भारत के रॉ शुगर आयात से ग्लोबल मार्केट में भी तेजी, अगस्त में FAO चीनी सूचकांक सबसे अधिक 11.9% बढ़ा

भारत और वैश्विक बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। FAO का चीनी मूल्य सूचकांक अगस्त में 11.9 प्रतिशत बढ़कर जून 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। गर्म और शुष्क मौसम, अल नीनो, ब्राजील में कम उत्पादन के साथ भारत के शुल्क-मुक्त रॉ शुगर आयात फैसले ने वैश्विक आपूर्ति पर चिंता बढ़ाई है।

भारत के रॉ शुगर आयात से ग्लोबल मार्केट में भी तेजी, अगस्त में FAO चीनी सूचकांक सबसे अधिक 11.9% बढ़ा

भारत में पहले से ही ऊंची चल रही चीनी की कीमतों पर वैश्विक बाजार में आई तेज बढ़ोतरी से दबाव और बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार अगस्त में चीनी मूल्य सूचकांक 11.9 प्रतिशत बढ़ गया। FAO जिन प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखता है, उनमें सबसे अधिक मासिक बढ़ोतरी चीनी में ही हुई। इसका कारण गर्म और शुष्क मौसम, अल नीनो और ब्राजील में कम उत्पादन के साथ भारत का शुल्क-मुक्त रॉ शुगर आयात का फैसला है। भारत में चीन की खुदरा कीमतें 60 रुपये प्रति किलो से अधिक चल रही हैं। पिछले कई हफ्तों में इसमें 40 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है।

अगस्त में FAO का चीनी मूल्य सूचकांक औसतन 106.4 अंक रहा, जो जुलाई के मुकाबले 11.3 अंक अधिक है। यह जून 2025 के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। FAO के अनुसार, इस तेज बढ़ोतरी की प्रमुख वजह 2026/27 सीजन में चीनी उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं।

दुनिया के कई प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में लगातार गर्म और शुष्क मौसम ने उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित किया है। यूरोपीय संघ में प्रतिकूल मौसम के कारण चुकंदर की पैदावार के अनुमान को घटाया गया है। साथ ही, पिछले सीजन की तुलना में इस बार चुकंदर का रकबा भी कम रहने का अनुमान है।

एशिया में भी मौसम संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियां प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में उत्पादन की संभावनाओं को प्रभावित कर रही हैं। दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातक ब्राजील ने भी वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। देश के प्रमुख सेंटर-साउथ क्षेत्र में कम उत्पादन से आपूर्ति प्रभावित हुई है।

FAO ने अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में तेजी के पीछे भारत की व्यापार नीति को भी एक महत्वपूर्ण कारक बताया है। भारत द्वारा शुल्क-मुक्त रॉ शुगर के आयात की घोषणा से वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ीं, क्योंकि बाजार ने उपलब्ध आपूर्ति और मांग को नए सिरे से आंकना शुरू कर दिया है।

यह घटनाक्रम भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां घरेलू उपलब्धता और उत्पादन को लेकर चिंताओं के बीच चीनी की कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी से आयात की लागत बढ़ सकती है, हालांकि शुल्क-मुक्त आयात का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति में सुधार करना और बाजार पर कीमतों के दबाव को कम करना है।

एफएओ खाद्य मूल्य सूचकांक में भी बढ़ोतरी

अगस्त में FAO का समग्र खाद्य मूल्य सूचकांक भी बढ़ा। यह 133.3 अंक रहा, जो जुलाई से 1.9 प्रतिशत और एक साल पहले की तुलना में 2.5 प्रतिशत अधिक है। सभी पांच प्रमुख खाद्य समूहों के सूचकांकों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, समग्र सूचकांक मार्च 2022 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से अभी भी 16.8 प्रतिशत नीचे है।

अनाज की कीमतों में भी तेजी आई। FAO अनाज मूल्य सूचकांक 2.2 प्रतिशत बढ़कर 116.3 अंक पर पहुंच गया, जो मई 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। गेहूं की कीमतों में 2.6 प्रतिशत और मक्का की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके पीछे मौसम संबंधी चिंताओं, मजबूत मांग और निर्यात आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितता का प्रमुख योगदान रहा। वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक भी 0.6 प्रतिशत बढ़कर जून 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं, डेयरी और मांस मूल्य सूचकांक में क्रमशः 2.3 प्रतिशत और 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

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