पांच साल में 17% घटा कपास उत्पादन, कच्ची कपास का आयात 80% से अधिक बढ़ा

पिछले पांच वर्षों में भारत का कपास उत्पादन 17% से अधिक घट गया है। क्षेत्रफल और उत्पादकता में कमी के कारण घरेलू उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसकी भरपाई के लिए 2025-26 में कच्ची कपास का आयात 80% से अधिक और सूती धागे (कॉटन यार्न) का आयात लगभग 20% बढ़ गया। उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में छूट दी है।

पांच साल में 17% घटा कपास उत्पादन, कच्ची कपास का आयात 80% से अधिक बढ़ा

पिछले पांच कपास वर्षों में भारत का कपास उत्पादन 61 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) से अधिक यानी 17% से ज्यादा घट गया है। इस दौरान कपास का रकबा और उत्पादकता दोनों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। वहीं, घरेलू मांग को पूरा करने के लिए कच्ची कपास और सूती धागे (कॉटन यार्न) के आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है। 

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में टेक्सटाइल राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बताया कि 2020-21 में देश का कपास उत्पादन 352.48 लाख गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) था, जो 2025-26 (अनंतिम) में घटकर 290.91 लाख गांठ रह गया। कपास वर्ष अक्टूबर से सितंबर तक माना जाता है।

उत्पादन में गिरावट के साथ कपास के रकबे में भी कमी आई है। 2020-21 में कपास का क्षेत्रफल 132.85 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में घटकर 114.82 लाख हेक्टेयर रह गया। यानी पांच वर्षों में 18 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र कम हुआ। इसी अवधि में औसत उत्पादकता भी 451 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से घटकर 431 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई।

मंत्रालय के अनुसार, उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण कपास के रकबे में कमी है, क्योंकि बेहतर लाभ मिलने के कारण कई किसानों ने अन्य फसलों की ओर रुख किया है।

घरेलू उत्पादन घटने से आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024-25 में 7,564.61 टन रहे सूती धागे (कॉटन यार्न) के आयात में 19.96% की वृद्धि हुई और यह 2025-26 में बढ़कर 9,074.13 टन हो गया।

कच्ची कपास के आयात में इससे भी अधिक तेजी दर्ज की गई। इसका आयात 2024-25 के 5,62,224.70 टन से बढ़कर 2025-26 में 10,13,455.16 टन हो गया, यानी इसमें 80% से अधिक की वृद्धि हुई। इससे स्पष्ट है कि घरेलू उद्योग की जरूरतें पूरी करने के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता बढ़ रही है।

मंत्रालय ने बताया कि हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में लगभग 19% की वृद्धि हुई है, जबकि देश में एस-6 किस्म के कपास की कीमतें करीब 18% बढ़ी हैं। कपड़ा उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यकता के अनुसार कपास और सूती धागे के आयात की अनुमति दी जा रही है।

घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 1 जून से 31 अक्टूबर, 2026 तक कपास के आयात पर लगने वाले 11% आयात शुल्क को माफ कर दिया है। इसके अलावा 20 फरवरी, 2024 से एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ईएलएस) कपास के आयात पर शुल्क छूट भी जारी रखी गई है, ताकि वस्त्र उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध हो सके।

ताजा आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक देशों में शामिल होने के बावजूद भारत में घटता उत्पादन और गिरती उत्पादकता कपास क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसके चलते घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

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