ईरान युद्ध से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा, जानिए किस राज्य के लिए कितना जोखिम

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशियाई देशों को 11.8 अरब डॉलर मूल्य के कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात किया, जो देश के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है। क्षेत्र में जारी युद्ध से समुद्री मार्ग और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुआ है, जिससे चावल, केले, मसाले, मांस, डेयरी और प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों का निर्यात जोखिम में पड़ सकता है।

ईरान युद्ध से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा, जानिए किस राज्य के लिए कितना जोखिम

भारत का कृषि निर्यात पश्चिम एशियाई बाजारों पर काफी हद तक निर्भर हैं। वर्ष 2025 में इस क्षेत्र को कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात लगभग 11.8 अरब डॉलर का रहा, जो देश के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है। इस व्यापार में अनाज, फल, सब्जियां और मसाले प्रमुख हैं, जबकि केला, चावल, मसाले और मांस जैसे उत्पादों की खाड़ी देशों पर विशेष रूप से अधिक निर्भरता है। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो इसका असर भारत के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और कृषि निर्यातकों पर हो सकता है।

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भौगोलिक निकटता और खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से भारत के खाद्य निर्यात के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहा है। हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, बीमा लागत बढ़ रही है और लॉजिस्टिक्स को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। 

प्रभावित होने वाले उत्पाद

फल, सब्जियां और चावल

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को अनाज, फल, सब्जियां और मसालों का लगभग 7.48 अरब डॉलर का निर्यात किया। इस श्रेणी में भारत के कुल वैश्विक निर्यात का 29.2% हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है। प्रमुख निर्यातित उत्पादों में चावल, केले, प्याज, अन्य सब्जियां, दालें, मेवे, कॉफी, चाय और विभिन्न प्रकार के मसाले शामिल हैं।

सबसे अधिक संभावित प्रभाव चावल पर हो सकता है। भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया, जो भारत के कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7% है। इस कारण पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के चावल उत्पादकों के लिए खाड़ी देश बेहद महत्वपूर्ण बाजार हैं।

केला निर्यात 39.65 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 79.6% केला पश्चिम एशिया को गया। इससे तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात के केला उत्पादक किसान इस बाजार पर काफी निर्भर हो गए हैं। प्याज और लहसुन का निर्यात 11.1 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि अन्य सब्जियों का निर्यात 9.15 करोड़ डॉलर का था। इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात में से क्रमशः 26.9% और 50.8% हिस्सा पश्चिम एशिया को गया।

मसाले और बागान फसलें भी क्षेत्रीय मांग से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जायफल, जावित्री और इलायची का निर्यात 29.55 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 70.5% पश्चिम एशिया को भेजा गया।

जीरा और धनिया जैसे मसालों बीजों का निर्यात 16.3 करोड़ डॉलर का रहा, जबकि अदरक और हल्दी का निर्यात 17.3 करोड़ डॉलर का था। इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का लगभग 23% पश्चिम एशिया को जाता है। इन फसलों से मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात के किसानों को आय प्राप्त होती है।

भारत ने पश्चिम एशिया को 24.07 करोड़ डॉलर की कॉफी और 41.01 करोड़ डॉलर की चाय का निर्यात किया। यह भारत के कुल कॉफी और चाय निर्यात का क्रमशः 17.7% और 44.1% है, जिससे कर्नाटक, केरल, असम और पश्चिम बंगाल के उत्पादकों को महत्वपूर्ण समर्थन मिलता है।

प्रोसेस्ड फूड और चीनी

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को लगभग 135 करोड़ डॉलर के प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कोको से बने उत्पादों का निर्यात किया। इस श्रेणी में मुख्य रूप से चीनी, ब्रेड और बिस्किट जैसे बेकरी उत्पाद, प्रोसेस्ड फल और मेवे तथा अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पाद शामिल हैं।

2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 34.9 करोड़ डॉलर की चीनी, 12.18 करोड़ के बेकरी उत्पाद और 10.74 करोड़ डॉलर के प्रोसेस्ड फल और मेवों का निर्यात किया। ये निर्यात इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का करीब 16 से 28 प्रतिशत हिस्सा हैं। इससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।

