खरीफ बुवाई में कमी घटकर 1.50 फीसदी रही, दलहन में बढ़त लेकिन धान का रकबा घटा
देश में खरीफ फसलों की बुवाई 21 अगस्त तक 1,056.70 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 1.50 फीसदी कम है। धान, मक्का और रागी के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि दलहन में बढ़त और तिलहन का रकबा लगभग पिछले साल से मामूली सा कम है।
देश में खरीफ फसलों की बुवाई अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है, लेकिन कुल रकबे में पिछले साल की तुलना में मामूली कमी बनी हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 तक देश में कुल 1,056.70 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,072.77 लाख हेक्टेयर से 16.07 लाख हेक्टेयर या 1.50 फीसदी कम है।
धान की बुवाई में 3.15 फीसदी कमी
देश में सबसे प्रमुख खरीफ फसल धान का रकबा 21 अगस्त तक 405.10 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 418.29 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान की बुवाई में 13.19 लाख हेक्टेयर या 3.15 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। हालांकि, धान का मौजूदा रकबा 412 लाख हेक्टेयर के सामान्य रकबे के काफी करीब पहुंच गया है।
दलहन में 1.33 फीसदी की बढ़त
दलहन फसलों के मामले में स्थिति बेहतर रही है। कुल दलहन का रकबा 113.63 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल के 112.14 लाख हेक्टेयर से 1.49 लाख हेक्टेयर या 1.33 फीसदी अधिक है।
अरहर का रकबा 43.86 लाख हेक्टेयर, उड़द का 24.38 लाख हेक्टेयर और मूंग का 32.68 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया। खासतौर पर उड़द की बुवाई में पिछले वर्ष की तुलना में 12.22 फीसदी की बढ़त हुई है, जबकि अरहर में 0.97 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। दूसरी ओर, मूंग का रकबा 3.67 फीसदी कम रहा है।
मक्का और रागी में गिरावट, बाजरा-ज्वार में बढ़त
श्री अन्न एवं मोटे अनाजों का कुल रकबा 176.36 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 179.81 लाख हेक्टेयर से 1.92 फीसदी कम है। मक्का की बुवाई 89.51 लाख हेक्टेयर से घटकर 89.51 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष यह 93.30 लाख हेक्टेयर थी। यानी मक्का का रकबा 4.06 फीसदी कम है।
रागी में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। इसका रकबा पिछले वर्ष के 6.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.81 लाख हेक्टेयर रह गया, जो 27.14 फीसदी की कमी है। इसके विपरीत, ज्वार की बुवाई 6.41 फीसदी और बाजरे की 2.13 फीसदी बढ़ी है।
21 अगस्त तक खरीफ बुवाई की स्थिति

तिलहन लगभग पिछले साल के स्तर पर
कुल तिलहन का रकबा 188.37 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 188.69 लाख हेक्टेयर से महज 0.17 फीसदी कम है। मूंगफली की बुवाई में 1.18 फीसदी की बढ़त हुई है और तिल का रकबा 15.16 फीसदी बढ़ा है। सूरजमुखी की बुवाई में 80.98 फीसदी और नाइजरसीड में 48.94 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि इन फसलों का कुल रकबा अपेक्षाकृत छोटा है।
सोयाबीन का रकबा 1.15 फीसदी घटा है, जबकि अरंडी की बुवाई में 20.80 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
गन्ना और कपास में भी मामूली कमी
गन्ने का रकबा पिछले वर्ष के 58.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 58.44 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि कपास का रकबा 108.73 लाख हेक्टेयर से मामूली घटकर 108.45 लाख हेक्टेयर रहा। जूट और मेस्ता का कुल रकबा हालांकि 1.68 फीसदी बढ़कर 6.34 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।
कुल मिलाकर, 21 अगस्त तक खरीफ बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि से केवल 1.50 फीसदी पीछे है। दलहन में बढ़त और तिलहन का रकबा लगभग स्थिर रहने से कुल बुवाई में बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन धान, मक्का और रागी के कम रकबे ने समग्र खरीफ कवरेज को पिछले वर्ष के स्तर से नीचे रखा है।
मानसूनी बारिश 13 फीसदी कम
अल नीनो के प्रभाव और मानसून की बारिश के वितरण ने भी इस साल खरीफ बुवाई को प्रभावित किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 1 जून से 21 अगस्त 2026 तक देश में संचयी वर्षा दीर्घकालिक औसत से 13 फीसदी कम रही। क्षेत्रीय स्तर पर मध्य भारत में बारिश सामान्य के करीब रही और केवल 2 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जबकि पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में 26 फीसदी, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 23 फीसदी और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 फीसदी बारिश की कमी रही। बारिश के असमान वितरण का असर विभिन्न राज्यों और फसलों की बुवाई पर पड़ा है। हालांकि, मानसून के आगे बढ़ने और कई क्षेत्रों में बाद की अवधि में बेहतर बारिश होने से खरीफ बुवाई का अंतर शुरुआती हफ्तों की तुलना में काफी कम हो गया है।


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