कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई 21% पिछड़ी, धान का रकबा 13% कम, तिलहन बुवाई में बड़ी गिरावट

कमजोर मानसून और बारिश की कमी के चलते खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है। 5 जुलाई 2026 तक कुल खरीफ रकबा पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी घटकर 350.85 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन, कपास, दलहन, धान और मोटे अनाज की बुवाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई 21% पिछड़ी, धान का रकबा 13% कम, तिलहन बुवाई में बड़ी गिरावट

दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर और असमान प्रगति का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई दे रहा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 350.85 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि के 442.80 लाख हेक्टेयर से 91.95 लाख हेक्टेयर यानी करीब 21 फीसदी कम है। धान, दलहन, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की बुवाई पिछले साल से पीछे चल रही है।

धान की बुवाई 13% कम

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 5 जुलाई तक धान की बुवाई 60.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 69.30 लाख हेक्टेयर में धान लगाया जा चुका था। इस तरह धान का रकबा 9.06 लाख हेक्टेयर या करीब 13 फीसदी कम है।

दलहन फसलों की बुवाई भी पिछले साल से काफी पीछे है। चालू खरीफ सीजन में अब तक 37.15 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक यह आंकड़ा 47.49 लाख हेक्टेयर था। यानी दलहन का रकबा 10.34 लाख हेक्टेयर या करीब 22 फीसदी घटा है।

दलहन फसलों में अरहर की बुवाई 21 लाख हेक्टेयर से घटकर 12.35 लाख हेक्टेयर रह गई है। उड़द का रकबा 4.63 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 3.01 लाख हेक्टेयर और मूंग का रकबा 17.20 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 16.81 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया। हालांकि, मोठ की बुवाई पिछले साल के 3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.45 लाख हेक्टेयर हो गई है।

मोटे अनाज की बुवाई

श्री अन्न एवं मोटे अनाज की कुल बुवाई 60.12 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि के 71.86 लाख हेक्टेयर से 11.75 लाख हेक्टेयर कम है।

इस श्रेणी में बाजरा की बुवाई में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है। बाजरा का रकबा 30 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.82 लाख हेक्टेयर रह गया है। मक्का की बुवाई भी पिछले साल के 35 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 32.94 लाख हेक्टेयर में हुई है। ज्वार का रकबा 4.89 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.53 लाख हेक्टेयर और रागी का रकबा 0.88 लाख हेक्टेयर से घटकर 0.84 लाख हेक्टेयर रह गया है।

तिलहन में सबसे बड़ी गिरावट

खरीफ बुवाई के आंकड़ों में सबसे चिंताजनक स्थिति तिलहन फसलों की है। तिलहन का कुल रकबा पिछले साल के 109.27 लाख हेक्टेयर से घटकर 66.31 लाख हेक्टेयर रह गया है। इस तरह तिलहन की बुवाई में 42.96 लाख हेक्टेयर या करीब 39 फीसदी की भारी गिरावट आई है।

देश की प्रमुख खरीफ तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई 79.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 47.80 लाख हेक्टेयर रह गई है। अकेले सोयाबीन के रकबे में 31.40 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मूंगफली की बुवाई भी 28 लाख हेक्टेयर के मुकाबले केवल 16.93 लाख हेक्टेयर में हुई है।

हालांकि, सूरजमुखी की बुवाई पिछले साल के 0.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.79 लाख हेक्टेयर हो गई है। अरंडी का रकबा भी मामूली बढ़कर 0.09 लाख हेक्टेयर हो गया है।

कपास का रकबा 23% घटा

कपास की बुवाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल 5 जुलाई तक 82 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी, जबकि इस साल यह रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर है। इस प्रकार कपास की बुवाई 18.82 लाख हेक्टेयर या करीब 23 फीसदी कम है।

इसके विपरीत, गन्ने और जूट एवं मेस्टा की बुवाई पिछले साल से थोड़ी अधिक है। गन्ने का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि जूट एवं मेस्टा की बुवाई 6.16 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 6.28 लाख हेक्टेयर में हुई है।

कमजोर शुरुआत के बावजूद खरीफ बुवाई का बड़ा हिस्सा जुलाई में होता है। ऐसे में आने वाले सप्ताहों में मानसून की प्रगति और बारिश का भौगोलिक वितरण खरीफ सीजन की तस्वीर तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि, मौसम विभाग ने जुलाई में देशभर की बारिश दीर्घावधि औसत के 94 फीसदी से कम रहने का अनुमान जताया है, जिससे बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में खरीफ बुवाई को लेकर चिंता बनी हुई है। 

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