-जैसे कृषि एक उत्पादन केंद्रित क्षेत्र से आगे बढ़कर एकीकृत एग्रीफूड इकोनॉमी का रूप ले रही है, केवल खेती के लिए वित्त उपलब्ध कराना अब पर्याप्त नहीं रह गया है। कृषि विकास के अगले चरण में मूल्य सृजन के हर स्तर को वित्तपोषित करने की जरूरत होगी - कृषि इनपुट की खरीद से लेकर खेत से उपभोक्ता तक उत्पादों को ले जाने तक। इस यात्रा में बैंक अपनी केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे। वहीं, एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियां एक ऐसे कनेक्टिंग लिंक के रूप में उभर रही हैं, जो पूरे इकोसिस्टम को अधिक दक्ष, मजबूत, लचीला और समावेशी बनाने में मदद कर सकता है।

(लेखक ओम्नीवोर के मैनेजिंग पार्टनर हैं)

 

Subscribe Rural Voice Newsletter