आपूर्ति में सुधार के बाद केंद्र ने गेहूं पर स्टॉक लिमिट का आदेश वापस लिया
गेहूं की उपलब्धता में सुधार और घरेलू आपूर्ति की संतोषजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने मई 2025 में जारी गेहूं भंडारण सीमा आदेश को वापस ले लिया है। यह फैसला देशभर में गेहूं की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कीमतों और भंडार स्तर की लगातार निगरानी के बाद लिया गया है।
गेहूं की उपलब्धता में सुधार और घरेलू आपूर्ति की संतोषजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने मई 2025 में जारी गेहूं भंडारण सीमा आदेश को वापस ले लिया है। यह फैसला देशभर में गेहूं की सुचारु उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कीमतों और भंडार स्तर की लगातार निगरानी के बाद लिया गया है। भंडारण सीमा के आदेश की वापसी निर्दिष्ट खाद्य पदार्थों पर लाइसेंसिंग आवश्यकताओं, भंडारण सीमाओं और आवागमन प्रतिबंधों को हटाने संबंधी (संशोधन) आदेश, 2025 से संबंधित है, जिसे 27 मई 2025 को जारी किया गया था और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू था।
भले ही भंडारण सीमा हटा दी गई हो, सरकार ने गेहूं का भंडारण करने वाली सभी इकाइयों के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर हर शुक्रवार अपने भंडार की स्थिति घोषित करना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से पारदर्शिता बनी रहेगी और बाजार की स्थिति पर करीबी निगरानी संभव हो सकेगी।
2025–26 के विपणन वर्ष के लिए निजी इकाइयों की तरफ से दाखिल घोषणाओं के अनुसार, निजी क्षेत्र में गेहूं की उपलब्धता पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। वर्तमान में कुल घोषित भंडार लगभग 81 लाख मीट्रिक टन है, जो साल-दर-साल आधार पर करीब 30 लाख टन अधिक है। इससे घरेलू बाजार में मजबूत आपूर्ति का पता चलता है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य के आंकड़े भी गेहूं की कीमतों में गिरावट का रुझान दिखाते हैं, खासकर थोक बाजार में। थोक कीमतें पिछले वर्ष 2,970.10 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर वर्तमान में लगभग 2,852.30 रुपये प्रति क्विंटल रह गई हैं, जो कमजोर मांग और अधिशेष आपूर्ति की स्थिति को दर्शाती हैं।
चालू रबी सीजन के दौरान गेहूं का रकबा भी सामान्य अपेक्षा से अधिक बढ़ा है। बुवाई का क्षेत्र 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह गेहूं की खेती के प्रति किसानों की लगातार बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद और अनुकूल बाजार संकेतों के कारण यह रुझान बना हुआ है, जिससे एक और मजबूत उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है।
सरकार ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), अन्य कल्याणकारी योजनाओं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी संभावित बाजार हस्तक्षेप की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गेहूं का भंडार उपलब्ध है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग गेहूं की कीमतों और भंडार की स्थिति पर कड़ी निगरानी जारी रखेगा, ताकि स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या मूल्य अस्थिरता को रोका जा सके।
स्टॉक सीमा हटाने के इस कदम से व्यापारियों और आटा मिलों के लिए मार्केट ऑपरेशन आसान होने की उम्मीद है। साथ ही त्योहारी मांग के मौसम से पहले देश की खाद्य सुरक्षा स्थिति को लेकर भरोसा भी मजबूत होगा।

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