लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 14% से घटकर 7.9% पर आई: फिक्की-ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट

फिक्की-ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत घटकर 7.9% रह गई है, लेकिन फसल कटाई के बाद नुकसान कम करने और आयात निर्भरता घटाने के लिए स्वदेशी कोल्ड चेन तकनीक और R&D बेहद जरूरी है।

लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 14% से घटकर 7.9% पर आई: फिक्की-ग्रांट थॉर्नटन रिपोर्ट

भारत को अपने लॉजिस्टिक्स के भविष्य को सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए स्वदेशी कोल्ड चेन तकनीक विकसित करनी होगी। गुरुवार को जारी इंडस्ट्री चैंबर फिक्की (FICCI) और ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) की संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के निष्कर्ष फिक्की गतिशक्ति सम्मेलन के तीसरे संस्करण में प्रस्तुत किए गए। इसमें बताया गया है कि भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत घटकर जीडीपी का 7.9 प्रतिशत रह गई है।

यह रिपोर्ट ‘भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में बदलाव: वेयरहाउसिंग, कोल्ड चेन और टेक्नोलॉजी की भूमिका’ शीर्षक से जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत घटकर जीडीपी के 7.9 प्रतिशत तक आ गई है, जो पहले 13-14 प्रतिशत के बीच थी। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार अब प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीक विकास अगला बड़ा कदम होगा।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कोल्ड चेन ऑटोमेशन के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे केवल क्षमता बढ़ाने के बजाय सिस्टम की दक्षता पर ध्यान दिया जा सके। इसमें रोबोटिक्स, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उपकरणों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

भारत में वर्तमान में 8,815 कोल्ड स्टोरेज इकाइयां हैं, जिनकी कुल क्षमता 402.18 लाख मीट्रिक टन है। इसके बावजूद फल और सब्जियों में फसल कटाई-तुड़ाई के बाद नुकसान 6 से 15 प्रतिशत तक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इसका कारण केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि ऑटोमेशन की कमी, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोर योजना और स्मार्ट सिस्टम का सीमित उपयोग है।

नीतिगत समर्थन और उद्योग की भूमिका

सम्मेलन में नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी स्वदेशी नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी की चेयरपर्सन अनीता प्रवीण ने इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद प्रणाली को आसान और प्रभावी समाधान बताते हुए कहा कि इससे किसानों को अपनी उपज गिरवी रखकर वित्तीय सहायता मिल सकती है और उन्हें मजबूरी में फसल बेचने से बचाया जा सकता है।

तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर

फिक्की लॉजिस्टिक्स समिति के को-चेयर अंशुमन सिंह ने बताया कि भारत में इस समय 50 करोड़ वर्ग फीट लॉजिस्टिक्स पार्क हैं, जो अगले पांच वर्षों में बढ़कर 100 करोड़ वर्ग फीट से अधिक हो सकते हैं। यह वृद्धि पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti), राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क योजनाओं के कारण संभव होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की 33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना (100 प्लग-एंड-प्ले लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने के लिए) पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए लॉजिस्टिक्स पार्क के विकास में तेजी लाएगी। 

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के संयुक्त सचिव पंकज कुमार ने कहा कि लागत में कमी महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थिरता, लचीलापन और बेहतर परिणाम भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने पीएम गति शक्ति पोर्टल के बेहतर उपयोग पर जोर दिया, ताकि विभिन्न परियोजनाओं का समन्वित विकास हो सके।

फिक्की लॉजिस्टिक्स कमेटी के को-चेयर और ताबी मोबिलिटी के सीईओ पाली त्रिपाठी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती लास्ट-माइल डिलीवरी है। उन्होंने डेटा के बेहतर उपयोग और एकीकृत निर्णय प्रणाली को भविष्य की दिशा बताया। नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के एमडी एवं सीईओ रजत कुमार सैनी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के साथ-साथ कौशल विकास, नियामकीय सुधार और वर्कफोर्स के फॉर्मलाइजेशन पर भी ध्यान देना जरूरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्वदेशी कोल्ड चेन ऑटोमेशन भारत के लिए न केवल लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने और जलवायु-संवेदनशील, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स प्रणाली बनाने के लिए भी अनिवार्य है।

Subscribe here to get interesting stuff and updates!