मांस और समुद्री उत्पाद

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को मछली, मांस तथा जमे और प्रसंस्कृत उत्पादों का कुल 1.81 अरब डॉलर का निर्यात किया। इस श्रेणी में प्रमुख निर्यातित उत्पादों में ताजा या ठंडा बीफ, फ्रोजन बीफ, भेड़ और बकरी का मांस, तथा झींगा और प्रॉन जैसे समुद्री उत्पाद शामिल हैं।

पश्चिम एशिया को ताजा या ठंडे बीफ का निर्यात 2025 में 13.9 करोड़ डॉलर का रहा, जो इस उत्पाद के भारत के कुल निर्यात का 97.4 प्रतिशत है। वहीं फ्रोजन बीफ का निर्यात 1.27 अरब डॉलर रहा, जो भारत के वैश्विक निर्यात का 28.9 प्रतिशत है।

भेड़ और बकरी के मांस का निर्यात 9.52 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 98.9 प्रतिशत निर्यात पश्चिम एशिया को गया। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र के बाजारों में किसी भी प्रकार की बाधा का भारत के पशुधन निर्यातकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में, जहां अधिकांश प्रसंस्करण इकाइयां स्थित हैं।

समुद्री उत्पादों का निर्यात भी इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है। वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को झींगा और प्रॉन जैसे क्रस्टेशियन समुद्री उत्पादों का 22 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। आंध्र प्रदेश, गुजरात और केरल के निर्यातकों की आजीविका भी इस बाजार से जुड़ी हुई है।

डेयरी उत्पाद

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 28.11 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पादों का निर्यात किया, जो देश के कुल डेयरी निर्यात का 28.9 प्रतिशत है। इस श्रेणी में प्रमुख निर्यातित उत्पादों में मक्खन व डेयरी फैट तथा चीज और दही शामिल हैं।

पश्चिम एशिया को मक्खन और डेयरी फैट का निर्यात 20.3 करोड़ डॉलर का रहा, जो इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का 58.1 प्रतिशत है। वहीं चीज और दही का निर्यात 3.14 करोड़ डॉलर का रहा, जिसमें से 47.8 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र को गया। खाड़ी देशों की मांग गुजरात, पंजाब और राजस्थान के डेयरी प्रोसेसिंग उद्योग को सहारा देती है। 

पेय पदार्थ और अल्कोहल

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 19.75 करोड़ डॉलर के मादक और गैर-मादक पेय पदार्थों का निर्यात किया। यह इस श्रेणी में भारत के कुल निर्यात का 43.3 प्रतिशत है। प्रमुख निर्यातित उत्पादों में सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य गैर-मादक पेय पदार्थ तथा बीयर शामिल हैं।

पश्चिम एशिया को सॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य गैर-मादक पेय पदार्थों का निर्यात 5.15 करोड़ डॉलर का रहा, जो इन उत्पादों के कुल भारतीय निर्यात का 55.6 प्रतिशत है। वहीं बीयर का निर्यात 3.42 मिलियन डॉलर का रहा और 81 प्रतिशत निर्यात इसी क्षेत्र को गया। यह दर्शाता है कि भारतीय पेय उद्योग के निर्यातक खाड़ी बाजारों पर काफी हद तक निर्भर हैं।

तंबाकू और संबंधित उत्पाद

वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को 23.8 करोड़ डॉलर का कच्चा तंबाकू, 5.46 करोड़ डॉलर की सिगरेट और सिगार तथा 21.58 करोड़ डॉलर के तैयार तंबाकू उत्पादों का निर्यात किया। ये निर्यात इन उत्पादों के भारत के कुल निर्यात का 16.9 से 50.9 प्रतिशत हिस्सा हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया के बाजार में किसी भी व्यवधान का प्रभाव आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के तंबाकू उत्पादकों और प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है।

