कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई 23% पिछड़ी; धान और तिलहन की बुवाई को बड़ा झटका

कमजोर मानसून के कारण 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 22.7 प्रतिशत कम हुई है। हालांकि IMD ने अगले कुछ दिनों में मानसून के तेजी से आगे बढ़ने और कई राज्यों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। अब किसानों की उम्मीदें अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं।

कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई 23% पिछड़ी; धान और तिलहन की बुवाई को बड़ा झटका

दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी शुरुआत का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई दे रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप के 25 जून तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 53.74 लाख हेक्टेयर कम रही है। इस अवधि तक कुल 182.72 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 236.46 लाख हेक्टेयर था। यानी बुवाई में करीब 22.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

जून में मानसून के आगमन के साथ ही देश में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है जो जुलाई के आखिर तक चलती है। इस साल जून में मानसून की प्रगति काफी धीमी रही और दो सप्ताह से यह मध्य भारत में अटका हुआ है। जून माह के दौरान देश में सामान्य से 43 फीसदी कम वर्षा हुई और अधिकांश कृषि क्षेत्र बारिश में कमी से जूझ रहे हैं।

धान, तिलहन और कपास में सबसे बड़ी गिरावट

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई 25.75 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 34.41 लाख हेक्टेयर से 8.65 लाख हेक्टेयर कम है।

दलहन का रकबा भी 21.46 लाख हेक्टेयर से घटकर 14.92 लाख हेक्टेयर रह गया। अरहर, उड़द और मूंग की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है।

मोटे अनाज (श्री अन्न) का कुल रकबा 31.84 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 36.07 लाख हेक्टेयर से कम है। हालांकि ज्वार के रकबे में कुछ बढ़ोतरी हुई है, जबकि मक्का का रकबा घटकर 15.71 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 18.61 लाख हेक्टेयर था।

तिलहन फसलों की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित रही। कुल तिलहन बुवाई 36.41 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गई। इसमें सबसे बड़ी गिरावट सोयाबीन में दर्ज की गई, जिसका रकबा 19.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 6.92 लाख हेक्टेयर रह गया। मूंगफली की बुवाई भी 15.29 लाख हेक्टेयर से घटकर 8.87 लाख हेक्टेयर रह गई।

कपास की बुवाई 45.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गई, यानी इसमें 15.70 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।

इसके विपरीत गन्ने का रकबा 56.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि जूट एवं मेस्ता की बुवाई में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अगले दो-तीन दिनों में गति पकड़ेगा मानसून 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 29 जून को जारी बुलेटिन में कहा है कि अगले दो-तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

आईएमडी ने कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। वहीं, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में भी अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है।

दूसरी ओर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों तथा हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ में लू की स्थिति बने रहने की संभावना भी जताई गई है। 

जुलाई के पहले पखवाड़े पर टिकी नजर

जून में मानसून की धीमी प्रगति के बाद अब खरीफ बुवाई की उम्मीदें जुलाई के पहले पखवाड़े पर टिकी हैं। यदि अगले कुछ दिनों में व्यापक और नियमित वर्षा होती है तो धान, सोयाबीन, कपास और मक्का की बुवाई में तेजी आ सकती है और शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। लेकिन यदि मानूसन आगे भी कमजोर रहा तो इसका असर न केवल बुवाई बल्कि पैदावार और कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है। 

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