कर्नाटक में 177 तालुका सूखाग्रस्त, संख्या 200 तक पहुंचने की आशंका; महाराष्ट्र में सितंबर अंत तक 100% सूखे का खतरा
दक्षिणी राज्यों में सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुका की संख्या 177 और संभवतः 200 तक पहुंच सकती है। महाराष्ट्र में सितंबर अंत तक व्यापक सूखे की आशंका जताई गई है, जबकि आंध्र प्रदेश में फसल नुकसान के बीच किसानों के लिए राहत की मांग बढ़ी है।
दक्षिणी राज्यों में कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, जिससे खरीफ फसलों और किसानों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुका की संख्या बढ़ाकर 177 किए जाने की तैयारी है और यह आंकड़ा 200 तक पहुंच सकता है। महाराष्ट्र में सितंबर अंत तक व्यापक सूखे की चेतावनी दी गई है, जबकि आंध्र प्रदेश में किसान, बटाईदार किसान और कृषि मजदूर तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।
कर्नाटक में बढ़ रहा सूखे का दायरा
कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुका की संख्या बढ़कर 177 होने वाली है और आने वाले दिनों में बारिश तथा फसल की स्थिति के आकलन के बाद यह संख्या करीब 200 तक पहुंच सकती है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को विधान परिषद में सूखे की स्थिति पर चर्चा के दौरान बताया कि जून से सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से 36% कम बारिश हुई है। इस अवधि में सामान्य 852 मिमी के मुकाबले केवल 642 मिमी बारिश दर्ज की गई है। दक्षिण कर्नाटक में बारिश की कमी 46%, उत्तर कर्नाटक में 44%, मलनाड क्षेत्र में 38% और तटीय क्षेत्र में 28% रही है।
कर्नाटक ने पहले चरण में 101 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया था। बाद के आकलन के आधार पर 23 और तालुका इसमें शामिल किए गए। अब 53 और तालुका को जोड़ने की तैयारी है, जिससे कुल संख्या 177 हो जाएगी।
परमेश्वर ने कहा कि सरकार केंद्र द्वारा निर्धारित सूखा आकलन के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम कर रही है और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाई जा सके।
इस बीच, कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य विधानसभा का विशेष सत्र सूखे की स्थिति पर पर्याप्त चर्चा और कार्रवाई नहीं करता है, तो 28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
महाराष्ट्र में बढ़ रहा सूखे का संकट
महाराष्ट्र में भी स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है। सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने चेतावनी दी है कि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहने पर सितंबर के अंत तक राज्य को 100% सूखे का सामना करना पड़ सकता है। पाटिल ने मौजूदा बारिश की कमी को अपने जीवनकाल में देखा गया सबसे गंभीर सूखा बताते हुए कहा कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन, कपास और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है।
राज्य में सूखे जैसी स्थिति से निपटने, फसल नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने में तेजी लाने के लिए मंगलवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति का गठन किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस उपसमिति को कैबिनेट के अधिकार दिए गए हैं। समिति हर सप्ताह सूखा प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और जमीनी स्थिति के आधार पर आवश्यक फैसले लेगी। हालांकि, बड़े नीतिगत फैसले राज्य कैबिनेट के समक्ष ही रखे जाएंगे।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने कपास और सोयाबीन के उत्पादन में बड़े पैमाने पर गिरावट की पुष्टि की है। किसानों द्वारा खेतों से सूखी और मुरझाई फसलें हटाने के बीच कृषि विभाग ने मुआवजे का आकलन करने के लिए फसलों का प्रारंभिक सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इस स्थिति का असर दूध और पोल्ट्री उत्पादन तथा उनकी कीमतों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में चारे की कमी भी शुरू हो गई है।
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने हाल में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सूखा घोषित करने और राहत उपाय शुरू करने की मांग की थी। पवार ने प्रभावित किसानों के लिए कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और प्रत्येक कृषि मजदूर परिवार के लिए 25,000 रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की है।
आंध्र प्रदेश में विशेष राहत पैकेज की मांग
आंध्र प्रदेश में CPI(M) ने सूखाग्रस्त मंडलों की तत्काल पहचान कर उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करने और किसानों, बटाईदार किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है। CPI(M) के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि करीब 50 लाख एकड़ में बुवाई हुई है, लेकिन 20 लाख एकड़ में भी उपज मिलने की संभावना कम है। इससे संभावित फसल नुकसान के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पार्टी ने कर्ज माफी, MGNREGS के तहत 200 दिनों के रोजगार और सरकार द्वारा निर्धारित कम से कम 2,310 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की मांग की है। इसके अलावा प्रत्येक सूखा प्रभावित बटाईदार किसान परिवार को 7.5 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई है। पार्टी ने पशुधन को बचाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में चारा केंद्र स्थापित करने की भी मांग की है।

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