नरेश टिकैत के 'हलवाई का ततैया' बयान पर जयंत चौधरी का जवाब - मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!
अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर उठे विवाद के बीच पश्चिमी यूपी की राजनीति गरमा गई है। रालोद और भाकियू समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी जारी है।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पश्चिमी यूपी के दो दिग्गजों की बयानबाजी ने सियासी गर्मी बढ़ा दी है। ट्रेड डील से किसानों को होने वाले नफे-नुकसान पर बहस के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो गया है।
केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 16 फरवरी को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बिसावर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका से न तो आलू आने वाला है, न गेहूं। वह जमाना चला गया। अमेरिका से धान भी नहीं आने वाला और न ही फल-सब्जियां आएंगी। आपका पैदा किया हुआ आम जरूर वहां जा सकता है। आपकी फसलें वहां जरूर जा सकती हैं। वहां से दूध भी नहीं आने वाला। साफ इंकार है। भारत सरकार की एक ही शर्त थी कि हम व्यापार में विस्तार चाहते हैं, मगर किसान और कामगार के हितों से समझौता नहीं कर सकते। जितने भी करार हुए हैं, उनमें यही पहली शर्त मानी गई है।
जयंत चौधरी के इस बयान पर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने तंज कसते हुए कहा कि जयंत चौधरी अपना काम चला रहे हैं। सरकार में हैं तो सरकार की बात तो कहनी ही पड़ेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हलवाई का ततैया हलवाई को नहीं काटता और मिठाई पर बैठा रहता है। हलवाई उसे हटाता रहता है, लेकिन उससे कुछ नहीं कहता। जयंत चौधरी की भी मजबूरी है, क्या करें!
नरेश टिकैत का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रालोद और भाकियू समर्थकों के बीच बहस छिड़ गई। दोनों ओर से एक-दूसरे पर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं।
नरेश टिकैत के ‘हलवाई का ततैया’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जो हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं उन्हें बता दूँ, मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!
इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। सियासी खेमों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। मीठे का शौक न होने संबंधी जयंत चौधरी के बयान को 2027 के राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
इस बीच, भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मामले को संतुलित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अमेरिका से जो समझौता हुआ है, वह डील नहीं बल्कि एकतरफा घोषणा है। इस पर देश में बहस चल रही है। प्रेस के लोग सवालों में उलझाकर विवाद पैदा कर देते हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि जयंत चौधरी सरकार में शामिल हैं, इसलिए सरकार की जो भाषा होगी, वही उन्हें बोलनी चाहिए। वे अपनी बात कह रहे हैं, लेकिन प्रेस के लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं।
राकेश टिकैत ने जोर देकर कहा कि हम एक हैं। कोई कहीं भी रहे, सब एक हैं। हम दिल्ली के चारों तरफ हैं, जरूरत पड़ी तो फिर घेरेंगे। जयंत चौधरी के बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने सही कहा है। उन्हें ‘मीठे’, यानी सरकार से कोई लगाव नहीं है। जब जरूरत होगी, वे जनता के बीच होंगे।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोकदल और भाकियू दोनों का प्रभाव पश्चिमी यूपी के किसान वर्ग में है। अतीत में दोनों संगठन मिलकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। खासकर किसान आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय लोकदल ने भाकियू का समर्थन किया था। किसान आंदोलन से बने माहौल का सियासी लाभ रालोद को 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में मिला। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी भाजपा से गठबंधन कर एनडीए के पाले में चले गए थे।
“जितने भी अंतरराष्ट्रीय करार हो रहे हैं, उनमें सरकार की एक ही शर्त है- हम व्यापार में विस्तार चाहते हैं, मगर किसान और कामगार के हितों से समझौता नहीं करेंगे।”
— Office of Ch Jayant Singh (@Office_ChJayant) February 16, 2026
- माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जयन्त चौधरी (बिसावर, हाथरस)#TradeDeal #JayantChaudhary pic.twitter.com/D15YV46ZXp

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