उत्पाद-वार निर्यात जोखिम

पश्चिम एशिया भारत के कई कृषि उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है, लेकिन विभिन्न उत्पादों में इस क्षेत्र पर निर्भरता अलग-अलग स्तर की है। जोखिम का आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत के कुल निर्यात का कितना हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है। जितना अधिक हिस्सा इस क्षेत्र में जाता है, उतना ही किसानों, प्रोसेसरों और निर्यातकों के लिए खाड़ी क्षेत्र में व्यापार बाधित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

अत्यधिक जोखिम वाले उत्पाद:
वे उत्पाद जिनके 70 प्रतिशत से अधिक निर्यात पश्चिम एशिया को होते हैं, सबसे अधिक जोखिम वाले हैं। इनमें भेड़ और बकरी का मांस (98.9%), ताजा या चिल्ड बीफ (97.4%), कोप्रा या सूखा नारियल गिरी (83.9%), बीयर (81.0%), केला (79.6%), तथा जायफल, जावित्री और इलायची (70.5%) शामिल हैं। इनकी खाड़ी बाजारों पर निर्भरता अत्यधिक है, क्योंकि इनके कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है।

उच्च जोखिम वाले उत्पाद:
वे उत्पाद जिनके निर्यात का लगभग 40-60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के बाजार पर निर्भर है। उनमें मक्खन और डेयरी फैट (58.1%), सॉफ्ट ड्रिंक और गैर-मादक पेय (55.6%), नारियल और पाम कर्नेल तेल (52.5%), तैयार तंबाकू उत्पाद (50.9%), अन्य ताजी सब्जियां (50.8%), चीज और दही (47.8%), अन्य ताजे फल (44.8%), चाय (44.1%), सूरजमुखी या बिनौला का तेल (42.2%) तथा सिगरेट, सिगार और सिगारिलोस (40.0%) शामिल हैं।

मध्यम जोखिम वाले उत्पाद:
वे उत्पाद जिनके निर्यात का लगभग एक-चौथाई से एक-तिहाई हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है, उनमें चावल (36.7%), नारियल और काजू (35.8%), फ्रोजन बीफ (28.9%), प्रोसेस्ड फल और मेवे (27.6%), प्याज, लहसुन और कुछ सब्जियां (26.9%), जीरा और धनिया जैसे मसाला बीज (23.4%), अदरक और हल्दी (23.0%) तथा दालें (21.9%) शामिल हैं।

कम जोखिम वाले उत्पाद:
वे उत्पाद जिनकी पश्चिम एशिया पर निर्भरता अपेक्षाकृत कम है, उनमें कॉफी (17.7%), ब्रेड, बिस्कुट और बेकरी उत्पाद (17.7%), कच्चा तंबाकू (16.9%), अन्य फूड प्रिपरेशन (16.9%), चीनी (16.4%) तथा क्रस्टेशियंस जैसे झींगा और प्रॉन (4.3%) शामिल हैं।

जीटीआरआई (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि निर्यात की पश्चिम एशियाई बाजारों पर गहरी निर्भरता बन गई है, विशेषकर चावल, केले, मसाले, मांस और डेयरी उत्पादों जैसे सामान के लिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने अपने कृषि निर्यात का पांचवां हिस्सा इस क्षेत्र को भेजा।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक निकटता और खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, समुद्री शिपिंग मार्गों में व्यवधान और बीमा लागत में बढ़ोतरी के कारण अब निर्यातकों के सामने अनिश्चितता बढ़ रही है। इसका सीधा असर कई भारतीय राज्यों के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है।

विभिन्न उत्पादों के लिए जोखिम का स्तर अलग है। भेड़ और बकरी का मांस, ताजा बीफ, केले, खोपरा (सूखा नारियल) और कुछ मसालों का 70 प्रतिशत से अधिक निर्यात पश्चिम एशिया को होता हैं। ऐसे में यदि व्यापार प्रवाह बाधित होता है तो ये क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा डेयरी उत्पाद, पेय पदार्थ, चाय और कई खाद्य तेल भी खाड़ी देशों की मांग पर काफी हद तक निर्भर हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अस्थिरता बनी रहती है तो इसका असर भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। 

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